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क्या सिंधिया राज घराने का राजनीतिक वजूद खत्म हुआ
आज के राजनीतिक जगत में ये देखा जा रहा है कि पूरे देश में सत्ताधारी दल का वर्चस्व बढ़ता जा रहा है। लेकिन ये भी साफ दिख रहा है कि कुछ राजनीतिक हस्तियों की हालत काफी खस्ता है। उन राजनेताओं में सिंधिया राज घराने से जुड़े लोगों की हैसियत गिरती जा रही है। जिनमें वसुंधरा राजे सिंधिया, यशोधरा राजे सिंधिया और ज्योतिरादित्य सिंधिया इस समय अपने वजूद के लिये संघर्श कर रहे है। वसुंधरा राजे राजस्थान की दो बार मुख्यमंत्री रह चुकी हैं। लेकिन उनके रिश्ते केन्द्रीय नेतृत्व से अच्छे नहीं हैं इसलिये इस बार के विधानसभा चुनाव में उन्हें अभी तक टिकट तक नहीं दिया गया है। इतना ही नहीं उनके करीबी नेताओं को भी टिकट नहीं दिया जा रहा है। उनकी सीधा टकराव पीएम मोदी और शाह से है यह बात जग जाहिर है कि भाजपा पर पूरी तरह से गुजरात लॉबी काबिज हो गयी है। उनकी मर्जी के बगैर पार्टी में रहना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है।
शिवराज सरकार में मंत्री हैं यशोधरा राजे
वसुंधरा राजे की बहन मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री हैं। लेकिन इस बार उन्होेने चुनाव लड़ने से मना कर दिया है। इसके पीछे उन्होंने अपनी उम्र होने का कारण बताया है। उन्हें भी उम्मीद नहीं होगी कि इस बार उन्हें टिकट मिलेगा या नहीं इसलिये पहले से ही चुनाव न लड़ने की बात कह कर पल्ला झाड़ लिया है। वैसे भी इस बार टिकट वितरण में सीएम या स्थानीय नेता की बात नहीं सुनी गयी है।

टिकट वितरण मोदी शाह और नड्डा ने मिलकर किया है। चुनाव की पूरी जिम्मेदारी गुजरात लॉबी के हाथ में है। ये माना जाये कि स्थानीय नेताओं पूरी से नकार दिया गया है। इससे सीएम शिवराज चौहान भी अंदर ही अंदर नाखुश है। उन्हें भी तीसरी लिस्ट में टिकट दिया गया है। वो भी तब जब उन्होंने बागी होने के संकेत दे दिया। वैसे भी मध्यप्रदेश में भाजपा की हालत काफी खस्ता है। यहां चुनाव में मोदी शाह ने तीन मंित्रयों समेत सात सांसदों को मैदान में उतार यह साबित कर दिया है कि उन्हें लोकल लीडरों पर कतई विश्वास नहीं है। इससे स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं का मनोबल टूट गया है। बस गोदी मीडिया के सहारे मध्यप्रदेश और राजस्थान जीतने का ख्वाब देखा जा रहा है।
माधवराव सिंधिया को मिला कांग्रेस का साथ
जीवाजी राव सिंधिया के बेटे माधवराव सिंधिया ने पाइलेट का प्रशिक्षण लाइसेंस लिया था। इंदिरा गांधी के बडे़ बेटे राजीव गांधी ने भी उसी संस्थान से प्रशिक्षण लिया था। इस वजह से उनमे खासी बनती थी। इंदिरा जी की हत्या के बाद राजीव गांधी जी को जब सत्ता संभालनी पड़ती तो राजीव गांधी ने माधवराव सिंधिया को पार्टी से सांसदी का चुनाव लड़वाया और वो कांग्रेस के टिकट पर सांसद भी बन गये साथ उन्हें मंत्रिमंडल में मंत्री भी बनाया गया। दिलचस्प बात यह थी कि उनकी मां विजय राजे सिंधिया आरएसएस की वरिष्ठ नेता थीं। माधवराव सिंधिया के बारे में चर्चा थी कि वो राज घराने के तो थे लेकिन बहुत ज्यादा उनमें शाही हनक और ऐंठन नहीं रहती थी। सामान्य लोग उनसे बात करने में हिचकिचाते नहीं थे। जैसा कि राजघराने के लोगों में अक्सर अलग सी अकड़ और रुआब आज भी रहता है।
