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पिछले कई माह से सुप्रीमकोर्ट का रवैया काफी ढुलमुल सा दिख रहा है। पहले ऐसा लग रहा था कि सुप्रीमकोर्ट केन्द्र की मोदी सरकार के दबाव से मुक्त है। एससी के फैसलों से सरकार को काफी दिक्कतें हो रही थीं। लेकिन कुछ माह से ऐसा लग रहा है कि सुप्रीमकोर्ट भी मोदी सरकार का काफी दबाव महसूस कर रही है। सुप्रीम कोर्ट ने कई गंभीर मामलों में सुनवायी की लेकिन फैसले सुरक्षित रख लिये। अब ऐसा लग रहा है कि केन्द सरकार की तरह सुप्रीमकोर्ट को भी 3 दिसंबर का इंतजार है। उस दिन पांच प्रदेशों के विधानसभा चुनावों का परिणाम घोषित होगा। सुप्रीमकोर्ट ने अडाणी ग्रुप के वित्तीय घोटालों की सुनवायी करते हुए फैसला सुरक्षित रख लिया है। इसी तरह इलैक्टोरल बांड की सुनवायी करते हुए चुनाव आयोग पूरा विवरण सौंपने को दो हफ्ते का समय दिया है। यहां भी अप्रत्यक्ष रूप से मोदी सरकार को मनमानी करने का मौका दे दिया है। सरकार की बेशरमी देखिये कि सुप्रीम कोर्ट के रुख को भांपते हुए 6 से 20 नवंबर तक चुनावी बांड की बिक्री शुरू करने का आदेश दे दिया है। इस साल की शुरुआत में सुप्रीमकोर्ट के रवैये से लग रहा था कि अब आम जनता और विपक्ष के नेताओं को राहत मिलेगी। लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि सुप्रीमकोर्ट भी सरकार के दबाव में आ गया है।

मणिपुर मामले में सुपीम कोर्ट का ढीला रवैया
जुलाई में सुप्रीमकोर्ट ने मणिपुर महिला यौन उत्पीड़न मामले में जब स्वत: संज्ञान लेतेे हुए केन्द्र व प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया था। तो लगा दोनों सरकारों की लापरवाही पर सुप्रीम कोर्ट कोई सख्त फैसले लेगा लेकिन चार माह बाद भी सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा कोई फैसला नहीं लिया जिसस आम जनता को लगे सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर महिला यौन उत्पीड़न व हिंसा पीड़ितों के आंसू पोछने का काम किया है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ एक जांच कमेटी गठित करने का आदेश मात्र दिया है। जनता को लगा था कि सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद शायद केन्द्र और प्रदेश सरकार के रवैये में कोई बदलाव होगा। लेकिन ऐसा हुआ कुछ भी नहीं।
हिंडनबर्ग की रिपोर्ट पर सुप्रीमकोर्ट भी चुप
हिंडनबर्ग की अडाणी समूह के खिलाफ रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद मामला सुप्रीमकोर्ट में मामला पहुंचा तो लगा कि अडाणी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट कुछ सख्त कदम उठायेगा। लेकिन ऐसा कुछ हुआ नहीं बस सुप्रीमकोर्ट ने मामले की जांच कराने के आदेश सेबी को दिये। सेबी एक बार अडाणी ग्रुप के खिलाफ जांच कर उन्हें क्लीन चिट दे चुकी है। जब कि डीआरआई दस साल पहले अडाणी के खिलाफ सेबी को सारे सुबूत सौंपे और अडाणी समूह के खिलाफ जांच करने की मांग की थी। इस मामले में तत्काली सेबी चीफ यूके सिन्हा ने अडाणी ग्रुप को क्लीन चिट दे दी थी। दिलचस्प बात यह है कि यूके सिन्हा अडाणी ग्रप की मीडिया कंपनी एनडीटीवी में डाइरेक्टर हैं। इससे साफ जाहिर है कि अडाणी के फेवर में रिपोर्ट देने का ईनाम सिन्हा को दिया गया है। वैसे भी किसी अफसर को गौतम अडाणी की कंपनी के खिलाफ कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं है। कारण साफ है कि पीएम और गौतम अडाणी के रिश्ते जग जाहिर हैं। लोग तो यहां तक कहते हैं कि पीएम मोदी और शाह अडाणी के इशारों पर काम करते हैं।
