साल 2020 में कोरोना महामारी की वजह से दुनियाभर में आर्थिक मंदी छाई रही. वहीं, एजुकेशन सेक्टर पूरी तरह ठप पड़ा रहा. साल 2021 की शुरुआत में करीब 10 महीने बाद भारत के कई राज्यों में स्कूल खोले गए हैं. हालांकि, अभी भी इस सेक्टर पर कोरोना वायरस महामारी का असर देखने को मिल रहा है.

लॉकडाउन के दौरान देश के सभी शिक्षण संस्थानों को बंद कर दिया गया. ऐसे में इस सेक्टर के लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा है. साल 2021 के आम बजट से इस सेक्टर को खासी उम्मीदें हैं. पिछले साल वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एजुकेशन सेक्टर के लिए 99,300 करोड़ रुपये की घोषणा की थी. साथ ही कहा था कि 2021 तक 150 शिक्षण संस्थान खोले जाएंगे. वित्त मंत्री ने नेशनल पुलिस यूनिवर्सिटी और नेशनल फॉरेंसिक यूनिवर्सिटी खोलने की भी बात कही थी. हालांकि, कोरोना वायरस महामारी की वजह से टारगेट पूरा नहीं हो सका.

वित्त वर्ष 2019-20 के एजुकेशन बजट पर एक नज़र 

वित्त वर्ष 2019-20 की बात करें तो बजट पेश करने के दौरान 94,853.24 करोड़ रुपये खर्च करने की बात कही गई. इस दौरान उच्च शिक्षा के लिए 38,317.01 रुपये आवंटित किए थे, जबकि स्कूली शिक्षा के लिए 56,536.63 रुपये आवंटित किए गए. वित्त वर्ष 2019-20 में एजुकेशन सेक्टर में 13 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी. बता दें कि साल 2014-15 में शिक्षा बजट कुल जीडीपी का 0.55 प्रतिशत था लेकिन उसके बाद अगले कुछ वर्षों में यह नीचे की ओर फिसल गया.

लॉकडाउन के दौरान छात्रों को हुई भारी परेशानी

लॉकडाउन के दौरान शिक्षण संस्थान बंद रहने से छात्रों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा. सरकार द्वारा ऑनलाइन शिक्षा को बढ़ावा दिया गया. हालांकि, कई राज्यों में इंटरनेट की सुविधा और मोबाइल फोन ना होने के कारण छात्र पढ़ाई नहीं कर सके. ऑक्सफेम इंडिया के सर्वे के अनुसार, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा और उत्तर प्रदेश में सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों के साथ 80 प्रतिशत से अधिक माता-पिता ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान इंटरनेट कनेक्टिविटी और मोबाइल फोन की सुविधा ना होने के कारण पढ़ाई करने में असुविधा हुई.

हायर एजुकेशन में भी बदलाव की जरूरत

हायर एजुकेशन में भी इस समय बदलाव की जरूरत है.  इस क्षेत्र से जुड़े लोगों ने कहा, “इस सेक्टर में भी सभी सुविधाओं को हाईटेक बनाने की जरूरत है, इसके लिए सारकर को बड़ा निवेश करना पड़ेगा. साथ ही साथ शोध के क्षेत्र में भी अधिक ध्यान देना होगा. ज्यादा से ज्यादा विश्वविद्यालय का निर्माण कराना होगा और इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोड़ देना होगा. साथ ही साथ पढ़ाई के स्तर को और ऊपर उठाने की जरूरत है.

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