दिल्ली में भाजपा की जीत हो पायेगी
दिल्ली विधानसभा चुनाव के करीब आता देख भाजपा पूरी तरह से दिल्ली सत्ता पर काबिज होने को सक्रिय हो गयी है। चुनाव के ठीक पहले उसने आम आदमी पार्टी के विधायक और सरकार में मंत्री कैलाश गहलौत पर निशाना साधा और उन्हे अपने पाले में खींच लिया। 17 नवंबर को कैलाश गहलात आम आदमी पार्टी और केजरीवाल पर गंभीरअरोप लगाते हुए मंत्री पद से इस्तीफा देते हुए पार्टी की सदस्यता भी छोड़ देते हैं औ अगले दिन ही भाजपा का दामन थाम लेते हैं। वहीं दूसरी तरफ आप सांसद संजय सिंह भाजपा पर आरोप लगाते हैं कि चुनाव जीतने के लिये भाजपा और अमित शाह एजेंसियों पर दबाव बना कर आप सरकार के मंत्रियों और विधायकों को पार्टी छोड़ने पर मजबूर कर रहे हैं। पिछले एक साल में लगभग एक दर्जन से अधिक विधायकों मंत्रियों और नेताओं ने पार्टी को छोड़ा है। बहुत कम लोग ही ईडी सीबीआई जांच एजेंसियों का दबाव नहीं झेल पाते हैं। लोग कमजोर कड़ी सबित होते हैं। पिछले तीन बार से भाजपा को आम आदमी पार्टी ने धूल चटायी है। ये बात भाजपा को पच नहीं रही है। आम आदमी पार्टी को कमजोर करने के लिये कन्द्र भाजपा के इशारे पर सीएम केजरीवाल, मनीष सिसोदिया सतेंद्र जैन सांसद संजय सिंह को ईडी और सीबीआई ने फर्जी केस बना कर जेल के अंदर डाल दिया गया। केन्द्र के इशारे पर ईडी और सीबीआई बेल न होने के सारे पैंतरे आजमाती है। सतेंद्र जैन को लगभग ढाई साल बाद स्वास्थ्य के नाम पर बेल मिलती है। 18 माह बाद मनीष सिसोदिया को बेल देने को सुप्रीम केार्ट देने पर मजबूर हो गया। ऐसा ही कुछ अरविंद केजरीवाल के साथ्ज्ञ किया गया। सुप्रीमकोर्ट ने कहा कि शराब कांड केस में जांच एजेंसी आरोपियों के खिलाफ कोई भी पुख्ता सुबूत पेश नहीं कर सकी हैं। ऐसे तो केस फाइनल होते होते बीस पच्चीस साल लग जायेंगे। क्या आरोपियों को तब तक जेल मे रखा जायेगा। उन्हें बेल तो देनी होगी।

केजरीवाल पर दस सवालों के जरिये काफी हमले किये

ताजा मामला दिल्ली सरकार के मंत्री कैलाश गहलौत जो कि केजरीवाल के काफी खास माने जाते थे उन्होंने भी मंत्री पद छोड़ते हुए पार्टी की सदस्यता को छोड़ दिया। भाजपा का इतना दबाव था कि अगले दिन ही भाजपा की शरण में चले गये। इसी साल मार्च में ईडी सीबीआई ने उन्हें पूछताछ के लिये कई बार बुलाया। शायद गहलोत जांएजेंसियों की पूछताछ से घबरा कर अपनी पार्टी छोड़ने पर मजबूा हो गये और वहां से किनारा कर भाजपा का दामन थाम लिया। वैसे भाजपा में शामिल होते समय कैलाश गहलौत ने यह कहा कि वो कोई भी काम दबाव में आकर नहीं करते हैं। आम आदमी पार्टी छोड़ने से पहले उन्होंने केजरीवाल पर दस सवालों के जरिये काफी हमले किये। लोग कहते हैं कि कैलाश गहलसैत का मन अगस्त माह से ही उचट गया था जब कि केजरीवाल ने 15 अगस्त दिन झण्डा रोहण के लिये आतिशी सिंह को नाम घोषित किया था। जबकि एलजी की ओर से परिवहन मंत्री कैलाश गहलौत का नाम सुझाया था। उसी दिन से कैलाश गहलौत ने पार्टी छोडने का बना लिया था।
राजकुमार आनंद भी भाजपा में शामिल हुए
पूर्व दिल्ली सरकार में मंत्री राजकुमार आनंद भी अचानक मंत्री पद से इस्तीफा देते हैं और भाजपा के कमल को थाम लेते है। चर्चा रही कि अचानक ईडी सीबीआई के रडार पर राजकुमार अस गये। रोज रोज जांच एजेसियों केि बुलावे से राजकुमार परेशान हो गये। यहां दिमाग से खेलते हुए सीधे भाजपा ने शामिल नहीं कराया पहले उन्हें बसपा में शामिल कराया। बसपा के टिकट पर उन्हें आम चुनाव आप विधायक सोमनाथ भारती ​के खिलाफ चुनाव में उतारा। इससे आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार जीतते हुए हार हो गयी। बीजेपी नेता बांसुरी स्वराज आसानी से चुनाव जीत गयी।
राज्यसभा सांसद स्वातिमालिवाल भी बागी हुई

