जब कभी आप अपने पैसे को इंवेस्ट करने की सोचते हैं तो आपका ध्यान हमेशा सिक्योरिटी और बेहतर रिटर्न पर रहता है। ऐसा सोचने वाले आप अकेले व्यक्ति नहीं हैं। कई बार देखा जाता है कि इंवेस्टर ज्यादा रिटर्न के चक्कर में गलत जगह पैसा लगा बैठते हैं। आइए जानते हैं ऐसी स्कीम जहां इंवेस्ट करने पर बेहतर रिटर्न मिलेगा साथ ही आपका पैसा भी सुरक्षित रहेगा।
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इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम क्या है?
अगर आप म्युचुअल फंड में इंवेस्ट करके टैक्स बचाना चाहते हैं तो आपके लिए इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम एक बेहतर विकल्प हो सकता है। ईएलएसएस में निवेश सिर्फ टैक्स छूट को ध्यान में रखकर पैसा न लगाएं, बल्कि कंपनी के लंबे अवधि रिटर्न, कारोबार की स्थिरता की जानकारी भी लें। रिटर्न में उतार-चढ़ाव को देखते हुए हर तीन साल में बदलाव से बचने की कोशिश करनी चाहिए।
रिटर्न की स्थिति: हमें इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम इंवेस्टमेंट करने से पहले यह जाना लेना चाहिए कि इसका 65% प्रतिशत पैसा स्टाॅक मार्केट में लगाया जाता है। ऐसे में रिटर्न को लेकर कुछ स्पष्ट नहीं कहा जा सकता। ईएलएसएस में तीन साल का लॉक-इन पीरियड होता है। यानी तीन साल के बाद ही आप निवेश निकाल सकते हैं।
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यूलीप क्या है?
यूलीप एक ऐसा इंवेस्टमेंट है जिसमें आप पैसा लगाते हैं तो आपको इंश्योरेंस कवर के साथ बेहतर रिटर्न भी मिलता है। इसमें इंवेस्टमेंट करने पर टैक्स में छूट मिलता है। यूलिप में टैक्स छूट का फायदा लेने के लिए यह जरूरी है कि उसमें बीमा कवर सालाना प्रीमियम का कम से कम 10 गुना हो। बाजार से जुड़े होने की वजह से यूलिप में बीमा कवर कम होता है। ऐसे में टैक्स बचाने के लिए 2.5 लाख रुपये सालाना यूलिप में निवेश करते हैं तो बदले में आपको 25 लाख रुपये का बीमा कवर मिलेगा। जबकि आप महज पांच हजार रुपये सालाना प्रीमियम पर 50 लाख रुपये की बीमा पॉलिसी खरीद सकते हैं। इसके अलावा यूलिप में तीन फीसदी तक रखरखाव शुल्क लगता है जबकि ईएलएसएस में 2.5 फीसदी तक लगता है।
यूलिप में पांच साल का लॉक-इन पीरियड होता है। इसके अलावा यदि यूलिप की पांच साल की अवधि में आप ग्रेस पीरियड मिलने के बाद भी प्रीमियम जमा नहीं कर पाए तो पॉलिसी खत्म हो जाती है।
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पब्लिक प्रोविडेंट फंड
पब्लिक प्रोविडेंट फंड की शुरुआत 1968 में की गई थी। लेकिन आज भी यह सबका फेवरेट बना हुआ है। इसकी लोकप्रियता का एक बड़ा कारण है कि यहां अगर आप अपना पैसा इंवेस्ट करते हैं तो आपका पैसा पूरी तरह से सुरक्षित रहता है। साथ ही इंवेस्टर को इनकम टैक्स मे भी छूट मिलती है। अगर आप 15 साल के लिए इसमें इंवेस्टमेंट करते हैं तो आप 7 साल बाद इस पर लोन भी ले पाएंगे।
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स्कीम |
टैक्स छूट |
रिटर्न रेट | मिनिमम लाॅक इन पीरियड | मिनिमम इंवेस्टमेंट |
| ElSS | 1.5 लाख रुपये तक | 12% – 14% | 3 साल | 500 रुपये |
| ULIP | सेक्शन 80सी के तहत प्रीमियम के आधार पर टैक्स में छूट साथ ही मैच्योरिटी पर 10(10D) के तहत छूट | औसतन 16% | 5 साल | डायनेमिक |
| PPF | सेक्शन 80सी के तहत 1.5 लाख की छूट | 7.90% | 15 साल | 500 से 1.5 लाख |







