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By Pawan Singh, Journalist writer

अपना देश तेजी से बदल रहा है।‌ फुलटास झक्कास टाइप से।‌ मतलब यहां कुछ भी हो सकता है।‌ कुछ भी छपवा लो, दिखवा लो, चलवा लो, कहलवा लो, कह दो…मतलब अपन पब्लिसिटी में इतने माहिर हो चुके हैं कि लंगोट दिखा के रूमाल बेंच लें….सब कुछ हवा में चल रहा है….हवा में साहेब….हवा में रिजर्व बैंक…हवा में नौकरियां…हवा में मेडिकल सुविधाएं…हवा में वैक्सीन….हवा में बैंक…हवा में पेट्रोल…हवा में सरसों का तेल, हवा में सीमाएं (ससुरा तुर्की जैसा टपोरी भी पीओके में घुस गया)….आम आदमी के साथ तमाम भक्त भी एक अदद हवा न मिलने के कारण हवा-हवाई हो लिए….फिर भी हवा में हवाई हांकते भक्त…कुल मिलाकर देश हवा-हवाई हो गया है….कुछ दिन पहले देश के दो बड़े बिजनेस अखबारों में पहले पन्ने पर विज्ञापन छपा। विज्ञापन इतना हैवी था कि अखबार उठाने में चार आदमी लगे। हालांकि, भक्तों को पढ़ने लिखने से कोई मतलब नहीं रहता है वो वाट्सअप विश्वविद्यालय से “नेजल स्प्रे” करके काम चला लिया करते हैं लेकिन कुछ भक्त पढ़ भी लेते हैं। अभी थोड़ी देर‌ पहले एक भक्त ने फोन किया कि देश में एक कंपनी ऐसी आ रही है कि एक साथ लाखों नौकरियां निकलेंगी। सब साहेब की लीला है …मैं सोच में पड़ गया कि साहेब अब क्या लील गये मतलब लीप गये….मैंने इस खबर की पड़ताल की और BBC की वेबसाइट तक पहुंच गया। किस्सा कुछ यूं है आप भी पढ़िए कि BBC‌ ने कैसे हवाबाजी की हवा निकाल दी…..

