बिहार विधानसभा के पिछले चुनावों की तुलना में नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू के लिए यह चुनाव थोड़ा महंगा साबित हो रहा है। इस बार जिन 115 सीटों पर जेडीयू ने उम्मीदवार उतारे थे, उनमें अब तक मात्र 43 सीटों पर यह पार्टी जीतती दिख रही है।
उधर, जेडीयू इस चुनाव में हाल के दिनों में सबसे कम उम्मीदवार जीता सकी है। इसके पहले 2005 के फरवरी के चुनाव में पार्टी को अब तक सबसे कम 55 सीटें मिली थीं। उस समय यह पार्टी 138 सीटों पर चुनाव लड़ी थी। लेकिन, उसके तुरंत बाद उसी अक्टूबर में हुए चुनाव में जदयू को 88 सीटें मिली थीं। उस समय दूसरी बार नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री बने थे। तब से आज तक हर चुनाव में उनकी पार्टी विरोधियों को मात देती रही और नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बनते रहे।
जेडीयू का वोट शेयर भी इस बार कम हो जाएगा, जबकि सीटों के मामले में पार्टी ने पिछले चुनाव से अधिक पर उम्मीदवार दिए थे। तब आरजेडी के साथ जेडीयू का गठबंधन था और 101 उम्मीदवारों में उसके 71 उम्मीदवार जीत गए थे। वोट भी उसको 16.83 प्रतिशत मिला था। वोटों की गिनती सीटों की संख्या के आधार पर करेंगे तो उस समय पार्टी को 40.65 प्रतिशत वोट मिले थे। उसके पहले वर्ष 2010 में जेडीयू का गठबंधन बीजेपी के साथ था और 141 सीटों पर उम्मीदवार देकर 115 को जीत दिलाई थी। तब वोट प्रतिशत भी 22.9 और सीटों के हिसाब से 38.7 प्रतिशत मिले थे।
वर्ष 2005 के अक्टूबर चुनाव में भी पार्टी 139 उम्मीदवार देकर 20.5 प्रतिशत वोट पाकर 88 उम्मीदवार जिताई थी। सीटों के हिसाब से उसे 37.17 प्रतिश्ता वोट मिले थे। इस बार पार्टी की सीटों की संख्या के साथ वोट की प्रतिशतता भी कम होने का अनुमान है।







