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आज के राजनीतिक परिवेश में कांग्रेस के हालात काफी खस्ता हैं। कांग्रेस शासित प्रदेशों में बगावत के सुर सुनाई दे रहे है। पंजाब में सिद्धू और कैप्टन के बीच विवाद अभी तक सुलटा नहीं है। दोनों के बीच में वजूद की लड़ाई चल रही है। कैप्टन किसी भी सूरत में सिद्धू को फूटी आंख नहीं देखते हैं तो सिद्धू कैप्टन की सरकार पर ही हमला करने से नहीं चूक रहे हैं। पंजाब में बिजली आपूर्ति की बदहाली को लेकर सिद्धू ने अपनी ही पार्टी की सरकार पर हमला किया है। दूसरी ओर कांग्रेस आला कमान हर सूरत में सिद्धू और कैप्टन के बीच सुलह चाहता है ताकि पंजाब विधानसभा चुनाव में दोबारा सत्ता पायी जा सकी है। कांग्रेस के सामने पंजाब का चुनाव बड़ी समस्या बन कर उबरा है। लेकिन कांग्रेस को पूरी उम्मीद है कि वो कैप्टन व सिद्धू के बीच सुलह कराने सफल रहेगी और पंजाब में दोबारा सत्ता में आ जायेगी। वहीं महाराष्ट्र में भी नाराजगी के सुर सुनायी दे रहे हैं। पूर्व केन्द्री गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने भी अपनी नाराजगी केन्द्रीय नेतृत्व से जतायी है।
कांग्रेस के लिये केवल पंजाब ही नहीं राजस्थान, हरियाणा और महाराष्ट्र में भी बगावत के सुर उठने लगे है। राजस्थान में सीएम अशोक गहलौत और पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पाइलेट के बीच भी मनमुटाव चल रहा है। पिछले साल भी सचिन पाइलेट अपने समर्थक विधायकों के साथ जयपुर से दूर हरियाणा और दिल्ली के होटल्स में चले गये थे। काफी मना मनौवल के बाद और कांग्रेस आला कमान के आश्वासन पर सचिन मान गये और कांग्रेस सरकार को गिरने से बचाया। इसके साथ ही बीजेपी को भी टका लगा। कांग्रेस की अंदरूनी कलह का फायदा उठा कर अपनी सत्ता वापस पाने का ख्वाब बीजेपी के लिये अधूरा ही रह गया। लेकिन लगभग एक साल के बाद भी सचिन पाइलेट से किये गये वादे अभी तक नहीं निभाये गये हैं। इस बात से सचिन काफी आहत हैं और उन्होंने एक बार फिर आला कमान को यह याद दिलाया कि पार्टी ने उनसे किये वादे और आश्वासन अभी तक अधूरे हैं।
अभी तक पंजाब और राजस्थान का मामला सुलझा नहीं कि हरियाणा में कांगेस प्रदेश अध्यक्ष के खिलाफ बगावती सुर सुनायी देने लगे है। वहां प्रदेश अध्यक्ष कुमारी शैलजा के पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा समर्थकों ने विरोध जताना शुरू कर दिया है। उनकी मांग है कि आला कमान कुमारी शैलजा को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाये। इसके लिये हुड्डा समर्थकों ने दिल्ली आकर आला कमान से अपनी नाराजगी जतायी है।

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