आर्थिक मामलों पर जानकारी देने वाले भारत के सबसे बड़े अख़बार ‘द इकोनॉमिक टाइम्स’ और जानेमाने अख़बार ‘टाइम्स ऑफ़ इंडिया’ में पिछले सोमवार को पहले पन्ने पर छपा एक ग़ैर-मामूली इश्तेहार कई तरह से सनसनीखेज़ और चौंकाने वाला था। यह विज्ञापन सीधे देश के प्रधानमंत्री को संबोधित था जिसमें विज्ञापन देने वाली कंपनी ने कहा कि वह भारत में 500 अरब डॉलर का निवेश करना चाहती है। 500 अरब डॉलर यानी तक़रीबन 36 लाख करोड़ रुपए। यह रकम कितनी बड़ी है इसे आप ऐसे समझ सकते हैं कि भारत में पिछले साल अमेरिका से कुल पूंजी निवेश सात अरब डॉलर था, यानी अकेली कंपनी जिसका नाम पहले कभी नहीं सुना गया वह भारत में कुल अमेरिकी निवेश से 71 गुना अधिक इनवेस्टमेंट अकेले करने की बात कर रही थी।‌पहले पन्ने पर लाखों रुपए ख़र्च करके विज्ञापन देने वाली कंपनी का नाम था–लैंडमस रिएलिटी वेंचर इंक. इस विज्ञापन के साथ लैंडमस ग्रुप के चेयरमैन प्रदीप कुमार एस का नाम दिया गया था। बहुत ही बड़ी रकम, सीधे प्रधानमंत्री को संबोधन और इश्तेहार के ज़रिए निवेश का प्रस्ताव, सब कुछ असामान्य था इसलिए बीबीसी ने इस विज्ञापन को जारी करने वाली कंपनी के बारे में पड़ताल की। बीबीसी ने सबसे पहले कंपनी की वेबसाइट https://landomus.com को चेक किया। सैकड़ों अरब डॉलर का निवेश करने का दावा करने वाली इस एक पन्ने की वेबसाइट पर वही बातें लिखी हुई हैं जो कंपनी ने अपने सोमवार के विज्ञापन में लिखा था।‌आम तौर पर मामूली कंपनियों की वेबसाइटों पर भी ‘अबाउट अस’ और कंपनी के कामकाज का पूरा ब्योरा होता है। साथ ही कंपनी किन क्षेत्रों में सक्रिय है, उसका पिछले सालों का प्रदर्शन कैसा रहा है, इस तरह की जानकारियाँ दी जाती हैं। न्यू जर्सी की गगनचुंबी इमारतों की तस्वीर को अपना कवर इमेज बनाने वाली इस वेबसाइट पर टीम के नाम पर कुल 10 लोगों की तस्वीर, नाम और पद तो लिखे हैं लेकिन उनके बारे में और कोई भी जानकारी नहीं दी गई है। साइट के मुताबिक़ कंपनी के डायरेक्टर और एडवाइज़र के नाम है- प्रदीप कुमार सत्यप्रकाश (चेयरमैन, सीईओ), ममता एचएन (डायरेक्टर), यशहास प्रदीप (डायरेक्टर), रक्षित गंगाधर (डायरेक्टर) और गुनाश्री प्रदीप कुमार। एडवाइज़डरों के नाम हैं पामेला किओ, प्रवीण ऑस्कर श्री, प्रवीन मुरलीधरण, एवीवी भास्कर और नवीन सज्जन।‌ कंपनी की वेबसाइट पर न्यू ज़र्सी, अमेरिका का एक पता दिया गया है लेकिन कोई फ़ोन नंबर नहीं दिया गया है। एक असमान्य बात ये भी है कि इसकी वेबसाइट पर कंपनी के किसी पुराने प्रोजेक्ट या विज़न जो आम तौर पर कंपनियों की वेबसाइट पर दिखता है ऐसी कोई जानकारी नहीं है।‌ मात्र अहम जानकारी जो इस वेबसाइट पर दी गई थी वो था अमेरिका के न्यू जर्सी राज्य का पता- लैंडमस रिएलिटी वेंचर इंक, 6453, रिवरसाइड स्टेशन बुलेवर्ड, सकॉकस, न्यू जर्सी 07094, अमेरिका। बीबीसी के सहयोगी संवाददाता इस पते पर पहुंचे और पाया कि इस पते पर एक रिहायशी बिल्डिंग थी, यहां लैंडमस रिएलिटी या क्या किसी भी कंपनी का कोई दफ्तर नहीं था। बीबीसी ने इस बिल्डिंग का डेटा रखने वाली महिला कर्मचारी से भी पूछा कि क्या इस पते पर लैंडमस रिएलिटी नाम का कोई ऑफ़िस रजिस्टर्ड है या अतीत में कभी भी रहा है. इसके जवाब में उन्होंने बताया कि यहां कोई ऑफिस कभी नहीं रहा है। हालांकि प्राइवेसी कारणों से उन्होंने ये नहीं बताया कि इस पते पर कौन रह रहा है और उनका नाम क्या है?

यहां एक बात तो साफ़ हो गई कि न्यू जर्सी के जिस पते का लैंडमस रिएलिटी वेंचर ने अपनी वेबसाइट पर इस्तेमाल किया है वहां उसका कोई ऑफ़िस नहीं है। बीबीसी ने वेबसाइट पर दिmodi with rahul

ए गए ईमेल एड्रेस पर सवालों की एक लिस्ट लैंडसम रिएलिटी वेंचर के नाम से भेजी थी, जिसका कंपनी के सीईओ प्रदीप कुमार सत्यप्रकाश ने एक बहुत छोटा-सा जवाब दिया है।‌ अपने जवाब में प्रदीप कुमार सत्यप्रकाश ने लिखा है, “हमने भारत सरकार (जीओआई) को अपने विवरण भेजे हैं और उनकी प्रतिक्रिया का इंतज़ार कर रहे हैं। जब हमें जवाब मिलेगा तो हम पूरा विववरण आपको फॉर्वर्ड करेंगे और सारी जानकारी भी सार्वजनिक करेंगे।”‌भारत सरकार ने इतने बड़े पूंजी निवेश के इस सार्वजनिक प्रस्ताव पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, न ही किसी तरह की कोई भी सरकारी घोषणा या टिप्पणी आई है। कंपनी के दफ़्तर के पते के बारे में पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए कंपनी के सीईओ ने लिखा है, “आपकी जानकारी के लिए, मैंने अमेरिका के न्यू जर्सी में किराये पर एक घर लिया है।” सैकड़ों अरब डॉलर के पूंजी निवेश करने का प्रस्ताव रखने वाली कंपनी का अपना कोई दफ़्तर नहीं है और वह एक रिहायशी पते को अपने कंपनी के दफ़्तर का पता बता रही है यह काफ़ी असामान्य बात है। मतलब ये भी हवा हवाई निकली……भक्त अब नौकरी हवाओं से निकलेंगी क्या?.News feature taken from Pawan Singh facebook wall.

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