चीन पाकिस्तान इकॉनोमिक कॉरिडोर (CPEC) के तहत कई प्रोजेक्ट्स कई कारणों से देरी का सामना कर रहे हैं। कोरोना महामारी के कारण पॉवर सेक्टर के साथ कई बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में भी देरी हो रही है। प्रोजेक्ट्स को जल्द पूरा करने के लिए खालिद मंसूर CPEC के नए प्रमुख बनाए गए हैं। 

पाक-चीन संबंध संचालन समिति ने CPEC के तहत स्थापित की जा रही करीब 3,600 मेगावाट की पांच बिजली परियोजनाओं के संचालन तिथियों में विस्तार के लिए एक महीने के भीतर अंतिम रूप देने का निर्देश दिया है। योजना मंत्री असद उमर की अध्यक्षता में हुई बैठक में पावर डिवीजन को 1 सितंबर से मटियारी से लाहौर तक 660 केवी ट्रांसमिशन लाइन के संचालन के लिए पर्याप्त बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया गया है।

पाकिस्तान के लोग चीनी निवेश पर उठा रहे सवाल

जिन परियोजनाओं में और वक्त लगने की ज़रूरत है, उनकी कुल उत्पादन क्षमता 3,584MW है। इसमें थार कोल ब्लॉक- II और थालनोवा कोल की 330MW, थार कोल ब्लॉक-II की 1320MW, 884MW सुक्की-किनारी हाइड्रोपावर और 720MW कैरोट हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट शामिल हैं। इस सबके साथ ही ग्वादर पोर्ट के विकास में भी देरी की रिपोर्ट है।

पाकिस्तान सरकार जिस तरह से CPEC को सभी दिक्कतों का इलाज़ बताकर प्रचार कर रही थी, ऐसा होता नहीं दिख रहा है। कई प्रोजेक्ट्स कर्ज विवादों को लेकर भी अटके हैं। इसके साथ ही पाकिस्तान की एक बड़ी आबादी चीनी निवेश को लेकर सवाल उठाती रही है। 

पाकिस्तान ने CPEC प्रमुख को बदला

पाकिस्तान ने 60 अरब डॉलर की लागत वाली CPEC परियोजनाओं को जल्द पूरा करने की कोशिश के तहत मंगलवार को लेफ्टिनेंट आसिम बाजवा को हटाकर उनकी जगह खालिद मंसूर को नियुक्त किया है। पाकिस्तान प्रधानंमत्री कार्यालय ने यह जानकारी दी है।  

भारत CPEC को लेकर चीन के सामने विरोध दर्ज कराता रहा है क्योंकि यह पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से होकर गुजरता है।
 



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