देश की तीनों सेनाओं के सीडीएस बिपिन रावत पौड़ी गढ़वाल स्थित अपने पुरखों की भूमि सैंणा गांव को सड़क से जोड़ने और गांव में मकान बनाने का सपना पूरा नहीं कर पाए। रावत ने अपने भाई से जनवरी में गांव आने का वायदा किया था जो पूरा नहीं हो पाया। सीडीएस बिपिन रावत का पैतृक गांव सैंणा, पौड़ी गढ़वाल के द्वारीखाल ब्लॉक में पड़ता है। जो कोटद्वार- कांडाखाल मार्ग पर बिरमौली ग्राम पंचायत का हिस्सा है। गांव में इस समय सीडीएस रावत के चाचा भरत सिंह रावत का एक मात्र परिवार रहता है।
बुधवार दोपहर जब यह मनहूस खबर आई तो रावत के चाचा भरत सिंह कोटद्वार जाने के लिए लोकल मैक्सी कैब में बैठे हुए थे। जबकि भरत सिंह के बेटे देवेंद्र रावत कोटद्वार में अपने पिता का इंतजार कर रहे थे। देवेंद्र ने हिन्दुस्तान को बताया कि ‘भैजी क दगड़ कुछ दिन पैली बात ह्वे छैई, उ जनवरी म घर आण वाल छयाई (भाई साहब के साथ कुछ दिन पहले ही बात हुई थी, वो जनवरी में घर आने वाले थे)। देवेंद्र ने बताया कि उनके गांव बिरमौली खाल से सैंणा गांव तक प्रस्तावित सड़क लंबे समय से अधर में लटकी हुई है।
भैजी ने कहा था कि गांव तक सड़क पहुंच जाए तो वो पैतृक भूमि पर घर बनाएंगे। लेकिन इससे पहले ही नियति ने उन्हें हमसे छीन लिया। सीडीएस रावत अप्रैल 2018 में अपनी पत्नी मधुलिका के साथ गांव आए थे। वर्तमान में गांव में देंवेंद्र के पिता भरत सिंह ओर मां सुशीला देवी ही रहती हैं। एमए बीएड कर चुके देवेंद्र परीक्षा संबंधित तैयारी के लिए कोटद्वार में रहते हैं। रावत का ननिहाल उत्तरकाशी जिले के डुंडा ब्लॉक के थाती गांव में है। उनके एक मामा 1960 में उत्तरकाशी के विधायक भी रह चुके हैं।
सीएम घोषणा में शामिल थी सड़क
सीडीएस रावत के गांव सड़क न पहुंच पाने के सवाल पर क्षेत्रीय विधायक ऋतु भूषण खंडूड़ी ने बताया कि उक्त सड़क सीएम घोषणा से मंजूर हो चुकी है। लेकिन जमीन संबंधित विवाद के कारण इस पर काम शुरू नहीं हो पाया है, जिसे दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।
पहाड़ की मेधा का चेहरा थे रावत
सीडीएस बिपिन रावत राष्ट्रीय स्तर पर उत्तराखंड की मजबूत पहचान के तौर पर जाने जाते थे। सैन्य बहुल प्रदेश से वो जनरल बीसी जोशी के बाद दूसरे थल सेना प्रमुख बने, बल्कि सीडीएस की कुर्सी तक पहुंचने में कामयाब रहे। रावत का लगातार उत्तराखंड आने से उनका जुड़ाव अपने प्रदेश से बना रहा।
दून में पढ़ाई और पासआउट
सीडीएस रावत ने देहरादून कैंब्रियन हॉल स्कूल से 1972 में दसवीं कक्षा पास की थी। उनके पिता लेफ्टिनेंट जनरल (रिटा.) एलएस रावत तब देहरादून में तैनात थे। जनरल रावत 16 दिसंबर 1978 में भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) देहरादून से पास आउट हुए। उस बैच का उन्हें सर्वोच्य सम्मान स्वार्ड ऑफ ऑनर मिला था।
पिछले सप्ताह आए थे श्रीनगर
एक दिसंबर को सीडीएस बिपिन रावत गढ़वाल विश्वविद्यालय के नौवें दीक्षांत समारोह में श्रीनगर पहुंचे थे। जिन्होंने यहां के छात्रों को गोल्डन मेडल और डिग्रियां प्रदान की थी। साथ ही युवाओं को आह्वान किया था नौकरी ढूंढने के बजाय नौकरी देने वाला काम करें।







