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गुजरात लॉबी देश और पार्टी पर कब्जा कायम रखने के लिये पूरे देश को दांव पर लगाने को जुट गयी है। पिछले साढ़े नौ साल में मोदी शाह की सरकार ने केवल देश को हिन्दू मुस्लिम में बांटने का जहर बोने का काम किया है। यह जहर खासतौर से युवाओं के अंदर इस कदर समा गया है कि सहज कम होने का नाम नहीं लेगा। इसके साथ ही हिन्दू होने का जो अहंकार देश में व्याप्त किया है उससे सबसे ज्यादा नुकसान अनपढ़ और जाहिल लोग प्रभावित हुए हैं। वैसे भी भाजपा को पढाई लिखाई से लेना देना नहीं हैं।

अगर बच्चे और युवा पढ़ने लगेंगे तो उनकी पार्टी के झण्डे बैनर और दरी कौन बिछायेगा। लेकिन जो हालात अब हैं उसमें ये जाहिल व अनपढ़अंधभक्त इस बार काम नहीं आयेंगे ये भाजपा समझ गयी है। वो ये भी समझ गयी है कि बिकाऊ मीडिया पर प्रचार कराने का भी लाभ इस बार नहीं मिलने वाला है। क्यों कि गोदी मीडिया की असलियत जनता को समझ आ गयी है। इसलिये इस बार भाजपा और मोदी सरकार ने फौज को आगे सामने रख कर अपनी सरकार की उपलब्धियों का गुणगान करा रही है। यह पहला मौका है कि कोई सरकार अपनी खाल बचाने को सेना का इस्तेमाल कर रही है।
मोदी सरकार आगामी आम चुनाव को लेकर इतना ज्यादा सशंकित है कि वो हर संभव प्रयास कर रही है जिससे उसकी सत्ता में वापसी हो सके। पहले मीडिया फिर अदालतों पर काबिज होने का प्रयास उसके बाद संविधान पर हमला। लेकिन कुछ ईमानदार और दृढ़ निश्चिय वाले जजों के कारण सत्ताधारी दल की दाल गल नहीं सकी। उसके बाद सेना को सत्ता की योजनाओं का प्रचार प्रसार में झोंकने की साजिश की गयी। इससे भी मन नहीं भरा तो अब देश को चलाने वाले आईएएस अफसरों को सत्ता की चाकरी मे लगा दिया गया है। पीएम मोदी और सरकार को सत्ता जाने की डर इस कदर सताने लगा है कि वो किसी भी तरह इसे खोना नही चाहती है। इस लिये विकसित भारत जन कल्याण यात्रा का आयोजन किया गया है इसके संचालन की जिम्मेदारी डीएम, कलैक्टर, एसडीएम, तहसीलदार और डिप्टी सचिवों को दी गयी है। मोदी सरकार की उपलब्ध्यिो के साथ इस यात्रा में लोगों को यह बताना है कि देश अब विकसित देशों की श्रेणी में आ गया है। देश में अब कोई गरीब नहीं है किसी को काम की जरूरत नहीं है क्यों कि देश पांच ट्रिलियन इकोनामि के करीब पहुंचने वाला है। इन सब बातों को देश के आईएएस अफसर पूरे देश में घूम घूम कर जन जन तक पहुंचायेंगे। यानि अब सरकारी अफसर सत्ता के जरखरीद गुलाम होने वाले हैं। इतिहास में यह पहली बार हो रहा है कि ब्यूरोक्रेट्स अब राजनीतिक मुद्दों पर सत्ता के साथ कदम ताल करने वाले हैं।

इंडिया गठबंधन का खौफ से पीएम डरे
पिछले पांच छह माह से बीजेपी और पीएम एकजुट होते इंडिया गठबंधन से इतना घबरा गये हैं कि देश की जनता को यह बताना चाह रहे हैं कि देश में सिर्फ भाजपा और पीएम मोदी ही कल्याण कर सकते हैं। पिछले नौ साल के अंदर मोदी सरकार ने कौन सी योजनाएं चलायी हैं उसका कितना लाभ कागजों पर दिखाया जा रहा है उसे जनता को बताया जायेगा। भले ही जनता को किसी भी जन कल्याण योजना का लाभ मिला हो या नहीं। इस जन कल्याण यात्रा का उद्देश्य सिर्फ मोदी सरकार की अच्छाइयों को जन जन तक पहुंचाना है। उन्हें इस बात से कोई मतलब नहीं कि भारत की जीडीपी किस हद तक गिर चुकी है। विश्व हंगर इन्डेक्स में भारत का नंबर भले ही 111वां हो। उन्हें भारत को संपन्न और खुशहाल ही बताना है। भले ही देश का युवा बेरोजगारी से बदहाल है लेकिन यात्रा संचालकों को सब चंगा सी ही दिखाना है। जिस देश में किसान अपनी मांगों को लेकर साल भर तक धरना प्रदर्शन करते रहे इसके चलते सात सौ से अधिक किसानों की जान गयी। लेकिन देश के पीएम के मुंह से एक शब्द शोक में नहीं निकले ऐसे में मोदी सरकार के कानों पर जूं नहीं रेंगी। लेकिन अब जनता इस बात को समझ गयी है कि उसे मंदिर धर्म और हिन्दू मुस्लिम के अलावा अच्छा स्वास्थ्य और अच्छी शिक्षा और बच्चों को रोजगार भी चाहिये। ऐसे मेंं मोदी सरकार ने यह फैसला किया है अब पार्टी वर्कर्स के जिम्मे प्रचार न करवा कर ऐसे लोगों से प्रचार करवाया जाये जिसके प्रति जनता को अभी भी सम्मान और श्रद्धा है इसलिये फौज को सामने कर उनका इस्तेमाल सत्ता कब्जा करने की साजिश रची जा रही है।








