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आज जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद कांग्रेस से आजाद हो गये। ये तो होना ही था। कांग्रेस ने इस बार उन्हें राज्यसभा भेजने से मना कर दिया तभी से आजाद पार्टी से नाखुश दिख रहे थे। हाल ही में उन्हें कांग्रेस ने प्रदेश की बागडोर संभालने का मौका दिया था लेकिन उन्होंने उसे स्वीकारने से इनकार कर दिया था। कांग्रेस भी ये चाह रही है कि जो लोग पार्टी नाखुश हैं वो अपने आप किनारा कर लें। इससे पार्टी में युवाओं को आगे आने का मौका मिल सकेगा। दो दिन पहले ही कांग्रेस प्रवक्ता जयवीर शेरगिल ने भी कांग्रेस से गुड बाय बोल दिया है। वैसे भी पंजाब चुनाव के बाद से ही असंतुष्ट कांग्रेस नेताओं ने पाला बदला, उनमें पूर्व पंजाब कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने कांग्रेस छोड़ बीजेपी में शरण ली थी। उसके बाद आनंद शर्मा ने भी बीजेपी मे अपनी जगह तलाशने का प्रयास किया। उन्होंने बीजेपी मुख्यालय में जाकर जेपी नड्डा से मुलाकात की थी। तब से यह कयास लगाये जा रहे थे कि पूर्व केन्द्रीय मंत्री आनंद शर्मा भाजपा में जाने की फिराक में हैं।
इसी साल जब राज्यसभा से गुलाम नबी आजाद की बिदायी के दौरान पीएम मोदी ने आजाद के लिये काफी अच्छा भाषण दिया। उन्होंने यह कहा कि आप जैसे लोग हमेशा राज्यसभा में याद किये जायेंगे। आपकी शालीनता और बहस के अंदाज को कभी भी भुलाया नहीं जा सकेगा। पीएम मोदी के इस बदले हुए अंदाज से पता चल रहा था कि अब आजाद पर डोरे डालने की तैयारी हो रही है। भाजपा को जम्मू कश्मीर में एक बड़ा चेहरे के रूप में गुलाम मिल सकता है। वैसे भी कांग्रेस ने गुलाम को राज्यसभा न भेजकर नाराज कर दिया था। वो भी अपना नया आशियाना ढूंढ रहे हैं। लेकिन इसके लिये वो इतनी जल्दबाजी नहीं दिखाना चाह रहे थे। लगभग छह माह बाद गुलाम ने कांग्रेस से आजाद होने का मौका तलाश लिया। जाते जाते उन्होंने अपने पांच पेज के इस्तीफे में राहुल गांधी के बारे में बहुत कुछ लिखते हुए पार्टी छोड़ने की बात कही। यह भी कयास लगाये जा रहे हैं कि इस इस्तीफे के पीछे भाजपा का ग्रीन सिग्नल भी हो सकता है।