ज्योतिरादित्य ने कुल्हाड़ी पर पांव मारा
माधवराव सिंधिया के बेटे ज्योतिरादित्य का राजनीति में आना एक हादसे के बाद हुआ। सिंतंबर में माधवराव सिंधिया का निधन एक हवाई जहाज क्रैश करने करने के कारण हुआ था। उस वक्त माधवराव केन्द्र में कैबिनेट मंत्री थे। ऐसे मौके में उनके बेटे ज्योतिरादित्य को राजनीति में आने का सुनहरा अवसर मिल गया। या यू कहें कि चांदी की यम्मच उनके हाथ जा लगी। कांग्रेस के टिकट पर ज्योतिरादित्य सांसद बने इतना ही नहीं उन्हें मनमोहन सरकार में मंत्री भी बनाया गया। बाद में मध्यप्रदेश का प्रभारी भी बनाया गया। वो राहुल सोनिया और प्रियंका के काफी करीबी बताये जाते थे। लेकिन 2019 के आम चुनाव में वो अपने गढ़ से सांसदी का चुनाव हार गये। इसके बाद से उनका मन कांग्र्रेस में नहीं लगा। 2018 में मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में जब कांग्रेस की सरकार बनी तो उन्हें उम्मीद थी कि उन्हें सीएम बनाया जायेगा। लेकिन कांग्रेस ने कमलनाथ को सीएम बनाया तब से ज्योतिरादित्य पार्टी में घुटने लगे। 2020 में उन्हांेने पार्टी से बगावत कर अपने 24 विधायक समर्थकों के साथ कमलनाथ सरकार को गिरवा दिया। केन्द्रीय नेतृत्व को सिंधिया से ऐसी उम्मीद नहीं थी। उन्होंने सिंधिया को समझाने का काफी प्रयास लेकिन उन्होंने भाजपा में शामिल हो कर भाजपा को समर्थन दे कर एक बार फिर मध्यप्रदेश में शिवराज चौहान की सरकार कायम करवा दी। इसके बदले में उन्हें भाजपा ने राज्यसभा का सांसद बना दिया। बाद में उन्हें सिविल एवियेशन का कबीना मंत्री भी बना दिया। लेकिन अब लगता है कि भाजपा में अब उनकी फजीहत होना शुरू हो गयी है। मध्यप्रदेश भाजपा में सिंधिया और उनके समर्थकों के खिलाफ गोलबंदी हो गयी है। पुराने भ्ज्ञाजपा नेता और कार्यकर्ता इस बात से नाराज हैं कि वो इतने समय से पार्टी मे काम कर रहे हैं लेकिन फायदा बाहरी लोग आ कर उठा रहे हैं। इस प्रकार भाजपा तीन खेमों में बंट गयी है एक महाराज भाजपा दूसरी शिवराज भाजपा और तीसरी नाराज भाजपा। इस चक्कर से चुनाव में भाजपा की हालत बहुत खराब है। वहीं केन्द्र ने सात सांसदों समेत तीन केन्द्रीय मंत्रियों को विधानसभा चुनाव में उतार कर कोढ़ में खाज होने का काम कर दिया है। ये भी सुनने में आ रहा है कि मोदी शाह ज्योतिरादित्य को भी चुनावी मैदान में उतार सकते हैं। इस बात से महाराज काफी नाखुश हैं लेकिन अब वो हालात नहीं हैं कि मोदी शाह उनके नखरे सहे। ऐसे में ज्योतिरादित्य की हालत सांप छछूंदर जैसी हो गयी है। ये भी सुना जा रहा है कि महाराज का मन भाजपा से भर गया है और वो घर वापसी का मन बना रहे हैं बस मौके और ग्रीन सिग्नल का इंतजार कर रहे हैं।








