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चाहे जितना जोर लगा लो, बाबा तो गयो। यूपी में दो चरण के मतदान हो चुका है। दोनों चरणों में बीजेपी के दुर्दिनों की शुरुआत बता रहे हैं। इस पर भी बीजेपी के नेता और मंत्रीगण झूठ दर झूठ बोल रहे हैं। केशव प्रसाद योगी सरकार आने के लिये ट्वीट पर ट्वीट कर लोगों को बरगलाने का काम करे है। वहीं योगी भी यह कह रहे हैं कि उन्होंने कभी जाति को 20 नहीं माना। भाजपा की कसमसाहट बता रही है कि योगी मोदी और शाह की जालिम सरकार जा रही है।
यूपी विधानसभा के प्रथम चरण के मतदान के समय पीएम मोदी का एएनआई न्यूज एजेंसी ने इंटरव्यू किया उसे लगभग सभी चाटुकार टीवी चैनलों ने प्रमुखता से चलाया। योगी ने तो ठीक मतदान से पहले टीवी इंटरव्यू दिया। जब कि ऐसा करना आचार संहिता का सीधा उल्लंघन था। लेकिन बेचार चुनाव आयोग कुछ भी नहीं कर सका। क्योंकि मोदी सरकार उनकी माई बाप है। वैसे भी मोदी सरकार ने चुनाव के ऐलान से पहले यूपी के ही बीजेपी के पिट्ठू तीन रिटायर्ड प्रशासनिक अफसरों को चुनाव आयोग की बागडोर थमा दी थी। इससे साफ जाहिर हुआ कि चुनाव आयोग के आयुक्तों की नियुक्ति यूपी विधान सभा चुनाव को देखते हुए की गयी थी। चुनाव हारता देख बीजेपी कार्यकर्ता लोगों को धमकाते फिर रहे हैं कि योगी के खिलाफ वोट किया तो बख्शा नहीं जायेगा। ऐसे इलाकों की लिस्ट बनायी गयी है जहां बीजेपी के विरोधी मतदाता है। बाद में उनसा निपटा जायेगा।
यह भी देखा गया है कि भारी संख्या में लोगों के नाम वोटर लिस्ट से गायब हैं। लोग वो देने के लिये अपने बूथ पर पहुंचे लेकिन उन्हें यह कह कर वोट नहीं डालने दिया गया कि आपका लिस्ट में नाम नहीं है। लोगों का कहना है कि वो पिछले 20 साल से अपने मत का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके लिये न तो चुनाव आयोग जिममेदारी ले रहा है और न प्रशासनिक अफसर। यह भी देखने में आया कि बूथ पर ईवीएम खराब होने की शिकायत आयी। यह सारी व्यवस्था की जिम्मेदारी चुनाव आयोग और लोकल प्रशासन की होती है। दोनों ने ही हाथ खड़े कर दिये हैं।








