वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज संसद में अपना चौथा केंद्रीय बजट पेश करेंगी, जिसका दलाल स्ट्रीट का इंतजार कर रहा है। 5 राज्यों के विधानसभा चुनावों से पहले संभावित लोकलुभावन उपायों पर चिंता आंशिक रूप से निवेशकों को परेशान कर रही हैं। बजट के एक दिन बाद शेयर बाजार के अच्छे प्रदर्शन की संभावना भी कम रहती है। यह हम नहीं कह रहे बल्कि आंकड़े कह रहे हैं।

पिछले 10 बजट (2019 और 2014 के अंतरिम बजट को छोड़कर) निफ्टी 50 डी-डेज पर सात बार गिर चुका है। इसके अलावा, पिछले कुछ वर्षों में बजट के दिनों में अत्यधिक अस्थिरता देखी गई है। उदाहरण के लिए, निफ्टी 50 पिछले साल बजट डे पर 4.9 प्रतिशत मूव किया, यह अंततः 4.7 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ। 1 फरवरी, 2020 को 3.3 फीसदी के व्यापक दायरे में कारोबार करने के बाद इंडेक्स 2.5 फीसदी की गिरावट के साथ बंद हुआ। 

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2019 में 5 जुलाई को एनएसई बैरोमीटर 1.6 प्रतिशत की सीमा में चला गया और अंततः 1.1 प्रतिशत गिर गया। 2018 में सूचकांक 2.2 प्रतिशत की सीमा में केवल 0.10 प्रतिशत कम हुआ। 2017 में 2.2 फीसदी की गिरावट के बाद बाजार में 1.8 फीसदी की तेजी आई।

बजट के दिन ऐसी रही शेयर बाजार की चाल

बजट डे सेंसेक्स खुला उच्चतम न्यूनतम सेंसेक्स बंद बदलाव
01/02/2021 46,617.95 48,764.40 46,433.65 48,600.61 1,982.66
01/02/2020 40,753.18 40,905.78 39,631.24 39,735.53 -1,017.65
01/02/2019 36,311.74 36,778.14 36,221.32 36,469.43 157.69
01/02/2018 36,048.99 36,256.83 35,501.74 35,906.66 -142.33
01/02/2017 27,669.08 28,159.54 27,590.10 28,141.64 472.56
01/02/2016 24,982.22 25,002.32 24,788.58 24,824.83 -157.39

स्रोत: बीएसई

2013 और 2012 में बजट के दिनों में सूचकांक क्रमशः 1.8 प्रतिशत और 1.2 प्रतिशत गिर गया। 2014 में, जब मोदी सरकार ने अपना पहला बजट पेश किया तो सूचकांक में 0.2 प्रतिशत की गिरावट के बाद बंद होने से पहले 3.4 प्रतिशत की गति देखी गई। 2015 में भी बजट के दिन निफ्टी में 2 प्रतिशत से अधिक की गति देखी गई, लेकिन सूचकांक 0.6 प्रतिशत ही चढ़ पाया।

विलियम ओ’नील इंडिया ने एक नोट में कहा कि अब पिछले 12-18 महीनों में कई नए निवेशक इक्विटी बाजार में आए हैं, एसटीटी हटाने से निवेशकों को व्यापार शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है। वर्तमान में, गैर-डिलीवरी लेनदेन पर एसटीटी 0.025 प्रतिशत और डिलीवरी के लिए 0.1 प्रतिशत है। हालांकि निवेशक भी चाहते हैं कि एलटीसीजी को हटाया जाए, लेकिन सरकार ने संसद के शीतकालीन सत्र में कहा कि इक्विटी और म्यूचुअल फंड पर एलटीसीजी कर को खत्म करने की कोई योजना नहीं है। 

 



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