इंप्लायज प्रोविडेंट फंड (EPF) की शुरुआत 1952 में की गई थी। तब से अब तक यह एक भरोसेमंद स्कीम बनी हुई है। बड़ी संख्या कर्मचारी इस स्कीम में पैसा इंनेवेस्टमेंट करते हैं। यह एक ऐसी स्किम है जिसका लाभ कर्मचारियों को मिलता है। इस पूरी स्कीम में तीन अलग-अलग पक्ष होते हैं। पहला कर्मचारी, दूसरा नियोक्ता और तीसरा सरकार। आइए जानते हैं इस स्कीम से जुड़ी हर एक बात – 

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कर्मचारी और नियोक्ता कितना करते हैं योगदान 

योग्य कर्मचारी को अपने बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ता को जोड़ कर 12% योगदान इसमें करना होता है। वहीं, नियोक्ता को भी इतना ही योगदान करना होता है। रिटायरमेंट के वक्त निवेशक को ब्याज सहित पूरा पैसा वापस मिलता है। Ladder7 के संस्थापक सुरेश बताते हैं, ‘कर्मचारी के द्वारा किया 12% ईपीएफ खाते में जाता है। वहीं, नियोक्ता के 12% में से 3.67% ईपीएफ खाते में और बाकि 8.33% ईपीएस (Employee Pension Scheme) खाते में जाता है। 12% से अधिक EPF में योगदान करने पर यह VPF में तब्दील हो जाता है। ऐसी स्थिति में नियोक्ता के योगदान से मैच करना जरूरी नहीं होता है फिर।’ 

कुछ विशेष परिस्थितियों में 12% से कम के योगदान की भी मान्यता है। जैसे की अगर कंपनी में कर्मचारियों की संख्या 20 से कम है तो ऐसी स्थिति में कर्मचारी और नियोक्ता 10%-10% प्रतिशत तक का योगदान कर सकते हैं। यह इसलिए है ताकि EPF में लोग अधिक से अधिक इनवेस्टमेंट करें। 

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EPF के फायदे  

EPF स्कीम के कई फायदों में इसकी ब्याज दर है। मौजूदा समय में इस स्कीम के तहत 8.5% की ब्याज दर मिल रही है। यह ब्याज दर मंथली बेसिस पर कैलकुलेट किया जाता है। 

मुफ्त बीमा का लाभ

किसी भी व्यक्ति को नौकरी लगने के बाद उसका पीएफ खाता खोला जाता है। जैसे ही कर्मचारी का पीएफ खाता खुलता है, तब वह बाई-डिफॉल्ट बीमित भी हो जाता है। कर्मचारी डिपोजिट लिंक्ड इंश्योरेंस स्कीम (ईडीएलआई) के तहत कर्मचारी का सात लाख रुपये तक का बीमा होता है। ईपीएफओ के सक्रिय सदस्य की सर्विस अविध के दौरान मृत्यु होने पर उसके नामित या कानूनी वारिस को सात लाख रुपये तक का भुगतान किया जाता है। यह लाभ कंपनियां और केंद्र सरकार अपने कर्मचारियों को उपलब्ध कराती हैं।

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आयकर में 80सी के तहत कर छूट

नौकरीपेशा वर्ग के लिए ईपीएफ कर बचाने का एक बेहतरीन जरिया है। आयकर की धारा 80सी के तहत ईपीएफ में जमा 1.5 लाख रुपये पर आयकर छूट प्राप्त होता है। ईपीएफ खाताधारक अपनी सैलरी पर बनने वाले टैक्स में 12 प्रतिशत तक की बचत कर सकते हैं। हालांकि, यह लाभ नए टैक्स कानून में बंद कर दिया गया है पुरानी कर व्यवस्था का चयन कर इस लाभ का फायदा अभी भी उठा सकते हैं। लेकिन इस दौरान यह भी ध्यान रखना चाहिए कि 7.5 लाख रुपये से अधिक के योगदान अब से टैक्स के दायरे में आएगा। वहीं, वीपीएफ में यह 2.5 लाख रुपये तक की है। 

EPF स्कीम से कब निकाल सकते हैं पैसा

EPF को केवल रिटायर्मेंट, बेरोजगारी अथवा कुछ विषम परिस्थितियों के दौरान ही निकाला जा सकता है। रिटायर्मेंट के बाद या दो महीनों की लगातार बेरोजगारी के बाद ही पूरी रकम निकाली जा सकती है। नए नियम के अनुसार EPFO बेरोजगारी के 1 महीने के बाद ईपीएफ निधि से 75% राशि निकालने की अनुमति देता है। आप लगातार 2 महीनों तक बेरोज़गार रहते हैं, तो आप शेष 25% फंड भी निकाल सकते हैं। इस बीच यदि नई नौकरी मिल गई है तो शेष 25 फीसद राशि को एक नए EPF खाते में ट्रान्सफर किया जा सकता है। कर्मचारी के मृत्यु पर परिवार के सदस्य भी पैसा निकाल सकते हैं। 

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UAN नंबर क्यों है जरूरी 

यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) एक 12 डिजिट की संख्या है, जो कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) द्वारा भविष्य निधि खाते वाले प्रत्येक कर्मचारी को आवंटित की जाती है। किसी कर्मचारी को आवंटित यह नंबर नौकरी में बदलाव के बावजूद पूरे समय समान रहता है। जब कोई कर्मचारी नौकरी बदलता है, तो ईपीएफओ ईपीएफ खाता आईडी की एक नई सदस्य पहचान संख्या आवंटित करता है, जो यूएएन से जुड़ा होता है।



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