Supreme Court is in lime lite for it's functioning .It seems that SC is favourig Modi Govt. in some important issues
Supreme Court is in lime lite for it's functioning .It seems that SC is favourig Modi Govt. in some important issues

#CJI# Supreme Court# CJI DY Chandr chude# Important Verdicts held# Electoral Bond # Maha Gvt. issu# Abogration of Act 370# Jammu Kashmir Issue# Modi Govt.# PM Modi#

क्या सुप्रीम कोर्ट भी सत्ता के दबाव में है!

एक बात तो है कि सत्ता में वो ताकत है जो किसी भी संवैधानिक संस्था को लाचार कर सकती है। सुप्रीमकोर्ट भी इस प्रचंड बहुमत वाली सरकार के आगे लाचार दिख रहा है। सुप्रीम कोर्ट के कुछ जज तो सरकार के आगे नतमस्तक हैं वहीं कुछ ईमानदार जज जब सरकार की मुराद पूरी नहीं करता है तो उसकी बेंच से केस दूसरी बेंच में कर दिया जाता है। ऐसे में यह भी साफ हो गया है कि जो बिकेगा नहीं उसे तोड़ने पर मजबूर कर दिया जाता है। फिलहाल सुप्रीमकोर्ट में ऐसे बहुत मामलों पर जजों ने फैसले सुरक्षित रख लिये हैं। फैसले कब एलान किये जायेंगे ये सुप्रीमकोर्ट के जजों पर निर्भर करता है। इस बात का ध्यान रखा जा रहा है कि सरकार के खिलाफ में कोई फैसला न हो इसलिये फैसलों को सुरक्षित रखने का चलन हो गया है।

इस साल की शुरुआत तक यह लग रहा था कि सुप्रीमकोर्ट सत्ता के दबाव में कतई नहीं है लेकिन ताला हालात में यह साफ है कि जैसे सत्ता चाह रही है वैसा ही सुप्रीमकोर्ट चल रहा है।

धारा 370 का मामला सरकार के हित में

जम्मू कमीर में धारा 370 हटाने को लेकर देश के जाने माने वकीलों और कई पूर्व न्यायाधीशों ने याचिकाएं सुप्रीमकोर्ट में दायर की थी। कई माह तक कोर्ट में लगातार सुनवायी की खानापूरी हुई बाद में सरकार की कार्रवाई को सही बताते हुए याचिकाएं खारिज कर दी गयीं। इस मामले में सुप्रीमकोर्ट के फैसले की कई कानून विदों ने निंदा की। खासतौर से सीजेआई चंद्रचूड की खूब आलोचना की गयी। पूर्व व वर्तमान न्यायधीशों ने मीडिया में अपने विचार भी रखे। इससे भी जाहिर होता है कि बहुत सारे मामलेां में सुप्रीमकोर्ट सरकार के हितों को साधा जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने अहम मामलों पर फैसले सुरक्षा रखे

आजकल देखा जा रहा है कि सुप्रीमकोर्ट बहुत से ऐसे मामलों में फैसले सुरक्षित रख रही जिससे मोदी सरकार को काफी राहत मिल रही है। ऐसे में विपक्ष को सुप्रीम कोर्ट से राहते की उम्मीद थी वह अब धूमिल होती जा रही है। लोगों के दिमाग में सुप्रीम कोर्ट की जो छवि बनी थी कि वो इमेज अब बदलती जा रही है न्याय की उम्मीद लगा रहे लोगों को यह लग रहा है कि जो वो सोच रहे थे वो सिर्फ भ्रम था। अब न्याय की उम्मीद लगाना दिवास्वप्न रह गया है। लोगों ने सीजेआई चंद्रचूड से काफी उम्मीद लगा रखी थी। जनता को लग रहा था कि सीजेआई पहले जैसे बिके हुए जज नहीं हैं लेकिन अब उनका भी डरा हुआ चेहरा सामने आ गया है।

Is Modi Shah is totally fain to make solution for Manipur riots. Maiti-Kuki communities are fighting on some issues
Is Modi Shah is totally fain to make solution for Manipur riots. Maiti-Kuki communities are fighting on some issues

मणिपुर यौन उत्पीड़न का मामला

मणिपुर यौन उत्पीड़न का मामले का वीडियो इसी साल जुलाई में वायरल हुआ था तो सीजेआई ने केन्द्र व राज्य सरकार को स्वत: संज्ञान लेते हुए नोटिस जारी किया था। यह भी कहा कि एक सप्ताह के भीतर ठोस कदम उठाये गये सुप्रीम कोर्ट सीधा ऐक्शन लेगा। लेकिन 5 माह बाद भी सुप्रीमकोर्ट केन्द्र व राज्य सरकार के खिलाफ कोई ऐसा कुछ नहीं किया जिससे मणिपुर वासियों के जख्मों पर मरहम लग सके आज भी वहां हिंसा और अत्याचार की वारदातें जारी हैं। केन्द्र व राज्य सरकार के रवेये में कोई बदलाव नहीं आया है। पांच राज्यों के चुनाव प्रचार में पीएम और मोदी सरकार में जाते रहे लेकिन किसी के पास मणिपुर पीड़ितों के जख्मों पर मरहम लगाने का वक्त नहीं है। पीएम मोदी के पास विदेश घूमने का वक्त था। जी 20 में फोटो सेशन कराने का वक्त था लेकिन मणिपुर मुदृे पर हल निकालने का वक्त नहीं था। इस ओर से सुप्रीमकोर्ट ने भी किनारा कर लिया है।

