अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों की एक रिसर्च में कहा गया है कि Covid-19 की शुरुआत से पहले चीन के वुहान शहर में हजारों जिंदा जानवरों को बेचा गया था। इस रिसर्च में कहा गया है कि साल 2017-2019 के बीच चीन के वुहान शहर में 47,000 से ज्यादा जिंदा जीवों को बाजार में बेचा गया। वैज्ञानिकों की रिपोर्ट बताती है इन 47,381 जानवरों को वुहान के 17 अलग-अलग बाजारों में बेचा गया है। इनमें जानवरों की कुल 38 प्रजातियां शामिल थीं। इनमें से 31 सुरक्षित जानवरों की प्रजातियां भी थीं। 

इन जानवरों को पिंजड़े में रखा गया था और इनका खानपान तथा इनकी देखभाल बेहद खराब थी जिससे की उनके स्वास्थ्य पर भी खतरा था। चीन की सरकार ने कहा था कि वुहान शहर में दिसंबर के शुरुआत में Covid-19 के केस सामने आए थे। उस वक्त इस इनफेक्शन को एक प्रकार का निमोनिया कहा गया था। इससे पहले जब इंसानों में कोविड-19 के केस मिले थे तब इसे वुहान के हुनान शी-फूड मार्केट से जोड़ा गया था। यह बात भी सामने आई थी कि SARS-CoV-2 जानवरों से इंसान में जूनोटिक (प्राणीजन्य) प्रक्रिया के तहत आए थे। लेकिन दूसरे अन्य बाजारों में भी ऐसे केस देखे गए थे। 

वैज्ञानिकों के नए रिसर्च पेपर को चीन, ब्रिटेन और कनाडा के खोजकर्ताओं ने लिखा है। यह रिसर्च open access scientific reports journal में 7 जून को प्रकाशित की गई है। रिपोर्ट कहती है कि इस बात के कोई सबूत नहीं मिले हैं कि वुहान में जिंदा चमगादड़ या पैंगोलिन बेचे गये हैं। लेकिन रकून कुत्ता, गिलहरी और लोमड़ी जैसे कुछ जानवर बाजार में उपलब्ध थे। रिपोर्ट में लिखा गया है कि पैंगोलिन्स कोरोना वायरस के स्त्रोत नहीं थे। 

विशेषज्ञों का मानना है कि जो जानवर वुहान में बेचे गए उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं था। ऐसे में यह जानवर कई तरह के जूनेटिक रोगों को फैलाने में सक्षम हो सकते थे। बहरहाल आपको बता दें कि कोरोना वायरस का प्रभाव बढ़ने के बाद चीन की सरकार ने 26 जनवरी, 2020 को सभी जानवरों के व्यापार पर तात्कालिक रोक लगा दी थी। इसके तीन दिन बाद ही वुहान सिटी में लॉकडाउन लगा दिया गया था। 
 
 



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