परिवहन मंत्री कैलाश गह​लौत भी बीजेपी में गये
ताजा मामला दिल्ली सरकार के मंत्री कैलाश गहलौत जो कि केजरीवाल के काफी खास माने जाते थे उन्होंने भी मंत्री पद छोड़ते हुए पार्टी की सदस्यता को छोड़ दिया। भाजपा का इतना दबाव था कि अगले दिन ही भाजपा की शरण में चले गये। इसी साल मार्च में ईडी सीबीआई ने उन्हें पूछताछ के लिये कई बार बुलाया। शायद गहलोत जांएजेंसियों की पूछताछ से घबरा कर अपनी पार्टी छोड़ने पर मजबूा हो गये और वहां से किनारा कर भाजपा का दामन थाम लिया। वैसे भाजपा में शामिल होते समय कैलाश गहलौत ने यह कहा कि वो कोई भी काम दबाव में आकर नहीं करते हैं। आम आदमी पार्टी छोड़ने से पहले उन्होंने केजरीवाल पर दस सवालों के जरिये काफी हमले किये। लोग कहते हैं कि कैलाश गहलसैत का मन अगस्त माह से ही उचट गया था जब कि केजरीवाल ने 15 अगस्त दिन झण्डा रोहण के लिये आतिशी सिंह को नाम घोषित किया था। जबकि एलजी की ओर से परिवहन मंत्री कैलाश गहलौत का नाम सुझाया था। उसी दिन से कैलाश गहलौत ने पार्टी छोडने का बना लिया था
राजकुमार आनंद भी भाजपा में शामिल हुए
पूर्व दिल्ली सरकार में मंत्री राजकुमार आनंद भी अचानक मंत्री पद से इस्तीफा देते हैं और भाजपा के कमल को थाम लेते है। चर्चा रही कि अचानक ईडी सीबीआई के रडार पर राजकुमार अस गये। रोज रोज जांच एजेसियों केि बुलावे से राजकुमार परेशान हो गये। यहां दिमाग से खेलते हुए सीधे भाजपा ने शामिल नहीं कराया पहले उन्हें बसपा में शामिल कराया। बसपा के टिकट पर उन्हें आम चुनाव आप विधायक सोमनाथ भारती ​के खिलाफ चुनाव में उतारा। इससे आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार जीतते हुए हार हो गयी। बीजेपी नेता बांसुरी स्वराज आसानी से चुनाव जीत गयी।
राज्यसभा सांसद स्वातिमालिवाल भी बागी हुईं
राज्य सभा सदस्य व पूर्व दिल्ली महिला आयोग अध्यक्ष स्वाति मालिवाल ने अपना राजनीतिक सफर आम आदमी पार्टी के साथ दस साल पहले शरुआत की थी। आप सरकार बनने के बाद मालिवाल को दिल्ली महिला आयोग का अध्यक्ष बनाया गया। पार्टी में उनकी छवि कर्मठ व जुझारू नेता के रूप में थी। वो केजरीवाल की काफी करीबी मानी जाती थीं। यही वजह रही कि पार्टी ने उन्​हें राज्यसभा का सदस्य बनाया था। लेकिन इसी साल जब केजरीवाल के ​कुछ दिनों के लिये बेल मिली थी तो मालिवाल केजरीवाल से मिलने उनके सरकारी आवास पर गयीं। वहां जाने क्रया हुआ कि स्वाति मालिवाल ने विभव कुमार पर मारपीट और अभद्रता का आरोप लगाया इसके साथ पुलिस में एफआई आर भी करा दी। दिल्ली पुलिस ने भी शिकायत पर विभव कुमार को जेल भेज दिया। लेकिन बाद में उन्हें बेल मिल गयी। आजकल दिल्ली सरकार और केजरीवाल पर जम कर हमलावर हैं। लोगों का मानना है कि वो किसी भी समय में भाजपा का दामन थाम सकती हैं क्योकि वो बीजेपी के इशारों पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल हैंं। अक्सर सरकार के खिलाफ वीडियो जारी कर सरकार की बखिया उधेड़ने में जुटी हैं।

 

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