Is Rahul & Kejriwal is responsible for BJP Victory in Gujrat elections
Is Rahul & Kejriwal is responsible for BJP Victory in Gujrat elections

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BJP is feeling heat wave in MCD & Gujrat Election
PM  Modi & co. relief after glorious victory in Gujrat elections

एक कहावत है कि जब दो बिल्लियां आपस में लड़ती हैं तो उसका फायदा बंदर उठाता है। यही हाल गुजरात चुनाव में देखने को मिला है। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने अलग अलग चुनाव लड़ कर भाजपा को शानदार जीत का तोहफा दिया है। यह कहना गलत होगा कि मोदी मैजिक  की वजह से भाजपा जीती है जीत के असली जिम्मेदार तो राहुल गांधी और अरविंद केजरीवाल हैं। अगर इन दोनों  ने थोड़ी सी समझदारी दिखाई होती तो गुजरात में भाजपा का 27 साल का कुशासन खत्म हो गया होता। चुनाव परिणामों मे साफ दिख रहा है कि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के प्रत्याशियों की टक्कर से बीजेपी को आसानी से जीत मिली है। यानि बीजेपी को जितने वोट मिले यदि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार के जोड़ने से कम वोट मिले हैं। ऐसा बहुत सारी विधानसभा सीटों पर देखने को मिल रहा है। लेकिन अब इस बात पर बहस करना बेकार है कि ये होता तो वैसा होता। वैसे इस बार के गुजरात और हिमाचल के चुनाव में भाजपा और कांग्रेस को बराबर जीत का मौका मिला है। वहीं दिल्ली एमसीडी में आम आदमी पार्टी ने 15 साल से राज कर रही भाजपा को सत्ता से बेदख कर दिया है। ऐसे में यह माना जा सकता है कि कुल​ मिला कर भाजपा को नुकसान हुआ है। दिल्ली में एमसीडी गयी और हिमाचल में सरकार। गुजरात की तो उन्होंने सरकार बचाई है।

दो​ बिल्लियों की लड़ाई में बंदर का फायदा

अगर गुजरात विधानसभा के चुनाव में कांग्रेस पूरी मजबूती से लड़ी होती तो आज बीजेपी गुजरात में भी अपदस्थ हो चुकी होती। कांग्रेस ने गुजरात चुनाव में काफी देर से प्रचार किया वो भी आधे अधूरे मन से। तब तक आम आदमी पार्टी ने गुजरात में अपनी पहचान बना ली थी। भाजपा का तो गुजरात गढ़ है। दूसरी बात यह पीएम मोदी और अमित शाह का गृह प्रदेश है। यहां हारना बीजेपी के लिये डूब मरने की बात होती। इसीलिये पीएम मोदी समेत शाह, नड्डा और 15 केन्द्रीय मंत्रियों और आधा दर्जन सीएम को गुजरात के गांवों में जाकर धूल फांकनी पड़ी। यही वजह रही कि भाजपा ने कांग्रेस और आम आदमी पार्टी की आपसी जंग का फायदा उठाते हुए गुजरात में ऐतिहासिक जीत हासिल करने में सफलता प्राप्त की है।

आप और कांग्रेस का गठबंधन होता तो….

अगर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी चुनाव से पहले हाथ मिला लेते तो आज परिणाम कुछ और होते। इनके गठबंधन से गुजरात भाजपा मुक्त हो गया होता। लेकिन दोनों के अहम् की वजह से गुजरात को भाजपा की 5 साल और गुलामी झेलनी होगी। कांग्रेस को तो और भी मर्मिंदगी उठानी पड़ रही है। 2017 के चुनाव में कांग्रेस को 77 सीटें मिलीं थी। इस बार केवल 17 सीटों पर ही जीत हासिल हुई। राहुल गांधी जो कांग्रेस के स्टार प्रचारक हैं उन्होंने भी काफी देरी से प्रचार शुरू किया तब तक मोदी शाह एण्ड कंपनी ने गुजरात में हाइटेक बांबिंग प्रचार किया। वैसे भी गुजरात में बीजेपी को अकेले मात देना इतना आसान नहीं है। आज भी लोग मोदी को गुजरात की अस्मिता से जोड़ कर देखते हैं।

कांग्रेस नेताओं के विवादित बोल

वहीं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने पीएम मोदी की तुलना रावण से कर बीजेपी को कांग्रेस को घेरने का एक मौका दे दिया। इसके अलावा कांग्रेस नेता मधुसूदन मिस्त्री ने भी पीएम मोदी को गुजरात में औकात पता चलने की बात कह कर कांग्रेस की राह को मुसीबत में डाल दिया था। मोदी तो ऐसे को बहुत आसानी से अपने पक्ष में करना जानते हैं। उन्होंने अपनी हर  सभा और रैली में खड़गे और मिस्त्री के बयानों को जोर शोर से भुनाया। 2014 में लोकसभा  चुनाव के दौरान पूर्व केन्द्रीय मंत्री मणिशंकर अय्यर ने नीच और चायवाला कह कर मोदी की जीत को आसान कर दिया था।

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