देश में कोरोना वायरस के नए मामलों में पहले के मुकाबले कमी तो आ रही है, लेकिन अभी भी हजारों की संख्या में नए केस सामने आ रहे हैं। इसके चलते करोड़ों जनता को कोरोना की वैक्सीन का इंतजार है। कोरोना वैक्सीन बनाने वाली कंपनियों के अधिकारी के बाद सरकार भी टीके पर गुड न्यूज दे चुकी है। सरकार कई बार कह चुकी है कि सिर्फ कुछ महीनों बाद कोरोना वैक्सीन देश के लोगों के लिए उपलब्ध हो जाएगी। वैक्सीन को लेकर सामने आ रहे इन बयानों के बीच लोगों के मन में सवाल है कि आखिर कितने समय में देश की पूरी जनता को वैक्सीन लग जाएगी। इस सवाल का जवाब केंद्र सरकार ने दिया है। स्वास्थ्य सचिव ने कहा है कि सरकार ने कभी भी सभी लोगों को वैक्सीन लगाने की बात कही ही नहीं है।
कोरोना वायरस को लेकर होने वाली स्वास्थ्य मंत्रालय की डेली ब्रीफिंग के दौरान सचिव राजेश भूषण से पूछा गया कि पूरे देश को वैक्सीन लगाने में कुल कितना समय लगेगा तो उन्होंने बताया, ”मैं एक बात साफ कर देना चाहता हूं कि सरकार ने कभी भी पूरे देश को वैक्सीन लगाने की बात नहीं की। यह महत्वपूर्ण है कि हम लोग वैज्ञानिक मुद्दों पर चर्चा करें जोकि तथ्यात्मक जानकारी के आधार पर हों।”
वहीं, आईसीएमआर के डीजी डॉ. बलराम भार्गव ने बताया कि सरकार का उद्देश्य कोरोना के ट्रांसमिशन को तोड़ना है। भार्गव ने कहा, ”टीकाकरण वैक्सीन के प्रभाव पर निर्भर करेगा और हमारा उद्देश्य कोविड 19 के ट्रांसमिशन को तोड़ना है। अगर हम कुछ लोगों को वैक्सीन लगाने में सफल हो गए और ट्रांसमिशन को तोड़ सके तो हमें देश की पूरी जनता को वैक्सीन लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।”
I just want to make this clear that the govt has never spoken about vaccinating the entire country. It’s important that we discuss such scientific issues, based on factual information only: Health Secretary on being asked how much time it will take to vaccinate the entire country pic.twitter.com/cZeEQr8Pvw
— ANI (@ANI) December 1, 2020
ऑक्सफोर्ड वैक्सीन पर क्या बोली सरकार?
सीरम इंस्टीट्यूट द्वारा बनाई जा रही ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन के विपरीत प्रभाव के हालिया आरोपों पर सरकार ने कहा कि इससे टीके की समयसीमा पर कोई असर नहीं पड़ेगा। सरकार ने कहा कि शुरुआती निष्कर्षों के आधार पर ऑक्सफोर्ड कोविड-19 टीके के परीक्षण को रोकने की आवश्यकता नहीं थी। बता दें कि सीरम इंस्टीट्यूट ने भी वॉलेंटियर के इन आरोपों को मंगलवार को खारिज कर दिया था। कंपनी ने इस टीके को पूरी तरह सुरक्षित और रोग प्रतिरोधक बताया है। कंपनी ने एक ब्लॉग में लिखा, ”हम हर किसी को इस बात का आश्वासन देना चाहते हैं कि टीके को तब तक आम लोगों के इस्तेमाल के लिए जारी नहीं किया जाएगा जब तक इसके रोग प्रतिरोधक क्षमता पूरी तरह से स्थापित नहीं हो जाती।”
रोजाना हो रहीं साढ़े दस लाख कोरोना जांचें
स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि देश में रोजाना साढ़े दस लाख कोरोना की जांच की जा रही है। मंत्रालय ने कहा, ”औसतन 10,55,386 कोविड-19 जांच रोज की गई हैं और नवंबर में औसतन 43,152 मामले रोज सामने आए हैं। देश में अब तक 14.13 करोड़ कोविड-19 जांचें की गई हैं। संक्रमित होने की दर 11 नवंबर को 7.15 प्रतिशत थी जो एक दिसंबर को 6.69 फीसदी रह गई। वहीं, भारत में बीते सात दिन में प्रति 10 लाख की आबादी पर कोरोना वायरस के 211 मामले और दो मौतें दर्ज की गई है।







