सहरसा: बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में महागठबंधन का स्वरूप बदला गया है. 2015 में जो पार्टियां एक साथ थीं, वो इस बार एक-दूसरे के सामने खड़ी हैं. वहीं जो अलग-अलग चुनाव लड़ रही थीं, वो इस बार एक साथ है. गठबंधनों के इसी स्वरूप परिवर्तन की वजह से कई सीटिंग विधायक की टिकट कट गई है. ऐसे में टिकट कटने से नाराज विधायकों ने पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है.

जाप की टिकट पर चुनाव लड़ने का किया एलान

ताजा मामला सहरसा के सिमरी बख्तियारपुर विधानसभा सीट की है, जहां से आरजेडी ने सीटिंग विधायक जफर आलम की टिकट काटकर किसी दूसरे को इस क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया है. ऐसे में टिकट पर कटने से नाराज विधायक जी ने बगावती तेवर अपनाते हुए जाप की टिकट पर चुनाव लड़ने का एलान कर दिया है.

पार्टी ने मुझे दिया धोखा

इधर, जाप की टिकट पर चुनाव लड़ने की घोषणा के बाद जफर आलम ने आरजेडी पर हमला बोलते हुए कहा कि मैंने पार्टी के हित में अपनी पूरी जिंदगी बिता दी. मैंने अपने नेता तेजस्वी यादव को कहा मुझे और पांच वर्ष में काम करने का मौका दीजिए, तो वो मुझे बार-बार भरोसा दिलाते रहे कि सिमरी बख्तियारपुर विधानसभा से आपको ही टिकट दिया जाएगा. लेकिन ऐन मौके पर पार्टी में जिस आदमी का नामों निशान नहीं है, उसे एक दिन में सदयस्ता दिलाकर, उम्मीदवार घोषित कर दिया गया. यह बख्तियारपुर की जनता के साथ सौतेला व्यवहार करने जैसा है.

धनबल पर बिक गई सीट

उन्होंने पार्टी पर आरोप लगाते हुए कहा कि सिमरी बख्तियारपुर विधानसभा की सीट इस बार धनबल पर बिक गई है. यह सिमरी बख्तियारपुर के जनता को मंजूर नहीं है, इसलिए मैंने कार्यकर्ताओं के मूड को देखते हुए जन अधिकार पार्टी (लो) के साथ मिलकर अपने विधानसभा क्षेत्र में कार्य करने का फैसला लिया है.

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