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आम चुनाव के ठीक पहले दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल को ईडी ने उनके सरकारी आवास से गिरफ्तार कर लिया है। केजरीवाल से पूछताछ करने के लिये एक दर्जन से ईडी अधिकारी उनके आवास पर पहुंचे। बताया ये जा रहा है कि उन्हें दिल्ली शराब नीति घोटाले में लिप्त होने के कारण गिरफ्तार किया गया है। सुरक्षा बलोंं ने पहले से ही केजरीवाल के घर के आसपास भारी सुरक्षा बल तैनात कर दिया था। हालात देख कर दिल्ली सरकार के मंत्री आम आदमी पार्टी के विधायक जमा हो चुके थे। सुरक्षा बलों ने आवास के पास जमा मंत्रियों और विधायकों को हिरासत में लेते हुए बसों में भरकर अज्ञात जगह पर भेज दिया।

चर्चा तो इस बात की भी हो रही है कि इस वक्त इसलिये किया गया ताकि चुनावी चंदे को ठंडा किया जा सके जनता का चुनावी चंदे से ध्यान भटकाने के लिये केजरीवाल को गिरफ्तार किया गया है। वैसे लोगों में यह भी चर्चा है कि मोदी सरकार ने गिरफ्तार कर अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारी है। आगामी आम चुनाव में भाजपा को भारी झटका लग सकता है। मोदी शाह को लगा था कि 2014 और 2019 की तरह भी जनता उन्हें भरपूर समर्थन व वोट देगी लेकिन दस साल बीतने के बाद भी मोदी सरकार देश की बदहाली के लिये कांग्रेस को जिम्मदार बता रही है। देश में बेरोजगारी, महंगाई, चौपट अर्थव्यवस्था और बदहाल उद्योग धंधों की ओर सरकार का कोई रुख साफ नहीं है। वर्तमान की समस्याओं को नजरअंदाज कर वो 23 साल आगे की बात कर जनता को बरगलाने की कोशिश में है।
चुनावी हार के वजह से विपक्ष को निशाने पर रखा
चर्चा यह चल रही है कि मोदी सरकार ने ये ऐक्शन आम चुनाव के मद्देनजर लिया गया है। इससे पहले इंडिया गठबंधन के सहयोगी जेएमएम चीफ हेमंत सोरेन को ईडी ने राजभवन से गिरफ्तार किया था। जेएमएम और आम आदमी पार्टी इंडिया गठबंधन के प्रमुख घटक हैं। इन लोगों को मोदी सरकार की ओर इशारों में इंडिया गठबंधन से दूर रहने का संदेश दिया गया था। लेकिन बात न बनने पर ईडी और सीबीआई के इनकम टैक्स को सक्रिय कर दिया गया है। चर्चा यह भी है कि मोदी सरकार को आगामी चुनाव में हार का खतरा मंडराता दिखायी दे रहा है। उसकी वजह इंडिया गठबंधन की एकजुटता है। इसीलिये आम आदमी पार्टी और कांग्रेस पर अनेक तरीकों से शिकंजा कसा जा रहा है।
कांग्रेस के बैंक खातों को सीज क्यों किया!
कांग्रेस पार्टी के बैंक खातो को आयकर विभाग के आदेश पर सीज कर दिया गया है। ये कार्रवाई ऐसे वक्त में की गयी जबकि लोकसभा चुनाव की घोषणा की जा चुकी है। मोदी शाह तो पहले से ही चुनावी प्रचार में जुटे हुए हैं। उनके लिये तो सारी संवैधानिक संस्थाएं साथ खड़ी हैं। इसके अलावा उन्हें चुनावी बांड के जरिये भारी चंदा भी मिला है। चुनाव आयोग की वेबसाइट के अनुसार भाजपा को चुनावी चंदे का 56 फीसद चंदा मिला है। इसके बावजूद अमित शाह मीडिया में यह झूठी बात कह रहे हैं कि उनकी पार्टी को सबसे अधिक चंदा नहीं मिला है। उनकी इसी बात को गोदी मीडिया और आईटी सेल देश भर में फैला रहा है।

आप नेताओं पर जांच एजेसियों की निगाहें
कुछ दिनों पहले ही चुनाव आयोग ने देश में लोकसभा चुनाव के शेड्यूल की घोषणा की है। लेकिन भाजपा और पीएम मोदी तो तीन चार माह पहले से ही चुनावी मोड में हैं। वैसे तो भाजपा के बारे में कहा जाता है कि वो 24 घंटे और बारहों मास चुनावी प्रक्रिया में जुटे रहते हैं। भाजपा पर यह आरोप भी लगता है कि वो गैर भाजपा की सरकारों को गिराने की साजिश में जुटी रहते हैं। विपक्षी सरकारों का तो यह भी कहना है कि चुनी हुई सरकारों को गिराने के लिये वो जांच एजेंसियों का बेजा इस्तेमाल भी कर रहे हैं। पिछले दो तीन सालों में आम आदमी पार्टी और दिल्ली सरकार के मंत्रियों सतेंद्र जैन, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और सांसद संजय सिंह को ईडी सीबीआई ने जेल भेज दिया है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि इन सभी नेताओं के पास से किसी भी प्रकार का सुबूत या रकम बरामद नहीं हुई है लेकिन आज तक उन्हें अदालतों से बेल तक नहीं मिली है। मोदी सरकार पर इंडिया गठबंधन के नेताओं को आरोप है कि उन पर जांच एजेंसियों को इस लिये लगाया है कि वो आम चुनाव में सक्रिय न रहें। ये बात साफ है कि मोदी शाह को इंडिया गठबंधन की एकजुटता का खौफ है अगर ये लोग चुनाव में प्रचार करते हैं तो मोदी सरकार की हैट्रिक खटायी में पड़ सकती है।








