Edited By Abhishek Kumar | नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated:
जयपुर
राजस्थान में जारी सियासी संग्राम के बीच दो दिन पहले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के भाई अग्रेसन गहलोत के घर पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी हुई थी। इस छापेमारी को लेकर कांग्रेस ने आरोप लगाया कि यह पूरी तरह से राजनीतिक है। केंद्र सरकार जानबूझकर केंद्रीय जांच एजेंसियों की मदद से कांग्रेस सरकार से जुड़े लोगों को परेशान कर रही है। ऐसे में सवाल ये भी है कि आखिर ईडी ने किस केस में सीएम गहलोत के भाई के घर पर छापेमारी की है।
सीएम के भाई से जुड़े हैं फर्टिलाइजर स्कैम के तार
ईडी की अग्रसेन गहलोत के घर और प्रतिष्ठानों पर यह कार्रवाई कई राज्यों में फर्टिलाइजर स्कैम मामले में हो रही छापेमारी का हिस्सा है। राजस्थान के साथ ही ईडी मुम्बई, गुजरात और पश्चिम बंगाल में भी फर्टिलाइजर स्कैम को लेकर एक साथ कार्रवाई हुई है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बड़े भाई अग्रसेन गहलोत का फर्टिलाइजर का कारोबार है और जोधपुर में इससे जुड़ी दुकानें और अन्य प्रतिष्ठान हैं। प्रवर्तन निदेशालय की इस छापे में उनकी दुकानों और घर समेत अन्य ठिकानों पर भी कार्रवाई हुई है।
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मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के भाई अग्रसेन का फर्टिलाइजर से जुड़ा काम है। बताया जा रहा है कि साल 1980 से पहले की उनकी दुकान है। ‘अनुपम कृषि’ नाम से इसी प्रतिष्ठान से वो फर्टिलाइजर से जुड़ा काम करते हैं।
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का चुनावी कार्यालय शुरू से यह दुकान ही रहा है। इस दो मंजिला दुकान के ऊपर एक ऑफिस बनाया हुआ है। यहीं से चुनाव के कार्य संपन्न होते रहे हैं। इसी दुकान के बाहर टेंट लगाया जाता है और चुनावी कार्यालय बनाया जाता है। इसके अलावा अशोक गहलोत जब नामांकन पत्र भरने जाते तो इसी दुकान के आगे एक जनसभा को संबोधित करते आए हैं।
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अग्रसेन गहलोत पर 7 करोड़ रुपए का जुर्माना
अग्रसेन गहलोत कथित उर्वरक मामले में सात करोड़ रुपए के सीमा शुल्क जुर्माने का सामना कर रहे हैं। ईडी ने सीमा शुल्क विभाग की शिकायत के आधार पर धन शोधन निरोधक अधिनियम (पीएमएलए)के तहत आपराधिक मामला दर्ज किया है और कथित उर्वरक घोटाला मामले में आरोपपत्र दाखिल किया है। अधिकारियों ने बताया कि राजस्थान में छह, गुजरात में चार, पश्चिम बंगाल में दो और दिल्ली में एक स्थान पर एजेंसी ने छापों की कार्रवाई की है।
अशोक गहलोत के भाई अग्रसेन गहलोत पर आरोप है कि उनकी अनुपम कृषि नामक कंपनी ने 2007 से 2009 में क्लोराइड पोटाश को बिना सरकार की मंजूरी के विदेशों में भेज दिया था। अनुपम कृषि को क्लोराइड पोटाश को बेचने का लाइसेंस मिला हुआ था और वह किसानों को अच्छी फसल के लिए बेचने के लिए अधिकृत थे। यह भी आरोप है कि अग्रसेन गहलोत ने पोटाश को दूसरे लोगों को बेचा जिन्होनें इसे मलेशिया और सिंगापुर में अवैध तरीके से औद्योगिक नमक (Industrial Salt) के नाम पर एक्सपोर्ट कर दिया जबकि भारतीय पोटाश के भारत से बाहर भेजे जाने पर पांबदी थी।







