कोरोना (COVID-19) मरीजों के इलाज के लिए आईसीयू बेड्स की कमी से जूझ रही दिल्ली सरकार ने गुरुवार को राजधानी के 42 निजी अस्पतालों को निर्देश दिया है कि वे अपने कुल ICU / HDU बेड्स की 80% क्षमता को तत्काल प्रभाव से कोविड रोगियों के इलाज के लिए आरक्षित करें। इसके साथ ही सरकार ने 90 निजी अस्पतालों को COVID-19 रोगियों के इलाज के लिए उनकी कुल बेड क्षमता का 60% आरक्षित करने का भी आदेश दिया है। इससे कोरोना के इलाज के लिए निजी अस्पतालों में 2,644 बेड बढ़ जाएंगे।

जानकारी के अनुसार, दिल्ली में कोविड-19 की स्थिति पर चर्चा के लिए आज बुलाई गई एक सर्वदलीय बैठक के बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली सरकार 19 नवंबर से निजी अस्पतालों में 80 प्रतिशत आईसीयू बिस्तर कोविड-19 रोगियों के लिए आरक्षित करने के अपने फैसले को लागू कर रही है। उन्होंने कहा कि निजी अस्पतालों को गैर-आईसीयू कोविड​​-19 बिस्तर 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत करने का भी निर्देश दिया गया है।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि 1,400 से अधिक आईसीयू बेड्स की व्यवस्था की जा रही है जिसमें से दिल्ली सरकार के अस्पतालों में 663 और केंद्र सरकार की इकाइयों में 750 आईसीयू बेड्स शामिल हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में दिल्ली में कोविड-19 रोगियों के लिए लगभग 7,500 सामान्य और 446 आईसीयू बेड्स उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि अस्पतालों को इस समय के लिए गैर-महत्वपूर्ण नियोजित सर्जरी को स्थगित करने के लिए कहा गया है।

दिल्ली में करीब 60 अस्पतालों में वेंटिलेटर वाले आईसीयू बेड उपलब्ध नहीं

राजधानी दिल्ली में कोविड-19 के तेजी से बढ़ते मामलों के बीच वेंटिलेटर वाले आईसीयू बेड (बिस्तर) की कमी बढ़ती जा रही है। आधिकारिक आकंड़ों के अनुसार दिल्ली में करीब 60 अस्पतालों में वेंटिलेटर वाले आईसीयू बेड नहीं हैं।

संक्रमण के मामलों में वृद्धि ऐसे समय में हुई है, जब सर्दियां करीब आ रही हैं और शहर में गंभीर रूप से बिगड़ती वायु गुणवत्ता ने सांस संबंधी बीमारियों से जूझ रहे लोगों की परेशानियां और बढ़ा दी हैं। दिल्ली सरकार के ऑनलाइन ‘कोरोना डैशबोर्ड के अनुसार शहर में बुधवार देर रात साढ़े 12 बजे विभिन्न स्वास्थ्य केन्द्रों में 1,362 में से 131 कोविड-19 आईसीयू बेड ही उपलब्ध थे।

आंकड़ों के अनुसार, राजीव गांधी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल (आरजीएसएसएच), साकेत, पटपड़गंज तथा शालीमार बाग में ‘मैक्स अस्पताल, बत्रा अस्पताल, शालीमार बाग तथा वसंत कुंज में फोर्टिस अस्पताल, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हार्ट इंस्टीट्यूट और द्वारका में वेंकटेश्वर अस्पताल में एक भी बेड उपलब्ध नहीं था।

बुधवार देर रात साढ़े 12 बजे तक के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली सरकार के अधीन कोविड-19 को समर्पित आरजीएसएसएच में वेंटिलेटर वाले 200 आईसीयू बेड हैं और इनमें से एक भी खाली नहीं था। वहीं एलएनजेपी अस्पताल के 200 में केवल सात बेड खाली थे।

आंकड़ों के अनुसार, एम्स ट्रॉमा सेंटर के 71 में से केवल सात आईसीयू बेड खाली थे। वहीं सफदरजंग के भी 65 में से सात बेड ही खाली थे। सर गंगा राम अस्पताल में 45 में से आठ, आरएमएल अस्पताल में 28 में से केवल दो आईसीयू बेड खाली थे।

आंकड़ों के अनुसार दिल्ली सरकार के अन्य स्वास्थ्य केन्द्रों जैसे, बीएसए अस्पताल में, 12 में से नौ बेड खाली थे और एसजीएमएच अस्पताल में, छह में से चार और डीडीयू अस्पताल में एक भी बेड खाली नहीं था। दिल्ली के कोविड-19 के अलावा अन्य मरीजों को समर्पित आईसीयू बेड में भी धीरे-धीरे कम होती जा रही है। 

दिल्ली में 28 अक्टूबर के बाद से कोरोना वायरस के मामलों में काफी बढ़ोतरी दर्ज की गई, जब पांच हजार से अधिक नए मामले सामने आए थे। 11 नवंबर को यहां आठ हजार से अधिक नए मामले सामने आए थे। वहीं, दिल्ली में बुधवार को 7,486 नए मामले सामने आने आए थे और 131 और लोगों की इससे मौत हुई। 

(न्यूज एजेंसी भाषा के इनपुट के साथ)





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