बिहार की गद्दी संभाल नितीश कुछ ही समय बीता है लेकिन उनके दिल ओ दिमाग में कुछ चल रहा है। एक बीेजेपी का दबाव दूसरा पार्टी में बिखराव दोनों से परेशान हो गये थे। बीजेपी ने बिहार सरकार में अपने दो उपमुख्यमंत्री भी चिपका दिये गये हैं। बीजपेी के अधिक एमएल होने से सीएम पर दबाव भी पड़ रहा था। इसी बीच अरुणाचल में जेउीयू के विधायकों में बीजेपी ने सेंध लगा दी। छह विधायकों ने जदयू को छोड़ कमल थाम लिया। इससे नितीश कुमार को भारी सदमा लगा लेकिन उन्होंने जाहिर नहीं होने दिया। दो दिन बाद उन्होंने पार्टी की राष्ट्रीय कारिणी की बैठक में अचानक नितीश कुमार ने अध्यक्ष पद छोड़ दिया और अपने विश्वसनीय नेता आरसीपी सिंह को अध्यक्ष बना दिया। साथ ही यहां तक कह डाला कि मुझे सीएम पद नहीं संभालना एनडीए चाहे जिसे सीएम बना दे। जेडीयू नेता केसी त्यागी ने अरुणाचल मामले पर कहा कि बीजेपी ने गठबंधन धर्म पर दाग लगाया है। लेकिन जडीयू ने इस बात पर कोई संकेत नहीं दिये कि बिहार में सरकार पर इस बात को कोई असर पड़ेगा या नहीं। लेकिन ये बात सभी जानते हैं कि नितीश कुमार सब याद रखते हैं। मौका पड़ने पर वो पलटवार जरूर करते हैं।
जेडीयू और बीजेपी का केवल बिहार में ही गठबंधन है। अन्य प्रदेशों में दोनों ही दल चुनाव में अपने अपने उम्मीदवार उतारते है। 2021 में असम और वेस्ट बंगाल में विधानसभा चुनाव होने हैं। हो सकता है कि नितीश बिहार चुनाव का बदला भाजपा से बदला ले सकते हैं।
हो सकता है कि नितीश बिहार चुनाव का बदला भाजपा से बदला ले कसते हैं। बिहार विधान सभा चुनाव में बीजेपी ने नितीश की पीठ में चिराग पासवान नाम का छुरा घोंपा है। वेस्ट बंगाल विधानसभा चुनाव में नितीश अपने उम्मीदवार उतार कर बीजेपी का खेल बिगाड़ सकते हैं। या यह कहा जाये कि बीजेपी की राह में रोड़े अटकाने का काम कर सकती है। इनडाइरेक्ट वो ममता सरकार को फायदा पहुंचाने का काम कर सकते है। बीजेपी में आने से पले नितीश और ममता के बीच संबंध सामान्य थे।








