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मोदी विरोधी पत्रकार भी खाल बचाने की कवायद में
कहते हैं कि असली हमर्दद और दोस्तों की पहचान हमेशा बुरे वक्त में होती है। यह बात आज के पत्रकारों पर सटीक बैठती है। तीन दिसंबर के पहले तक जो पत्रकार बीजेपी के खिलाफ जमकर विरोध और ताने मारते थे उन्होंने एक दम से पल्टी मार कर तारीफ करना शुरू कर दिया है। कांग्रेस के लिये हमेशा सॉफ्ज कार्नर रखने वाले पत्रकार अपने यू ट्यूब पर मोदी सरकार की बखिया उधेड़ने में लगे रहते थे। उनके चैनल्स पर आने वाले गेस्ट वरिष्ठ पत्रकार भी जमकर बीजेपी सरकारों के कार्यप्रणाली और नीतियों की आलोचना करने में जुटे रहते थे आज अचानक उनके सुर बदल गये हैं। हमेशा कांग्रेस के पक्ष में दलीलें देने वाले आज कांग्रेस की बखिया उधेड़ने में लग गये हैं। इसे कहते तोता चश्म व्यवहार करने वाले चमचे। तीन दिसंबर को चार विधानसभाओं के चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद से ही इन यूट्बर्स और स्वतंत्र पत्रकारों ने अपनी निष्ठायें बदल दी है। इन सभी लोगों ने राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार बनने की पुरजोर भविष्य वाणी की थी। लेकिन परिणाम इनकी उम्मीदों के बिल्कुल उलट आने से इनको अपने धंधे पानी की भी चिंता सताने लगी यही वजह है कि इनके निशाने पर कांग्रेस आ गयी है।
अभिसार, दीपक शर्मा, अशोक वानखेड़े नवीन कुमार आदि के सुर बदले
तीन दिसंबर को चुनाव रिजल्ट आने के बाद से ही इन पत्रकारों को सारी बुराइयां कांग्रेस में दिखने लगी है। परिणाम आने से पहले दीपक शर्मा, राजीव कुमार श्रीवास्तव, अशोक कुमार पाण्डेय डा. राकेश पाठक, प्रमोद अग्रवाल, प्रशांत टंडन, अभिसार शर्मा, पुण्य प्रसून बाजपेयी, नवीन कुमार, साक्षी जोशी और प्रज्ञा मिश्रा जैसे लोग अपने कार्यक्रमों में बीजेपी सरकार की नीतियों और कार्यप्रणाली पर जमकर प्रहार करते थे। लेकिन परिणाम भाजपा के फेवर में आने के बाद से ही इनके सुर भी बदल गये है। इन लोगों ने इन परिणमों की उम्मीद सपने में भी नहीं की थी। सबके सब कांग्रेस की सरकारें बनने की पैरवी कर रहे थे। लेकिन देश का मेन स्ट्रीम मीडिया जैसे पहले से जानता रहा कि भाजपा की ऐतिहासिक जीत होने वाली है उसकी डुगडुगी वो महीनों पहले से बजा रहा था।

भाजपा सरकारों के बनने से हड़कंप
जैसे ही चुनावी नतीजे सामने आये भाजपा की आलोचना करने वाले पत्रकारों के आगे वजूद बचाने की कवायद शुरू हो गयी। मध्यप्रदेश के वो पत्रकार जो बीजेपी समर्थक नहीं थे वो काफी समय से सरकार और भाजपा के खिलाफ एकजुटता से विरोध जताने में जुटे थे। उन्हें पूरा विश्वास था कि इस बार प्रदेश में बदलाव तो निश्चित है लेकिन मोदी की रणनीति के आगे कांग्रेस एकदम धराशायी हो गयी। इतनी बुरी हार की कांग्रेस ने सपने में भी कल्पना भी नहीं की होगी। डीबी लाइव न्यूज चैनल तो साफ तौर पर कांग्रेस का समर्थक जाना जा रहा था। उनके चैनल की डिबेट में भाग लेने वाले सभी पैनलिस्ट कांग्रेस समर्थक ही आते थे। अब उन्हें चैनल के चीफ एडिटर राजीव कुमार को अपने चैनल और खुद को बचाने की जरूरत आन पड़ी है। शायद यही वजह है कि अन्य पत्रकारों ने अपनी खाल बचाने के लिये यू टर्न लेने में ही भलाई समझ मानी है।








