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बिहार में राजनीतिक घटनाक्रम में तेजी देखी जा रही है। मीडिया में सबसे बड़ी खबर गर्मा रहीहै कि आरजेडी के दिग्गज नेता तेजस्वी यादव और चिराग पासवान के बीच मीटिंग हुई उसके बाद से ही मीडिया में यह चलने लगा कि तेजस्वी और चिराग के बीच खिचड़ी पक रही है। अनुमान लगाया जा रहा है कि कुछ बड़ा होने जा रहा है। इसके साथ ही आरएलएसपी प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा भी एनडीए में घुटन महसूस करने लगे हैं। इस बात का पता इस बात से चलता है कि पीएम मोदी की हाल की रैली में ये दोनों ही नेता शामिल नहीं हुए थे। ये सब एक माह के भीतर ही यह बदलाव देखने को मिल रहा है। यह भी सुनने में आ रहा है कि महागठबंधन की ओर से चिराग पासवान को बिहार में आठ सीट और यूपी में 2 सीट देने का आफर दिया है। जबकि एनडीए से उन्हें सिर्फ एक सीट ही मिलने के आसार हैं।
चिराग और उपेंद्र कुशवाहा में रोष
आम चुनाव होने में दो माह से कम का समय रह गया है। अभी तक एनडीए में सीट शेयरिंग का फैसला भी नहीं हुआ है। ऐसे हालात में लोगों में चर्चा है कि एनडीए में सब कुछ ठीक ठाक नहीं चल रहा है। छोटे क्षेत्रीय दल भाजपा के रवैये से नाराज होते दिख रहे है। हम प्रमुख जीतनराम मांझी और वीआइपी प्रमुख मुकेश सहनी भी खुश नहीं दिख रहे हैं। जब तक नितीश कुमार एनडीए में नहीं थे तो मोदी शाह उनकी मांग अनुरूप लोकसभा चुनाव में सीट देने को राजी थे लेकिन अब उनके व्यवहार में रूखापन देखने को मिल रहा है।
वैसे भी चिराग पासवान और नितीश कुमार के बीच छत्तीस का आंकड़ा जग जाहिर है। पिछले विधानसभा चुनाव में चिराग पासवान ने नितीश कुमार के खिलाफ काफी तीखी बयानबाजी की थी। उस वजह से नितीश कुमार की पार्टी जदयू को काफी झटका लगा था। वो जनसभाओं में खुलकर कहते थे कि वो मोदी के हनुमान हैं। चिराग आज भी नितीश कुमार को पचा नहीं पा रहे है। जबकि दोनों ही इस समय एनडीए के घटक दल है। चिराग मानते हैं कि उनकी पार्टी को तोड़ने में नितीश कुमार का प्रमुख हाथ था। जबकि असलियत तो यह है कि एलजेपी को तोड़ने में मोदी और शाह का हाथ था। इस बात का खुलासा तब हुआ पीएम मोदी ने चिराग पासवान के चाचा पशुपति नाथ पारस को कैबिनेट में कैबिनेट मंत्री बना दिया और चुनाव आयोग ने भी पारस गुट को असली एलजेपी घोषित कर उनके भारी झटका दिया था। चिराग पासवान को नितीश् कुमार के अलावा एनडीए में शामिल अपने चाचा पारस से भी परेशानी है। पारस का कहना है कि पुत्र होने के कारण चिराग पासवान संपत्ति में उत्तराधिकारी हो सकते हैं लेकिन राजनीति में रामबिलास पासवान का असली वारिस हूं।
आम चुनाव में एनडीए को होगी दिक्कत!
बिहार में रोज राजनीतिक बदलाव देखा जा रहा है। कुछ समय पहले एनडीए में बिहार के एलजेपी चिराग पासवान और आरएलएसपी शामिल हुए थे। उस समय नितीश कुमार का जेडीयू एनडीए में शामिल नहीं हुआ था। तब तक एनडीए में उपेंद्र कुशवाहा और चिराग पासवान सामान्य थे। लेकिन जब से नितीश कुमार ने एनडीए में एन्ट्री मारी है तब से चिराग पासवान और उपेंद्र कुशवाहा बेचैन हो गये हैं। देश के आम चुनाव में बिहार राजनीति सबसे अलग होती है। यहां जातिगत राजनीति अभी भी प्रभावी है। यहां के प्रमुख दल आरजेडी,जेडीयू और कांग्रेस हैं। जेडीयू बारी बारी से कई बार एनडीए और महागंठबंधन के साथ मिलकर सरकार बना चुका है। फिलहाल जेडीयू एक बार फिर एनडीए के साथ हो चला है। इसके बावजूद बिहार में सबसे बड़े दल के रूप में आरजेडी ही है। यहां आम चुनाव में एनडीए और इंडिया गंठबंधन के बीच होता दिख रहा है।







