बीते साल इनीशियल पब्लिक ऑफरिंग यानी आईपीओ के जरिए रिटेल निवेशकों ने खूब कमाई की। पारस डिफेंस एंड स्पेस टेक्नोलॉजीज और लैटेंट व्यू एनालिटिक्स जैसे कुछ आईपीओ ने तो लिस्टिंग के दिन ही रिटेल निवेशकों को मालामाल कर दिया। हालांकि, 2022 में ये ट्रेंड बदलता हुआ दिख रहा है।
दरअसल, इस साल के जनवरी महीने में मुख्य तौर पर दो आईपीओ लॉन्च हुए। पहला आईपीओ एजीएस ट्रांजैक्ट टेक्नोलॉजीज (AGS Transact) का था। इस आईपीओ की लिस्टिंग के दिन उन निवेशकों को काफी निराशा हुई, जिन्हें अलॉट हुआ था। लिस्टिंग के दिन ही कंपनी के शेयर नुकसान में बंद हुए। लिस्टिंग के कुछ दिन बाद 3 फरवरी को भी कंपनी का शेयर भाव अपर प्राइस बैंड से नीचे कारोबार कर रहा है। कंपनी के इश्यू का प्राइस बैंड 166-175 रुपये था, जबकि वर्तमान में शेयर का भाव 167 रुपए है। अब तक का उच्चतम स्तर 181.85 रुपए है, जो बताता है कि इस स्तर के बावजूद रिटेल निवेशकों को बहुत सरप्राइज करने वाला मुनाफा नहीं हुआ है।
अडानी विल्मर के संकेत: जनवरी के आखिरी सप्ताह में गौतम अडानी की कंपनी अडानी विल्मर के आईपीओ की लॉन्चिंग हुई थी। इस आईपीओ की ग्रे मार्केट प्रीमियम यानी जीएमपी निवेशकों को बहुत उत्साहित नहीं कर रहा है। अडानी विल्मर आईपीओ का जीएमपी 45 रुपये है। इस आईपीओ की लिस्टिंग 8 फरवरी को होने की उम्मीद है। शेयर बाजार के जानकारों के मुताबिक लिस्टिंग के दिन तक जीएमपी में गिरावट होने की आशंका है। अगर ऐसा होता है तो रिटेल निवेशकों के लिए ये बुरी खबर है।
वेदांत फैशंस की कैसी शुरुआत: फैशन की चर्चित मान्यवर ब्रांड की पेरेंट कंपनी वेदांत फैशंस लिमिटेड का आईपीओ 4 फरवरी यानी कल लॉन्च हो रहा है। इस आईपीओ के ग्रे मार्केट प्रीमियम यानी जीएमपी में बड़ी गिरावट आई है। कुछ दिन पहले तक 100 रुपए से ज्यादा रहने वाला जीएमपी अब 45 रुपए के स्तर पर है। इस कंपनी को निवेशकों से कैसा रिस्पॉन्स मिलता है, ये देखना अहम है।
GMP बड़ा फैक्टर : किसी भी आईपीओ का मिजाज तय करने में जीएमपी एक बड़ा फैक्टर होता है। ग्रे मार्केट प्रीमियम बेहतर होने की स्थिति में ये माना जाता है कि आईपीओ की लिस्टिंग शानदार होगी। वहीं, जीएमपी कम होने पर लिस्टिंग को लेकर तमाम तरह की आशंकाएं बनी रहती हैं।
सुस्ती की वजह: आईपीओ मार्केट में सुस्ती की बड़ी वजह शेयर बाजार में बिकवाली है। जनवरी के आखिरी 15 दिन भारतीय शेयर बाजार के लिए ठीक नहीं रहे। इस दौरान विदेशी निवेशकों ने बाजार से खूब पैसे निकाले, जिसका असर आईपीओ बाजार पर भी पड़ा है। एक सच ये भी है कि बीते साल पेटीएम के आईपीओ का बुरा हश्र होने के बाद निवेशकों के बीच डर भी बना हुआ है। इसके बाद कोई भी ऐसा आईपीओ नहीं रहा, जिसने लिस्टिंग के दिन या उस सप्ताह में निवेशकों को मुनाफा दिया हो।







