यूरोपियन यूनियन ने तालिबान को मान्यता देने से इनकार कर दिया है। यूरोपियन कमिशन प्रेसिडेंट उरसूला वोन डेर लियेन ने कहा कि ना तो तालिबान को मान्यता दी जाएगी और ना ही आतंकवादियों से कोई पॉलीटिकल टॉक होगा। अफगानिस्तान से करीब हफ्ते भर पहले तालिबान पर कब्जा किया था। जिसके बाद अब यूरोपियन यूनियन की तरफ से यह बयान आया है। पिछले हफ्ते रविवार को तालिबान ने काबुल पर बेहद आसानी से कब्जा कर लिया था। ईयू एग्जिक्यूटिव के प्रमुख ने मैड्रिड में अफगान कर्मचारियों के लिए बनाए गए रिसेप्शन सेंटर के दौरे के बाद कही है। 

उरसूला वोन डेर लियेन ने कहा कि इस साल अफगानिस्तान के लिए 57 मिलियन यूरो दिये जाने की अनुमति दी थी और वो इसे बढ़वाने की कोशिश करेंगी। उन्होंने कहा कि ईयू मानवाधिकार की सुरक्षा और उसका आदर करने के लिए प्रतिबद्ध है। ईयू अल्पसंख्यकों को बेहतर जिंदगी देने के अलावा महिलाओं और लड़कियों को सम्मान देने के लिए भी प्रतिबध है।

यूरोपियन कमिशन प्रेसिडेंट उरसूला वोन डेर लियेन ने कहा कि ‘हम तालिबान के द्वारा कही गई अच्छी बातों को सुन सकते हैं लेकिन हम उसके हर कारनामे और एक एक्शन की गहन छानबीन करेंगे। उन्होंने कहा कि कमीशन यूरोपीय देशों को फंड देने के लिए तैयार था। जिसके जरिए प्रवासियों को फिर से बसने में सुविधा मिलती है। उन्होंने कहा कि वो पुनर्वास के मुद्दे को अगले हफ्ते जी7 की बैठक में फिर उठाएंगी। 

आपको बता दें कि साल 2015 जब एक लाख से ज्यादा प्रवासी यूरोपिय देशों में पहुंचे तब उनमें से ज्यादातर सीरिया, अफगानिस्तान और इराक से थे। ईयू ने तुर्की के साथ एक डील की जिसकी वजह से कई प्रवासियों को उनके क्षेत्र में भी पनाह मिल सका और यूरोपिय देशों में आने वाले प्रवासियों की संख्या कम हो गई।  इधर तालिबान को लेकर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने कहा है कि अफगानिस्तान में समाधान तलाशने के लिए ब्रिटेन के कूटनीतिक प्रयास जारी हैं, जिसमें यदि आवश्यक हुई तो तालिबान के साथ काम करने का रास्ता भी खुला है।

क्षेत्र में जारी संकट पर चर्चा के लिए शुक्रवार को एक आपातकालीन ”कैबिनेट ऑफिस ब्रीफिंग रूम” (कोबरा) की बैठक के बाद जॉनसन ने मीडिया से कहा कि काबुल हवाई अड्डे से ब्रिटिश नागरिकों और समर्थकों को निकालने के लिए ”कठिन” चुनौतियां बनी हुई हैं, हालांकि स्थिति अब कुछ बेहतर हो रही है। 

जॉनसन ने कहा, ‘मैं लोगों को आश्वस्त करना चाहता हूं कि अफगानिस्तान के लिए समाधान तलाशने के हमारे राजनीतिक और कूटनीतिक प्रयास जारी रहेंगे, ऐसे में निश्चित रूप से, अगर जरूरी हुआ तो तालिबान के साथ काम करना शामिल है। अफगानिस्तान के लिए हमारी प्रतिबद्धता स्थायी है।’
 



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