In 2022 Nitish Kumar left NDA and joined Maha Gthbandhan
In 2022 Nitish Kumar left NDA and joined Maha Gthbandhan

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राम विलास पासवान के बाद नितीश कुमार ने मौसम विज्ञानी का खिताब अपना लिया है। जैसा कि बिहार की राजनीति चल रही है उससे लगता ह्रै कि वो जल्द ही बीजेपी से नाता तोड़ने वाले हैं। उन्होंने राजद के नेता तेजस्वी से मुलाकातें तेज कर दी हैं। इफ्तार के बहाने ही सही नितीश और तेजस्वी एक दूसरे के करीब आ रहे हैं। यह संकेत बीजेपी के लिये शुभ नहीं हैं। वैसे भी वर्तमान सरकार में बीजेपी के साथ असहज हैं। वैसे भी नितीश कुमार बहुत ज्यादा समय तक किसी एक के होकर नहीं रहे हैं। इससे पहले भी वो बीजेपी के साथ एनडीए के घटक रहे हैं। लेकिन बाद में हाथ झटक कर वो राजद और कांग्रेस के साथ हाथ मिला कर सत्ता काबिज कर चुके हैं। पिछले चार पांच सालों में वो एक बार फिर से बीजेपी के साथ हाथ मिला कर सीएम बने हुए है। लेकिन पिछले चुनाव में वो बिहार में तीसरे नंबर की पार्टी बन गयी। पहले नंबर पर बीजेपी और दूसरे नंबर पर लालू यादव की पार्टी रही। इससे नितीश कुमार का आत्मबल कम हुआ है। ऐसे में नितीश कुमार का तेजस्वी यादव के साथ मुलाकातें करना एक बार फिर बिहार केी राजनीति में बदलाव के संकेत दे रहे हैं। वैसे भी राजनीति में हमेशा दुश्मनी बरकरार नहीं रहती है। राजद और जेडीयू के रिश्तों में एक बार फिर मधुरता के आसार नजर आ रहे हैं।

इससे पहले बिहार में नितीश कुमार बिग ब्रदर की हैसियत से चुनाव लड़ते थे। पिछला चुनाव भी नितीश की सरपरस्ती में लड़ा गया। लेकिन चुनाव परिणाम नितीश की पार्टी जेडीयू के पक्ष में नहीं आये। इस बार जेडीयू के केवल 42 विधायक ही जीत सके वहीं दूसरी ओर बीजेपी ने सबसे अधिक 75 सीटोंं पर जीत हासिल की। यानि अब बिग ब्रदर की भूमिका में अब बीजेपी है और नितीश कुमार की भूमिक अब छोटे भाई की हो गयी है। नितीश कुमार की हैसियत तो सीएम की है लेकिन पहले जैसे न तो तेवर हैं और न ही रसूख रह गया। बीजेपी के नेता और विधायक अपनी सरकार के खिलाफ बयान देते रहते हैं। जो नितीश अपनी सौम्यता और कूलनेस के लिये जाने जाते थे वो छवि भी टूट रही है। अक्सर वो अपना आपा खो बैठते हैं और भूल जाते हैं कि वो एक संवैधानिक पद पर बैठे है। अक्सर वो पत्रकारों से उलझ जाते हैं कभी वो विधानसभा स्पीकर से उलझते हैं तो कभी विपक्षी दलों के नेताओं से तू तू मैं में कर बैठते हैं। हालात यह हैं कि नितीश कुमार खिसियानी बिल्ली की तरह खंबा नोंच कर रह जाते हैं।

वैसे भी नितीश कुमार कुछ बातों को लेकर बीजेपी से मतभेद रखते हैं। बिहार में काफी समय से जातिगत मतगणना की मांग की जारी है। लेकिन भाजपा इसके खिलाफ है। इस मुद्दे पर नितीश कुमार मतगणना के पक्ष में हैं। इसके लिये उन्होंने केन्द्र सरकार को चिटठी भी लिखी है लेकिन मोदी सरकार ने इस बात पर कोई ठोस जवाब नहीं दिया है। इस मुद्दे पर जेडीयू और आरजेडी के साथ कांग्रेस भी एक सुर से समर्थन कर रहे है। वहीं बिहार को स्पेशल स्टेटस देने की मांग काफी समय से लंबित है उसे भी मोदी सरकार ने स्वीकार नहीं किया है। बिहार को केन्द्र से सिर्फ कोरे आश्वासन ही मिले हैं।

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