महाराष्ट्र सरकार का फैसला भी अधर में

महाराष्ट्र में ऊद्धव ठाकरे की सरकार गिराने के मामले में सुप्रीमकोर्ट पिछले एक साल से कुछ खास फैसला नहीं लिया है। बस तारीख पर तारीख दी जा रही है। सुप्रीमकोर्ट ने महाराष्ट्र विधानसभा के स्पीकर पर विधायकों की सदस्यता पर फैसला लेने को कहा था। इतना समय बीतने के बाद भी स्पीकर ने शिंदे गुट के विधायकों की सदस्यता पर कोई फैसला नहीं लिया है। कारण वही है कि इससे महाराष्ट्र की बीजेपी शिंदे सरकार पर गाज गिर सकती है। मोदी सरकार हर हाल में चाहती है कि किसी तरह मामला यूं ही खिंचता रहे और पूरा सत्र खत्म हो जाये अगले साल आम चुनाव के साथ विधानसभा का चुनाव कराने की योजना बना रही है। ऐसे में सुप्रीमकोर्ट की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। सुप्रीमकोर्ट चुपचाप मोदी सरकार के कारनामों को देख रहा है। हालात देख कर लगता है कि मोदी सरकार को अब किसी भी संवैधानिक संस्था का कोई खौफ नहीं रह गया है। न्यायपालिका पर संसद का जोर चल रहा है। सुप्रीमकोर्ट के कोलोजियम जजों की नियुक्तियों के लिये जिन जजो के नाम मंत्रालय को भेजता है मंत्रालय उनमें अपनी मर्जी चलाने की साजिश रचता है।

इलेक्टोरल बांड मामले पर लीपापोती

सुप्रीमकोर्ट में चुनावी बांड को लेकर काफी समय से सुनवायी चल रही है। लेकिन कोर्ट की ओर से ऐसा कोई निर्देश नहीं दिया गया जिससे इस बांड पर रोक लग सके। बीजेपी और केन्द्र सरकार इस बांड के जरिये अंधाधुंध चंदा उद्योगपतियों से वसूल रही है। इसके बदले में सरकार इन चंदा देने वाले उद्योगपतियों को सरकारी ठेके दिये जाते हैं। यानि इस हाथ दे तो उस हाथ ले। जानकारी के मुताबिक 90 फीसद चुनावी चंदा भाजपा को मिल रहा है। सरकार और उद्योगपतियों की मिलीभगत से देश की बहुमूल्य कंपनियों को बेचा जा रहा है। इसके पीछे सरकार का कहना है कि अगर यह कंपनियां बीमार है तो मोदी के करीबी मित्र इनको कौडियों के दाम में खरीद क्यों रहे हैं। सुप्रीमकोर्ट ने चुनाव आयोग से इस मामले में पूरा ब्यौरा मांगा था। लेकिन चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट की बात को टाल मटोल कर दिया। चुनावी बांड के नाम पर सत्तारूढ़ दल बेतहाशा चंदा वसूली में जुटा हुआ है।

Bilkis Bano filed a writ against released accused of gang raped
Bilkis Bano filed a writ against released accused of gang raped

बिल्कीस बानो गैंपरेप और मर्डर केस ठंडे बस्ते में

2002 में गुजरात दंगे के दौरान बिल्कीस बानो के साथ 11 लोगों ने सामूहिक रेप किया और उसके सामने ही उसके परिवार के सात सदस्यों को मौत के घाट उतार दिया। इन सभी 11 लोगों को बाम्बे हाईकोर्ट ने दोषी मानते हुए आजीवन कैद की सजा सुनायी थी। लेकिन गुजरात और केन्द्र की मोदी सरकार ने 2022 में 15 अगस्त के दिन इन सभी 11 कैदियों की रिहाई के आदेश दिया था। इस मामले में मोदी सरकार और गुजरात की बीजेपी सरकार की काफी निंदा हुई। इसके खिलाफ बिल्कीस बानो ने सुप्रीमकोर्ट में इन रिहा किये गये कैदियों के खिलाफ रिट दायर की है इस मामले पर भी सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र और गुजरात सरकार को ​नोटिस दे कर खानापूरी कर दी है। ये देखा जा रहा है कि सुप्रीमकोर्ट शुरूआत में तो इतना सक्रिय दिखता है और बाद में मामला ठंडा कर दिया जाता है।

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