लेग स्पिनर पीयूष चावला का कहना है कि वह इतने सालों के बाद एक बार फिर महेंद्र सिंह धोनी के साथ टीम बनाने के लिए उत्सुक हैं और यह इसलिए हुआ है क्योंकि चेन्नई सुपर किंग्स (सीएसके) के कप्तान का उन्हें समर्थन मिला है। पिछले साल दिसंबर 2019 में आईपीएल ऑक्शन के दौरान सीएसके ने पीयूष चावला को 6.75 करोड़ रुपये में खरीदा था। जबकि कई लोगों को लगा कि यह एक चौंकाने वाली राशि है। वहीं, फ्रेंचाइजी के सीईओ कासी विश्वनाथन ने संकेत दिया कि लेग स्पिनर को लाने के पीछे क्या आइडिया है। उन्होंने पहले कहा था कि हमारे लीडर जानते हैं कि उन्हें किसकी जरूरत है।

पीयूष चावला  इंडियनल प्रीमियर लीग (आईपीएल 2020) में सीएसके के कप्तान धोनी के साथ काम करने के लिए उत्साहित हैं, जो सभी आठ फ्रेंचाइजी के बीच सबसे मजबूत स्पिन हमलों में से एक है। आखिरी बार आठ साल पहले भारत के लिए खेलते हुए पीयूष चावला को नए गेंदबाजों ने रिप्लेस किया हो, लेकिन जहां तक आईपीएल की बात है तो वह इतने समझदार हैं कि उन्हें धोनी का समर्थन मिला है। ऐसे में उनका इरादा आईपीएल के इस सीजन में थ्रीलिंग एक्सपीरियेंस देने का है।

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पीयूष चावला ने फर्स्टपोस्ट को दिए एक इंटरव्यू में कहा, ”अगर कप्तान आपमें विश्वास करता है, और आपको इससे ज्यादा क्या चाहिए?” धोनी के साथ एक बार फिर से जुड़ने पर उन्होंने कहा, ”कोई भी लेग स्पिनर को चाहिए कि उनको अच्छा कप्तान मिले। और मुझे धोनी भाई मिले हैं, दुनिया के बेस्ट कप्तान, और क्या चाहिए।”

चेन्नई सुपर किंग्स के साथ जुड़ने से पहले पीयूष चावला ने छह सीजन कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) के साथ बिताए। इनमें से दो बार केकेआर आईपीएल चैंपियन बनी है। केकेआर के साथ चावला ने काफी सफलता हासिल की है। इस फ्रेंचाइजी के लिए खेलते हुए उन्होंने 70 मैचों में 62 विकेट हासिल किए हैं। गौतम गंभीर की कप्तानी से महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में आने में चावला को कोई खास फर्क नहीं लगता।

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उन्होंने कहा, ”धोनी भाई के साथ हमेशा जैसा ही है। वह गेंदबाज को स्वतंत्रता देते हैं, आप जो भी महसूस करते हैं, वह उसके साथ चलते हैं। वह हमेशा मदद करते हैं और जब उन्हें लगता कि ऐसा हो सकता है तो वह गेंदबाज को अपनी सलाह देते हैं कि ऐसा करते हैं। जब भी उन्हें लगता था कि गेंदबाज को खेल में कुछ चाहिए तो वह विकेट के पीछे से सलाह देते हैं। जो बहुत बड़ी मदद होती है।”

बता दें कि पीयूष चावला 2007 में टी20 विश्व कप और 2011 में एकदिवसीय विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम के सदस्य थे। उन्होंने भारत के लिए तीन टेस्ट, 25 वनडे और सात टी20 खेले है। उन्होंने दिसंबर 2012 में अपना आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच खेला था।





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