बिटकॉइन निवेशकों के लिए गुरुवार 10 फीसदी के झटके के साथ शुरू हुआ। इस गिरावट के साथ पिछले 10 दिनों से चली आ रही अनिश्चितता को और बल मिला। आठ जनवरी के 42000 डॉलर के रिकॉर्ड स्तर से बिटकॉइन गुरुवार को 31,977 डॉलर के भाव तक पहुंच गया है। वैश्विक बाजारों की स्थिरता के लिए खतरा बन चुकी इस क्रिप्टोकरेंसी को लेकर पहले से ही चिंताएं जताई जा रही थीं। अब ताजा घटनाक्रम के अनुसार इसके निवेशकों में इस बात का डर है कि अमेरिका के नए राष्ट्रपति जो बाइ़डन कहीं इस अभासी मुद्रा पर किसी तरह के नियम लगाकर इसे रेगुलेट करने का आदेश न दे दें।

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बता दें भारत सरकार भी बिटक्वाइन ट्रेडिंग पर 18 फीसदी गुड्स और सर्विस टैक्स (जीएसटी) लगाने पर विचार कर रही है। बिटक्वाइन कारोबार करीब सालाना 40 हजार करोड़ रुपये आंका गया है। वित्त मंत्रालय की शाखा केंद्रीय आर्थिक खुफिया ब्यूरो (CEIB) ने इस प्रस्ताव को केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) के समक्ष रखा है। सरकार को बिटक्वाइन की ट्रेडिंग से सालाना 7,200 करोड़ रुपये मिल सकते हैं।

बिटकॉइन की कीमतों में आया रिकॉर्ड उछाल

दुनियाभर में क्रिप्टोकरेंसी (CryptoCurrency) बिटकॉइन (Bitcoin) में रिकॉर्ड तोड़ तेजी जारी है। मोटे मुनाफे के कारण बड़े निवेशक इसमें निवेश कर रहे हैं। पिछले दिनों पहली बार बिटक्वाइन 42000 डॉलर के पार पहुंच गया। बिटक्वाइन और ब्लूमबर्ग गैलेक्स क्रिप्टो इंडेक्स इस साल तीन गुना हो चुके हैं।

क्या होती है क्रिप्टोकरेंसी यानी बिटक्वाइन?

 क्रिप्टोकरेंसी एक डिजिटल करेंसी होती है, जो ब्लॉकचेन तकनीक पर आधारित है। इस तकनीक के जरिए करेंसी के ट्रांजेक्शन का पूरा लेखा-जोखा होता है। क्रिप्टोकरेंसी का परिचालन केंद्रीय बैंक से स्वतंत्र होता है, जो कि इसकी सबसे बड़ी खामी है। 

ऐसे होती है बिटक्वाइन में ट्रेडिंग

बिटकॉइन ट्रेडिंग डिजिटल वॉलेट (Digital wallet) के जरिए होती है। बिटकॉइन की कीमत दुनियाभर में एक समय पर समान रहती है। इसे कोई देश निर्धारित नहीं करता बल्कि डिजिटली कंट्रोल होने वाली करंसी है। बिटकॉइन ट्रेडिंग का कोई निर्धारित समय नहीं है, जिसके कारण इसकी कीमतों में उतार-चढ़ाव भी तेजी से होता है।

इससे जुड़े जोखिम क्या हैं

शेयर बाजार में किसी शेयर के दाम उस कंपनी की लाभ की स्थिति या किसी बांड की मुनाफे की हालत को देखकर तय होते हैं, लेकिन बिटक्वाइन में ऐसा कतई नहीं है। इसकी कीमत तय करने का कोई आधार ही नहीं है। इसकी वकालत करने वाले लोग यह दावा करते हैं कि सोने जैसे अन्य निवेश संसाधनों में भी किसी तरह की वैल्यू उनके दाम से जुड़ी नहीं होती। बिटक्वाइन के दाम में होने वाला जबरदस्त उतार-चढ़ाव काफी तनाव देने वाला हो सकता है। 



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