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महाराष्ट्र में राजनीतिक समीकरण काफी तेजी से बदल रहे हैं। पिछले दो तीन माह में जो राजनीतिक उथल पुथल देखी गयी उसकी सूत्रधार बीजेपी ही थी यह बात साबित हो गयी है। क्यों कि अब महाराष्ट्र में बीजेपी की ही सरकार बन गयी है। ऐसा करने के लिये बीजेपी ने जो साजिश रची उसमें तत्कालीन सीएम उद्धव ठाकरे और शिवसेना बुरी तरह फंस गयी। आखिरकार शिवसेना के दो गुट बन गये एकनाथ शिंदे गुट ने बीजेपी के साथ मिलकर सरकार का गठन कर लिया और बीजेपी की महाराष्ट्र एक बार फिर सरकार बन गयी। हां बीजेपी ने शिवसेना से 2019 का बदला ले लिया। सीएम भले ही एकनाथ शिंदे हों लेकिन सरकार देवेंद्र फडणवीस ही चला रहे हैं। अब चुनाव आयोग ने शिवसेना के दोनों गुटों को अलग अलग चुनाव चिन्ह आवंटित किये हैं। ठाकरे गुट को जलती मशाल और शिंदे गुट को दो तलवार और ढाल मिले हैं। अब दोनों ही उपचुनाव में इन्हीं निशानों के हिसाब से प्रचार करेंगे। इन हालातांे में बीजेपी को दोहरा फायदा होता दिख रहा है। वो अगले विधानसभा चुनाव में सीएम पद के लिये देवेंद्र फडणवीस को प्रोजेक्ट करेगी। तब शिंदे गुट का क्या होगा। प्रदेश की जनता उन्हे रियल शिवसेना के रूप में स्वीकार करेगी ये उपचुनाव में तय हो जायेगा। इस सरकार में सबसे ज्यादा फायदा एकनाथ शिंदे को हुआ है बाकी सब विधायकों को कोई खास फायदा नही हुआ है। कुछ विधायक तो ठाकरे सरकार में भी मंत्री थे। लेकिन बाकी बचे विधायकों के हिस्से में केवल गद्दार होने की बदनामी ही हाथ लगी है।
2019 में विधानसभा चुनाव बीजेपी और शिवसेना ने एक साथ लड़ा था। बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरी। शिवसेना के 55 विधायक चुन कर आये और बीजेपी के 106। लेकिन जब सरकार बनाने बात आयी तो शिवसेना और बीजेपी में सीएम पद की उम्मीदवारी को लेकर तना तनी हो गयी। बीजेपी देवेंद्र फडणवीस को फिर से सीएम बनाना चाह रही थी। लेकिन शिवसेना इस बात के लिये अड़ गयी कि इस बार सीएम शिवसेना का ही बनेगा। जब बात नहीं बनी तो शिवसेना ने एनसीपी और कांग्रेस के साथ मिलकर प्रदेश में सरकार बना ली। यह बात बीजेपी को हजम नहीं हो रही थी कि सबसे अधिक विधायक जीतने के बाद भी वो सरकार बनाने में सफल नहीं रही। पिछले दो ढाई साल से वो मौका तलाश रही थी। उसने शिवसेना के नारज विधायकों को बगावत करने पर मजबूर कर दिया और महाविकास अघाड़ी सरकार का पतन हो गया।