इलैक्टोरेल बांड मामले में भी सुप्रीमकोर्ट ढीला पड़ा
ईलैक्टोरल बांड लाने की सलाह मोदी सरकार को पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली ने दी थी। इसके लिये 2017—18 में कानूनों में भी बदलाव किया गया था। चूकि इस के जरिये हर राजनीतिक दल का स्वार्थ छुपा था अत: किसी दल ने भी इसका विरोध नहीं किया। लेकिन इसका सबसे ज्यादा फायदा बीजेपी को हुआ। पिछहत्तर प्रतिशत इस बांड का हिस्सा भाजपा सरकार के हिस्से में गया। बाकी 25 फीसद हिस्सा अन्य राजनीतिक दलों के हुआ है। इस बांड के जरिये भाजपा को 5500 करोड़ की राशि मिली। इस मामले में सुनवायी करते हुए 3 नवंबर को सीजेआई ने चुनाव आयोग को यह आदेश दिया कि अब तक जो बांड खरीदा गया और राजनीतिक चंदा दिया गया है उसका विवरण 15 दिनों के भीतर अदालत में पेश किया जाये। सरकार की हिमाकत तो देखिये 3 तारीख के आदेश के दो दिन बाद ही सरकार ने चुनावी बांड की खरीदफरोख्त करने का ऐलान कर दिया। इस बात से साफ झलक रहा है कि मोदी सरकार को सुप्रीमकोर्ट की टिप्पणियों की कोई परवाह नहीं है।
आप नेताओं और मंत्रियों का मामला
पिछले एक डेढ़ साल से केन्द्री जांच एजेंसियों ईडी और सीबीआई ने बिना किसी ठोस सुबूत के आम आदमी पार्टी के नेताओं पूर्व मंत्रीसतेंद्र जैन,पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और सांसद संजय सिंह को जेल भेज रखा है। इन सबके खिलाफ किसी जांच एजेंसी को कोई ठोस सुबूत नहीं मिला है। इनकी जमानत हाईकोर्ट और सुप्रीमोर्ट से नहीं हो पा रही है। दिलचस्प यह है कि ईडी और सीबीआई के छापे और मुकदमे केवल विपक्ष के नेताओं के घर पर ही मारे जा रहे हैं। इनके निशाने पर कांग्रेस टीएमसी, राजेडी, शिवसेना और एनसीपी के नेता ही हैं। किसी भी भाजपा नेता के घर पर न तो सीबीआई जाती है और न ही ईडी की रेड होती है। ताजा मामला केन्द्रीय कृषि मंत्री के बेटे देवेंद्र सिंह तोमर की चंदा उगाही वाले वीडियो वायरल हो रहे हैं। लेकिन इस पर मोदी शाह और सरकार की चुप्पी लोगों को हैरान कर रही है। मोदी और बीजेपी हमेशा भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई की डींग हांकती है। लेकिन उनकी कथनी करनी जनता को फर्क नजर आने लगा है।

महाराष्ट्र सरकार की वैधता मामला भी लटका
पिछले एक साल से महाराष्ट्र सरकार की वैधता को लेकर बीजेपी शिंदे गुट सरकार पर संकट के बादल छाये हुए है। लेकिन आज तक असली शिवसेना मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ठोस कार्रवाई करने के आदेश नहीं दिये हैं। इस मामले में शिवसेना उद्धव ठाकरे ने सु्प्रीम कोर्ट में फरियाद कर रखी है। सुप्रीमकोर्ट मई में शिवसेना शिंदे गुट के 16 विधायकों की सदस्यता तय करने को विधानसभा स्पीकर राहुल नारवेकर को निर्देश दिये थे लेकिन उन्होंने अभी तक इस मामले पर कोई फैसला नहीं दिया है। राहुल नार्वेकर स्पीकर होने के साथ साथ भाजपा के विधायक भी हैं। शायद वही वजह है कि शिंदे गुट के विधायकों की सदस्यता पर फैसला नहीं किया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने तो तत्कालीन राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी की भूमिका पर ही सवाल उठाये थे। एससी ने कहा कि राज्यपाल ने अपने अधिकार क्षेत्र कर बाहर जा कर वर्तमान सरकार गठन करवाया है।







