हाइलाइट्स:

  • हाथरस गैंगरेप पीड़िता के पिता बोले कि ऐसे लोगों को फांसी हो, यही हमारी एकमात्र इच्छा है
  • इससे पहले गांववालों के विरोध के बीच पुलिस ने हाथरस में युवती का अंतिम संस्‍कार कराया
  • पुलिस का कहना है कि परिवारवालों की रजामंदी के बीच किया गया अंतिम संस्‍कार

नई दिल्ली
हाथरस गैंगरेप पीड़िता बेटी की मौत से गमजदा पिता के चेहरे पर गम, बेबसी और लाचारी साफ झलक रही थी। अस्पताल की मॉर्चरी के बाहर अपनी बेटी का शव लेने के लिए इंतजार कर रहे पिता ने इतने बड़े गम के बाद कहा कि अगर कानून व्यवस्था अच्छी होती तो वो लोग इतनी बड़ी घटना को अंजाम नहीं दे पाते। हादसे को बयां करते हुए चाचा बिफरकर रोने लगे, कहा, ‘हमारी बच्ची की गर्दन तोड़ दी, कमर तोड़ दी, जीभ काट दी, इससे बड़ा कृत्य और क्या होगा? आंसू पोंछते हुए पिता ने कहा कि हमें न्याय चाहिए, जो दर्द मेरी बेटी ने झेला है वह और बेटी न झेले, ऐसे लोगों को फांसी हो, यही हमारी एकमात्र इच्छा है।

चाचा ने कहा कि 14 सितंबर की घटना है और 28 सितंबर को उसे दिल्ली इलाज के लिए भेजा गया। उन्होंने कहा कि अगर पहले उसे एम्स या सफदरजंग भेज दिया जाता तो शायद वह जिंदा होती। वहां तो कुछ इलाज ही नहीं हुआ। वहीं पिता ने कहा कि आरोपी हमारे गांव का ही है, बहुत बड़ी साजिश के तहत यह सब किया गया है, हम डर गए थे, घबरा गए थे, लेकिन पुलिस ने भी हमारी मदद नहीं की। सफदरजंग में युवती की मौत के बाद उसके भाई ने बताया कि हम उसे सोमवार की शाम को लेकर यहां आए थे। हमें गुमराह किया गया, जब यूपी में जहां पहले इलाज हो रहा था, वहां के डॉक्टर ने कहा कि एम्स रेफर कर रहे हैं, यहां सफदरजंग में एडमिट करा दिया। हालांकि, उसने यह कहा कि पहले एम्स लेकर गए थे, लेकिन वहां पर एडमिट नहीं किया। इस घटना को लेकर पुलिस के रवैया पर उसके भाई ने कहा कि 14 सितंबर की घटना है, पुलिस ने तो कुछ नहीं किया। अब दो दिन पहले चार लोगों को गिरफ्तार किया है।

‘2006 में मेरे दादा जी के साथ भी मारपीट की थी’
क्या कोई आपसी रंजिश थी? इस सवाल पर युवती के भाई ने कहा कि हां, पहले भी इन लोगों का हम लोगों के साथ अच्छा व्यवहार नहीं रहा है। इन लोगों ने साल 2006 में मेरे दादा जी के साथ भी मारपीट की थी। आपको पुलिस और सरकार पर कोई भरोसा है? इस पर युवक का कहना था कि कोई भरोसा नहीं है। वहीं युवती के चचेरे भाई ने कहा कि इस घटना के बाद हम लोगों को भी आते जाते लोग धमकी देते हैं। उसने कहा कि मास्क लगाकर बाइक से आते-जाते कहते हैं कि एक-दो को मार कर जेल जाएंगे।

’22 सितंबर को आईसीयू में शिफ्ट किया गया’
घटना के बारे में उसने कहा कि जब हमें पता चला तो सभी लोग खेत की तरफ गए, वहां यह खेत में पड़ी थी, हमें लगा कि सांप ने काट लिया है, लेकिन बाद में स्थिति समझ में आ गई। सभी उसे लेकर थाने गए, थाने के बाहर लिटा दिए। उसके बाद उसे अस्पताल में एडमिट किया गया। युवती के भाई ने कहा कि वह बहुत दर्द में थी, गर्दन की तीन हड्डी टूट गई थीं, उसे सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। दिल की धड़कन कम हो गई थी। 14 सितंबर की घटना है, उसे अस्पताल में एडमिट के बाद भी 22 सितंबर को आईसीयू में शिफ्ट किया गया, जबकि उसे शुरू से ही ऑक्सीजन की कमी हो रही थी। ऑक्सीजन वाली बात सफदरजंग अस्पताल के डॉक्टरों का भी कहना है कि उसका ऑक्सीजन सेचुरेशन मात्र 50 पर्सेंट था।



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