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भाजपा के लिये योगी और केशव प्रसाद मौर्य का मामला सांप छछूंदर का हो गया है। न उगल सकते है और न ही निगल सकते हैं। इधर कुआं उधर खाई है। मोदी शाह को लोकसभा चुनाव में भारी झटका लगा है। इससे वो उबर भी नहीं पाये कि योगी और केशव प्रसाद का मसला गहरा गया है। केशव प्रसाद ने तो खुलआम जंग का ऐलान ही कर दिया है। दिल्ली पहुंचने से पहले वो लगभग साठ विधायकों से मिले थे। इस बार मौर्य ने आर पार की लड़ाई का मन बना लिया है। वैसे एक बात तो है कि योगी पांच बार के सांसद हैं। साथ ही उनका पूर्वांचल में भारी दबदबा भी कायम है। 
योगी को मोदी शाह चाह कर भी नहीं हटायेंगे
मोदी शाह के आगे समस्या ये है कि फिलहाल वो योगी को यूपी से नहीं हटाना चाहते हैं। कारण यह है कि वहां सिर पर 10 जगहों पर विधानसभा के उप चुनाव होने हैं। लोकसभा चुनाव में पहले ही भाजपा की किरकिरी हो चुकी है। मोदी शाह नहीं चाहते हैं कि उप चुनाव में भी भाजपा की नैया डूब जाये। लेकिन यूपी में भाजपा और सरकार के बीच इतनी कलह बढ़ गयी है कि सब कुछ जनता के सामने आ गया है। लोकसभा चुनाव में मिली हार के कारणों को जानने के लिये दिल्ली से जेपी नड्डा ने योगी समेत सभी नेताओं से मुलाकात की। सबने अपनी अपनी राय रखी। नड्डा ने कहा कि हमें सब कुछ भुला कर उपचुनाव और 2027 के चुनाव की तैयारी में जुट जाना है। भाजपा वो पार्टी है जिसकी चर्चा देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में होती है।
अति उत्साह से चुनावी नुकसान हुआ—योगी
योगी ने कहा कि अति आत्मविश्वास और अतिमहत्वाकांक्षा की वजह से यूपी आम चुनाव में नुकसान हुआ है। लेकिन डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने हार का ठीकरा योगी सरकार पर फोड़ते हुए कहा कि सरकार नहीं संगठन बड़ा होता है। वर्तमान सरकार मे अहंकार देखा जा रहा था। पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं की बात अधिकारी सुनते नहीं हैं।

सीएम अपने विधायकों और मंत्रियों तक से मुलाकात नहीं करते हैं। इस कारण कार्यकर्ता और नेताओं में नाराजगी है। लेाकसभा चुनाव में भाजपा की दुर्गिति के लिेये प्रमुख कारण ये भी है। प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी ने योगी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि आम चुनाव में प्रशासन का पार्टी को सहयोग नहीं मिला। चौधरी का मतलब प्रशासन उनके उम्मीदवार को जिताने में सहयोग करता जैसे कि गुजरात मध्यप्रदेश और उत्तराखंड में पूरा प्रशासन बीजेपी को समर्पित हो जाता है।








