हाइलाइट्स:

  • उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के कालापानी क्षेत्र की सीमा से लगा हुआ है छांगरु का इलाका
  • नेपाल के गृह मंत्री राम बहादुर थापा ने रखी नेपाली सशस्त्र पुलिस बल के बटालियन मुख्यालय की आधारशिला
  • शिलान्यास से पहले मंत्री थापा ने किया नेपाल के र्दाचुला जिले के टिंकर गांव का हवाई सर्वेक्षण

पिथौरागढ़
भारत से सीमा विवाद के बीच नेपाल कालापानी पर नजर रखने के लिए छांगरु इलाके में जवानों के लिए मकान बनाने जा रहा है। नेपाल के गृह मामलों के मंत्री राम बहादुर थापा ने शुक्रवार को उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के कालापानी क्षेत्र की सीमा से लगे छांगरु में नेपाली सशस्त्र पुलिस बल (APF) के लिए बटालियन मुख्यालय की आधारशिला रखी। इस दौरान थापा ने दार्चुला के तिंकर गांव का भी हवाई निरीक्षण किया।

सूत्रों के मुताबिक, नेपाल के मंत्री राम बहादुर थापा ने एक रात छांगरु इलाके में भी गुजारी। इसके दौरान उनके साथ सेना के जवान और एपीएफ अधिकारी भी थे। शनिवार को मंत्री ने नेपाल के दार्चुला जिले में एक संवाददाता सम्मेलन आयोजित किया। मीडियाकर्मियों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। यहां के स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान किए जाएंगे। हम रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र के विकास के लिए काम करेंगे और इसे व्यापार और पर्यटन हॉटस्पॉट के रूप में विकसित करेंगे।

10 करोड़ की लागत से बनेगी मल्टी यूटिलिटी बिल्डिंग

इस कार्यक्रम के दौरान थापा ने मीडियाकर्मियों से कहा था कि एक साल के भीतर 10 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से इस क्षेत्र में मल्टी यूटिलिटी बिल्डिंग का निर्माण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सीमा निरीक्षण पदों (बीओपी) के लिए एक स्थायी ढांचा भी छंगरु में बनाया जाएगा।

भारत और नेपाल के बीच क्या है कालापानी विवाद?

घाटीबाग-लिपुलेख सड़क के उद्घाटन के बाद बढ़ा विवाद
भारत और नेपाल के बीच मई में सीमा पर तनाव बढ़ने के बाद नेपाल दार्चुला, जौलजीबी, लाली, झूलाघाट, और पंचेश्वर क्षेत्रों में सीमा पर अपनी ओर से कई बीओपी का निर्माण पहले ही कर लिया है। इसके अलावा जब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 80 किलोमीटर लंबे घाटीबाग-लिपुलेख सड़क का उद्घाटन किया था। तब नेपाली सरकार ने दावा किया था कि वह सड़क उसके क्षेत्र से होकर गुजरती है। इसके बाद नेपाली संसद ने एक नक्शा भी जारी किया था जिसमें कालापानी, लिम्पियाधुरा और लिपुलेख को अपने क्षेत्र का हिस्सा दिखाया गया था।



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