असम में चुनावी सरगर्मियां तेजी पर हैं। वर्तमान में बीजेपी सत्ता में है। लेकिन पूरे प्रदेश में हालात सामान्य नहीं है। लोगों में सत्ता से नाखुश हैं। सीएए और एनअइतनइतनाारसी को लेकर पिछले सवा साल से लोग आन्दोलन कर रहे हैं। युवा, व्यापारी और उद्योग धंधे सभी लोग भविष्य को लेकर परेशान है। पूरे प्रदेश में सेना और सुरक्षा बल तैनात है। सीएए और एनआरसी को लेकर छात्र व युवा आक्रोषित हैं।
पांच साल पहले 2015 में बीजेपी ने असम गण परिषद और एआईयूडीएफ के साथ गठबंधन कर चुनाव जीत कर सत्ता पायी थी यहां बीजेपी ने सर्वदानंद सोनोवाल को सीएम बनाया। बदरुद्दीन अजमल की पार्टी के 12 विधायकों ने असम बीजेपी सरकार को पूरा समर्थ दिया। बदरुद्दीन अजमल के अनुसार प्रदेश सरकार ने पूरे पांच साल जनहित में कोई काम नहीं किया। बीजेपी और सरकार ने केवल सांप्रदायिकता फैलायी और समाज को हिन्दू मुस्लिम में बांट कर दंगे करवायें। इस बार हम कांग्रेस के साथ गइबंधन कर प्रदेश से बीजेपी का सफाया करेंगे। बीजेपी के लिये असम बदरुद्दीन सबसे बड़ा दुश्मन है।
इनसे पहले भी असम में कांग्रेस की सरकारें रही हैं। उनके शासन में भी बुरा माहौल नहीं था। बेरोजगारी, महंगाई और पेटोल डीजल और रसोई गैस के दामों में बेतहाशा वृद्धि हो रही इस मामले में केन्द्र सरकार ने को राहत नहीं दी है। इस बार के चुनावों में बीजेपी राह इस बार आसान नहीं दिख रही है।








