कंपनियों में ठेके (कॉन्ट्रैक्ट) पर कर्मचारी रखने का चलन जोरों पर है। कोरोना संकट में इसमें और तेजी आई है। कंपनियां ईपीएफ नियमों के अनुसार सभी तरह का भुगतान ठेकेदारों को करती हैं लेकिन कई बार ठेकेदार अपने कर्मचारियों के ईपीएफ खाते में राशि जमा नहीं कराते हैं। ठेकेदार द्वारा कंपनियों से पीएफ लेकर श्रमिकों को नहीं देने को लेकर शिकायतें अब ज्यादा आ रहीं थी। ऐसे में ईपीएफओ ने ठेकेदारों पर नजर रखने के लिए कंपनियों को एक इलेक्ट्रॉनिक सुविधा मुहैया कराने का फैसला किया है जिससे वह ठेकेदारों पर सख्ती बढ़ा सकेंगी।

ईफीएफओ की इस नई पहल से ठेकेदार और श्रमिक मुहैया कराने वाली कंपनियों द्वारा दिए जा रहे पीएफ पर नजर रखना आसान होगा। मौजूदा समय में काम लेने वाली कंपनियों के पास ऐसी कोई सुविधा नहीं है जिससे वह जान सकें कि ठेकेदार ने कर्मचारियो के ईपीएफ खाते में राशि जमा की या नहीं। साथ ही कितनी राशि और कब जमा कराई है इसके लिए कंपनियों को ठेकेदारों की बातों के भरोसे रहना पड़ता है। विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार इससे बेहद असहज स्थिति पैदा हो जाता है क्योंकि कर्मचारी इसके लिए उस कंपनी को जिम्मेदार ठहराने लगते हैं जिसके लिए वह काम कर रहे होते हैं। जबकि कंपनियों के पास वैसे कर्मचारियों के बैंक खाते आदि की विशेष जानकारी नहीं होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि ईपीएफओ की इस नई सुविधा से ठेकेदारों की मनमानी पर अंकुश लगेगा।
पीएफ हड़पने की मिल रही थी शिकायतें

कंपनियां ठेके पर रखे गए कर्मचारी को भी मानकों के तहत भुगतान करती हैं। हालांकि, वह उन कर्मचारियों को सीधे वेतन नहीं देकर उनके ठेकेदारों को राशि देती हैं। इसमें वह पीएफ का भुगतान भी शामिल होता है। लेकिन ठेकेदार द्वारा कंपनियों से पीएफ लेकर श्रमिकों को नहीं देने को लेकर शिकायतें आ रहीं थी। कई बार केवल आंशिक भुगतान हो रहा था। इसके बाद ईपीएफओ ने इसपर अंकुश लगाने के के लिए यह कदम उठाया है।

कर्मचारियों को होगी सुविधा

सरकार ने श्रम नियमों को सख्त करते हुए ईएफएफ कटौती के साथ अन्य सुविधाएं देने के भी निर्देश दिए हैं। ज्यादातर काम ठेके पर होने की वजह से कंपनियां कर्मचारियों को सीधे भुगतान नहीं कर रही हैं। ऐसे में ईपीएफओ की नई पहल से कंपनियां ठेकेदारों पर नजर रख सकेंगी और समय रहते कदम उठा सकेंगे जिससे कर्मचारियों को परेशानी नहीं झेलनी पड़ेगी।

सिर्फ एक क्लिक पर मिलेगी जानकारी

मुख्य कंपनियों को ईपीएफओ के पोर्टल पर दिए गए फॉर्म में ठेकेदार और उसके संबंधित कर्मचारी का विवरण डालना होगा। ऐसा करते है ठेकेदार और उस कर्मचारी का विवरण आ जाएगा। इसमें यह जानकारी आसानी से मिल जाएगी कि ठेकेदार ने कर्मचारी के ईपीएफ में राशि की है नहीं और जमा की है तो कितनी राशि जमा की है। ईपीएफ नियमों के अनुसार कर्मचारी के मूल वेतन का 12 फीसदी ईपीएफ खाते में जमा होती है। इतनी ही राशि कंपनियां भी जमा करती हैं।

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