देश में सर्विस सेक्टर की गतिविधियों में लगातार पांचवें महीने गिरावट दर्ज की गई है. जुलाई में सर्विस सेक्टर का पीएमआई गिर कर 34.2 के नीचे पहुंच गया है. 50 से ऊपर का पीएमआई बिजनेस गतिविधियों में विस्तार को दिखाता है. वहीं 50 से नीचे का पीएमआई इसमें गिरावट का दिखाता है. 34.2 का स्कोर का मतलब यह है कि सर्विस सेक्टर की बिजनेस गतिविधियों को भारी झटका लगा है. देश की जीडीपी में सर्विस सेक्टर की हिस्सेदारी लगभग 54 फीसदी है.

पिछले 15 साल का सबसे खराब आंकड़ा 

कोरोनावायरस संक्रमण को काबू करने के लिए देश भर में लगे लॉकडाउन की वजह से बिजनेस गतिविधियां सिमट गई हैं. इस वजह से सर्विस सेक्टर का परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स यानी पीएमआई काफी घट गया है. 34.2 स्कोर पिछले 15 साल का सबसे खराब आंकड़ा है. जुलाई में  आईएचएस मार्किट सर्विस बिजनेस एक्टिविटी 34.2 रहा जबकि जून में यह 33.7 था. यह लगातार पांचवां महीना है, जब सर्विस सेक्टर की स्थिति इतनी खराब रही है.

साल के अंत तक हालात सुधरने की उम्मीद नहीं 

सर्विस सेक्टर की कंपनियों में इस साल के आखिर तक बिजनेस गतिवधियों में कोई सकारात्मक बढ़ोतरी की कोई गुंजाइश नहीं दिख रहा है. सर्विस सेक्टर के साथ देश का मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर की भी काफी खराब प्रदर्शन कर रहा है. जुलाई में मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर की स्थिति खराब रही है. सरकार मैन्यूफैक्चरिंग गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए नए निवेश जुटाने के साथ ही ब्लू-प्रिंट तैयार कर रही है.

सरकार और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों की एक टीम ने मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर की गतिविधियों को  बढ़ाने के लिए 12 सेक्टरों की पहचान की है. सरकार का इरादा निर्यात बढ़ाना, रोजगार में इजाफा और आयात में कटौती  करना है. सरकार घरेलू मांग बढ़ाने के उपायों पर भी काम कर रही है. दरअसल रोजगार में कमी से पहले ही मांग की कमी झेल रही अर्थव्यवस्था की हालत और खराब हो गई है. सरकार ने अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए 20 लाख करोड़ रुपये का पैकेज दिया है लेकिन इसके नतीजे अभी तक नहीं दिखे हैं.

 



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