CM Nitish Kumar once again unhappy from Modi Shah due to false promises
CM Nitish Kumar once again unhappy from Modi Shah due to false promises

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Cm Nitish Kumar is feeling not well in current sitiuation in Bihar

इन दिनों बिहार में शराब पीने से 53 से ज्यादा लोगों की मौत हो गयी है। पूरे देश में इस बात की चर्चा हो रही है। खास तौर से बीजेपी इस मामले को लेकर नितीश तेजस्वी की सरकार पर हमलावर है। सदन से सड़क ​बीजेपी जेडीयू और आरजेडी गठबंधन की सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किये जा रहे हैं। बीजेपी इस मामले को लेकर नितीश कुमार का इस्तीफा मांग रही है। दिलचस्प बात यह है कि चार माह पहले तक नितीश कुमार की बिहार में भाजपा के लोग तारीफ करते नहीं थकते थे। लेकिन आज जब नितीश ने बीजेपी का गंदा चेहरा पहचान लिया है तो भाजपा के लिये नितीश से बड़ा कोई राजीतिक ​दुश्मन कोई नहीं है। इसके पीछे एक कारण यह भी है कि नितीश अब भाजपा के समूल नाश की तैयारी में जुट गये है। उन्होंने साफ कर दिया है कि उनका पहला लक्ष्य देश व सत्ताा से भाजपा को हटाना है।मोदी के आगे अब मेन फ्रंट खड़ा होगा। यह बात भाजपा और मोदी शाह को मालूम है कि बिहार में जो भी सत्ता में हिस्सेदारी पायी है उसमें नितीश कुमार का बड़ा योगदान है।

ओरेवा कपनी का मालिक आज भी आजाद

मोरबी हत्याकांड का मुख्य आरोपी जयसुख पटेल आज भी आजाद घूम रहा है। गुजरात सरकार और पुलिस ने उसके खिलाफ कोई ऐक्शन नहीं लिया है और आगे भी कोई आसार नहीं दिख रहे हैं। अब तो एक बार फिर से गुजरात में भूपेंद्र पटेल की सरकार बन गये है उन्हें बीजेपेी दोबारा मुख्यमंत्री बनाया है। मोरबी कांड भी भूपेंद्र पटेल के शासन में हुआ था साथ ही अर्बन डेवलपमेंट विभ्ज्ञाग सीएम के अंडर में आता है। इसलिये इस काड की आंच भूपेंद्र पटेल तक पहुंच रही थींं लेकिन चुनाव जीतने के बाद अब सरकार और सीएम ने सब मैनेज कर लिया है। कुछ भी नहीं बदलने वाला है गुजरात में। वही धार्मिक उन्माद और हिन्दू मुस्लिम और मंदिर मस्जिद का मसला हमेशा की तरह बरकरार रहेगा। मोरबी कांड में संलिप्त ओरेवा कंपनी के मालिक जयसुख पटेल और मोरबी प्रशासन का राज हमेशा लिये दफ्न हो जायेगा। गुजरात हाईकोर्ट भी नोटिस भेज कर पनी जिम्मेदारी से साइड हो गया है। यह चर्चा है कि बीजेपी जनता से लेकर कोर्ट तक को सेट कर लिया है।

भाजपा का बिहार में गणित बिगड़ा

पिछले आम चुनाव में जेडीयू और बीजेपी गठबंधन 40 में 39 सीटें प्राप्त की थी। इस बात से हैरान है कि जब गुजरात में मोरबी पुल टूटा तब बीजेपी ने कोई धरना प्रदर्शन या मुख्यमंत्री से इस्तीफा नहीं मांगा था। मोरबी कांड में 150 से ज्यादा लोगों की दर्दनाक मौत हुई थी वो उस समय जब विधानसभा चुनाव सिर पर थे। दिलचस्प बात यह है कि मोरबी में भी भाजपा उम्मीदवार चुनाव जीत कर विधायक बन गया। वहां के लोगों मोरबी जैसे कांड को इतनी जल्दी भुला दिया। इससे लोगों की संवेदनशीलता पर सवालिया निशान लगता है।

गुजरात को सिर्फ मोदी ही पसंद है

इस बात से यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि गुजरातवासियों को सिर्फ मंदिर मस्जिद, हिन्दू ​मुस्लिम और धार्मिक आस्था ही पसंद है। उन्हें न तो बच्चों की अच्छी शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य सेवा और जीवन का स्तर उठाने की कोई सरोकार है। यह भी कहा जा सकता है कि बीजेपी सिर्फ मोदी के नाम पर सारे चुनाव लड़ रही है। मोदी के न रहने पर बीजेपी पहली वाली हालत में पहुंच जायेगी। पीएम मोदी पार्षद के चुनाव हों या विधानसभा के या आम चुनाव बीजेपी सारे चुनाव में पीएम मोदी को ही अपना चेहरा बनाते हैं। लेकिन यह टोटका हर जगह सफल नहीं हुआ। साउथ इंडिया में भाजपा की दाल नहीं गली। वहां कर्नाटक को छोड़ हर जगह मोदी जी भाजपा को चुनावी गंगा पार नहीं करा पाये हैं। इसके अलावा प बंगाल, झारखंडख, छत्तीसगढ़, राजस्थान, पंजाब और हिमाचल चुनाव में भाजपा ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी लेकिन वो वहां मोदी मैजिक नहीं चला पाये। इससे यह कहा जा सकता है कि पूरे देश में केवल आधा दर्ज प्रदेशों मे ही अपनी बहुमत की सरकार बना पाये हैं। महाराष्ट्र में भी उन्होंने एकनाथ शिंदे के कंधे पर बंदूक चलायी और 50 साल से पुरानी पार्टी शिवसेना को तोड़ दिया। शिवसेना ने भी 25 साल बाद भाजपा का असली चाल चरित्र व चेहरा समझ लिया है। उद्धव ठाकरे समझ गये हैं कि वर्तमान बीजेपी अन्य प्रदेशों में मुख्य दल से गठबंधन कर वहां अपनी पैठ बनाती है बाद में उसी दल को तोड़ कर अपनी सत्ता कायम कर लेती है।

 

 

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