खेती किसानी से जुड़े तीन कानूनों के विरोध में पंजाब समेत कई प्रदेशों के किसान धरना प्रदर्शन कर रहे है। पिछले पांच दिनों से दिल्ली की सीमा पर डटे हुए हैं। किसानों के मसीहा बनने का दावा करने वाले बीजेपी नेताओं और एनडीए सरकार के मंत्रियों के असली चेहरे सामने आ गये है। चुनाव से पहले किसानों के सबसे बड़े हितैषी बनने वाले प्रधानमंत्री मोदी भागे भागे फिर रहे हैं। उनके पास किसानों से मिलने की फुरसत नहीं है। यहां किसान सर्द रातों में खुले आसमान के नीचे हैं और प्रधानमंत्री पूरे देश में भ्रमण कर रहे हैं। उनके पास वाराणसी में देव दीपावली का पर्व मना रहे हैं लेकिन किसानों की पीड़ा वेदना को समझने की फुरसत नहीं है। किसन सफ तौर पर यह कह रहा है कि केन्द्र की मोदी सरकार ने उनके गले में फंदा डालने के लिये तीनों कानून बनाये है। वो केन्द्र सरकार के इन तीनों कानूनों का बहिष्कार करते है। वो अपना आंदोलन तक तक जारी रखेंगे जब तक ये तीनों किसान विरोधी कानून खत्म नहीं किये जाते है।
वहीं केन्द्र सरकार के मंत्री अभी भी यह कह रहे हैं कि उनके तीनों कानून किसानों के हित में बनाये हैं। उनके लिये अच्छे भविष्य की संभावनाओं के लिये नये द्वार मोदी सरकार ने बनाये है।
केन्द्र सरकार ने साफ तौर पर किसानों के दिल्ली प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिये हैं। जहां जहां भाजपा की सरकारें हैं वहां किसानों के दिल्ली आने पर रोक लगा दी गयी है। उत्तराखंड, हरियाणा और यूपी की सरकारें किसानों के प्रति इस कदर बुरा बर्ताव कर रही हैं जैसे वो किसान न हो कर आतंकवादी हैं। प्रशासन और पुलिस उन पर बर्बरता पूर्वक लाठी चार्ज और पानी की बौछार मार रही है। इस पर तुर्रा यह कि वो किसानों की हितैषी बनने का दावा भी कर रही है। किसानोंके ािेआंदोलन पर केन्द्र सरकार और स्थानीय प्रशासन पुलिस कोरोना का डर बता कर उन्हें दिल्ली में प्रवेश करने पर रोक लगा रहे है। वहीं दूसरी ओर लॉकडाउन के दौरान बिहार में चुनाव कराया गया जहां पीएम मोदी से लेकर देश की सारी राजनीतिक दलों ने भीड़ भरी सभाएं व रैलियां की तब किसी को कोराना का डर नहीं दिख रहा था। किसान आज अपनी बात सरकार के सामने रखना चरहते हैं तो उन्हें महामारी का डर दिखा कर रोका जा रहा है। फिलहाल तो बीजेपी को हैदराबाद का नगर निकाय का चुनाव सबसे बड़ी चुनौती और लक्ष्य दिख रहा है। यह पहली बार देखा जा रहा है कि नगर निकाय चुनाव में देश का प्रधानमंत्री चुनाव प्रचार करने को आतुर है। हैदराबाद फतेह करने के लिये बीजेपी ने नड्डा से लेकर योगी, अमित शाह समेत अनेक दिग्गज नेताओं को चुनाव प्रचार के लिये उतार दिया है। इस बात से साफ नजर आता है कि बीजेपी येन केन प्रकारेण उन राज्यों में पैर जमाना चाहती है जहां उनका कोई प्रभाव नहीं है। 2023 में तेलंगाना में विधानसभा चुनाव है बीजेपी नगर निकाय के जरिये विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुट गयी है।
मामला हद से बाहर आता देख पिछले संडे को मन की बात के जरिये किसानों को साधने का असफल प्रयास किया। उन्होंने कहा कि किसानों को विपक्षी दल बहका रहे हैं। किसान अपना हित न जानते हुए दिल्ली सीमा पर आंदोलन कर रहे हैं। उनके इस आंदोलन से दिल्ली व उसके आसपास के निवासियों को काफी परेशानी हो रही है। किसानों को समझना चाहिये कि तीनों कृषि कानून उनके भले के लिये हैं। इन कानूनों से किसी भी किसान का अहित नहीं होने वाला है। यह सब उनकी नकारात्मक सोच है जो सरकार के खिलाफ आंदालन किया जा रहा है।








