6 हजार पगार, नोटबंदी में करोड़पति बना दुबे का ‘कैशियर’
हाइलाइट्स

  • विकास दुबे के कथित खजांची जय वाजपेई का खुल रहा है राज
  • 2018 में मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने एडीजी को लिखी थी चिट्ठी
  • चिट्ठी के बावजूद उस वक्त जय वाजपेई पर नहीं हुआ था ऐक्शन
  • मंत्री उपेंद्र तिवारी ने भी प्रमुख सचिव गृह को लिखी थी चिट्ठी

कानपुर

विकास दुबे के कथित फंड मैनेजर जय वाजपेई के मामले में रोज-रोज नई जानकारियां सामने आ रही हैं। अब पता चला है कि जय वाजपेई के खिलाफ कार्रवाई के लिए 2018 में यूपी सरकार के एक मंत्री ने खत लिखा था। लेकिन इसके बावजूद जय पर कोई ऐक्शन नहीं हुआ। विकास दुबे के एनकाउंटर के बाद जय वाजपेई फिलहाल पुलिस की गिरफ्त में है।

यूपी सरकार में श्रम मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने 2018 में कानपुर जोन के एडीजी को चिट्ठी लिखी थी। इसमें कन्नौज के एएसपी से कराई गई जांच के अलावा शिकायतकर्ता सौरभ भदौरिया की सुरक्षा दोबारा बहाल करने का अनुरोध किया गया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसी साल मंत्री उपेंद्र तिवारी ने मंत्री मौर्य की चिट्ठी को आधार बनाते हुए प्रमुख सचिव (गृह) को सौरभ को दोबारा सुरक्षा देने के लिए कहा गया था।

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ब्रह्मनगर के वकील सौरभ भदौरिया ने जय वाजपेई की कथित अवैध संपत्तियों, पासपोर्ट और शस्त्र लाइसेंस पर सवाल उठाते हुए 2017 में तत्कालीन आईजी को चिट्ठी दी थी। आईजी ने कन्नौज के एएसपी से मामले की जांच कराई थी। जांच रिपोर्ट में सौरभ के आरोप सही पाते हुए कहा गया था कि कार्रवाई की जाए। यह जांच रिपोर्ट 2018 में कानपुर के एसएसपी दफ्तर पहुंच गई थी, लेकिन ऐक्शन के लिए दूसरे विभागों को नहीं भेजा गया था। इस बीच 2018 में ही शिकायकर्ता सौरभ भदौरिया की सुरक्षा हटा ली गई थी।

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विकास दुबे का 'खजांची' जय बाजपेई बोला बेकसूर हूंविकास दुबे का ‘खजांची’ जय बाजपेई बोला बेकसूर हूं

सौरभ के शिकायती पत्र पर सितंबर-2018 में कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने एडीजी (कानपुर जोन) को लिखा था कि कन्नौज के एएसपी की जांच रिपोर्ट पर 4 महीने बाद भी कार्रवाई नहीं हुई। सौरभ की शिकायत पर जांच रिपोर्ट आने के बाद उसकी सुरक्षा भी हटा ली गई थी। केस में तुंरत कार्रवाई करते हुए सौरभ को दोबारा सुरक्षा दी जाए। इसी तरह मंत्री उपेंद्र तिवारी ने प्रमुख सचिव गृह को लिखी चिट्ठी में कहा था कि एडीजी कानपुर जोन से शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई। केस में तुरंत कार्रवाई करते हुए सौरभ को तुरंत सुरक्षा दी जाए। लेकिन प्रशासन उस वक्त चुप्पी साधे रहा और विकास के गुर्गे को संरक्षण मिलता रहा।

जय वाजपेई को विकास का फंड मैनेजर माना जाता है

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