General Insurance Business Nationalisation Amendment Bill 2021- जब से मानूसन सत्र शुरू हुआ है तब से लगातार संसद की कार्यवाही प्रभावित होती रही है। पिछले दिनों जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार अबतक 180 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान इस मानसून सत्र में हो गया है। मौजूदा सत्र सरकार के लिए हर दिन कोई ना कोई मुश्किल जरूर लाता है। लेकिन आज सरकार को लोकसभा में बड़ी सफलता मिली, सरकार ने जनरल इंश्योरेंस बिजनेस नेशनलाइजेशन अमेंडमेंट बिल 2021 (GIBNAB) लोकसभा पास करवा लिया।
GIBNA बिल के पास होने से क्या कुछ बदल जाएगा
केन्द्र की मोदी सरकार प्राइवेट सेक्टर के हर एक सेक्टर के इनवेस्टमेंट करने का रास्ता धीरे-धीरे खोल रही है। सरकार का मानना है कि इससे जहां कंपनियों के स्ट्रक्चर में बदलाव आएगा। वहीं, सरकार पर से इसका बोझ भी कम होगा। GIBNA बिल 1971 के मुताबिक जनरल इंश्योरेंस कंपनियों से अपनी हिस्सेदारी 51% से कम नहीं कर सकती। लेकिन मौजूदा बिल को मंजूरी मिलने के बाद सरकार अपनी हिस्सेदारी 51% से घटा सकती है। इससे सरकार का नियंत्रण भी इन कंपनियों पर से कम होगा।
इस बिल पर बयान देते हुए केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि अब समय आ गया है कि GIBNA बिल 1971 में संशोधन किया जाए। आपको बता दें इसी साल वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में दो बैंकों और एक जनरल इंश्योरेंस कंपनी के निजीकरण करण का ऐलान किया था। सरकार इस वित्त वर्ष 1.75 लाख करोड़ रुपये विनिवेश के जरिए जुटाने का लक्ष्य रखा है।
इन कंपनियों में से किसी एक का होगा निजीकरण
नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, मौजूदा समय में देश में पब्लिक सेक्टर में ये चार इंश्योरेंस कंपनियां हैं। हालांकि इनमें से किसका निजीकरण होगा, इसको लेकर सरकार की तरफ से कुछ नहीं कहा गया है।







