#BJP#IndianPolitics# InvestigativeAgencies# OppositionPoliticins#MahaPolitics# WEstBengal# OunjabPolitics#
पिछले दो एक साल से ईडी विपक्ष के नेताओं पर कुछ ज्यादा ही सक्रिय है। ताजा हालात में दिल्ली के हेल्थ मिनिस्टर सतेंद्र जैन को हवाला घोटाले के आरोप में ईडी ने गिरफतार किया है। श्री जैन नौ जून तक ईडी की गिरफ्तारी में हैं। सतेंनद्र जैन की गिरफ्तारी से आम आदमी पार्टी बीजेपी पर हमलावर है। पार्टी संयोजक केजरीवाल ने मोदी सरकार पर आरोप लगया है कि सतेंद्र जैन की गिरफ्तारी के पीछे हिमाचल विधानसभा का चुनाव है जहां के प्रभारी सतेंद्र जैन हैं। हिमाचल मेे बीजेपी की सरकार है उसे बरकारर रखने के लिये बीजेपी ने आम आदमी पार्टी को परेशान करने के लिये नेताओं के खिलाफ फर्जी केस बनाना शुरू कर दिया है। सीएम केजरीवाल ने तो यह भी आरोप लगाया है कि बीजेपी सरकार सतेंद्र जैन के बाद डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया पर भी झूठे केस बनाने की साजिश रचने जा रही है।
उधर बीजेपी का कहना है कि एजेंसियां किसी के इशारे पर नहीं बल्कि शिकायतों के आधार पर कार्रवाई कर रही हैं। ईडी ने कांग्रेस नेता और सांसद सोनिया गांधी व राहुल गांधी को नेशनल हेरल्ड केस में नोटिस भेजा है। इससे कांग्रेस ने भी भाजपा और मोदी सरकार पर राजनीतिक दुश्मनी निकालने की बात कही है। ये देखा जा रहा है कि जब भी किसी प्रदेश में चुनाव होते हैं ईडी, सीबीआई और इनकम टैक्स डिपार्टमेंट विपक्षी दलों के नेताओं पर छापेमारी शुरू कर देती हैं। इससे विपक्षी दल के नेता इन टीमों के छापों के कारण बैकफुट पर आ जाते हैं चुनाव प्रचार में पीछे रह जाते है। इसके साथ मानसिक प्रताड़ना अलग से झेलते हैं। जनता में यह संदेश जाता है कि कुछ तो गलत किया होगा जिस कारण उनके घरों पर ईडी, सीबीआई और इनकम टैक्स की रेड हो रही है। पाक साफ होने के बाद भी उन्हें सबको अपनी इमानदारी का सुबूत पेश करना पड़ता है। यह धारणा बन गयी है जो राजनीतिक दल या नेता मोदी सरकार की आलोचना या विरोध में बयानबाजी करता है तो उन पर केन्द्र के इशारे पर ईडी, सीबीआई और आयकर विभाग के छापे पड़ना शुरू हो जाते हैं। यूपी में चुनाव के दौरान एक गुटखा बनाने वाले कारोबारी के घर और कार्यालय पर छापे मार कर लगभग दो सौ करोड़ की बेनामी संपत्ति ईडी ने बरामद की थी। लेकिन बाद में पता चला कि छापा किसी और जैन का यहां पड़ना था गल्ती से इनके घर गोदाम पर पड़ गये थे। बाद में यह मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
दिल्ली के हेल्थ मिनिस्टर सतेंद्र जैंन पर पिछले आठ साल से ईडी और सीबीआई ने जाच शुरू की थी। लेकिन ईडी केवल जांच के नाम पर जैन को बुला कर जांच करने की खानापूरी कर रहा है। सबसे ज्यादा दिलचस्प बात यह है कि यह सब ठीक चुनाव के आसपास ही शुरू होता है।पंजाब चुनाव के समय उस वक्त के सीएम चरण जीत सिंह चन्नी के भतीजे पर ईडी औ सीबीआई ने छापे मारी की थी। पंश्चिम बंगाल में चुनाव के समय ममता बनर्जी के भतीजे व टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी और उनकी पत्नी रुजिरा बनर्जी को समन किये गये थे। आज भी ईडी की अभिषेक बनर्जी की जांच के मकड़ जाल से नहीं निकल पाये हैं।
ईडी आई टी और सीबीआई सबसे महाराष्ट्र में सक्रिय रही है। जब से यहां शिवसेना एनसीपी और कांग्रेस की साझा सरकार बनी है तब से उपरोक्त सभी एजेंसियां एनसीपी के नेताओं और मंत्रियो पर अपनी वक्र दृष्टि बनाये हुए है। सबसे पहले एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार को ईडी ने समन भेजा जिस पर पवार ने कहा कि मैं ईडी के कार्यालय में जा कर हाजिरी दूंगा। बाद में ईडी के अफसरो उनसे अनुरोध किया कि वो कार्यालय न आयें। ईडी जान गया कि पवार के नाराजगी का नतीजे उनके आकाओं को भारी पड़ सकता है क्यों कि महाराष्ट्र में एनसीपी और शरद पवार का बोलबाता है। इसके बाद ईडी के निशाने पर सरकार के कई मंत्री अब भी निशाने पर हैं। पूर्व गृहमंत्री अनिल देश मुख नवाब मलिक और अजित पवार सरकारी जांच एजेंसियों के राडार पर हैं।








