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जीवाजी विश्वविद्यालय में कुलगुरु अविनाश तिवारी को हटाकर कार्यपरिषद भी भंग, धारा 52 लागू
Jiwaji University: मामला ईओडब्ल्यू तक भी पहुंचा और 13 जनवरी 2025 को जेयू कुलगुरु प्रो. अविनाश तिवारी सहित 16 अन्य के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम में एफआइआर दर्ज की गई थी।
कुलगुरु प्रो. अविनाश तिवारी को पद से हटाया गया।
पिछले माह ईओडब्ल्यू में एफआईआर दर्ज हुई थी।
एक माह बाद राजभवन से बड़ी कार्रवाई की गई।
रीवा के पूर्व कुलगुरु आचार्य को सौंपा गया है प्रभार।
भ्रष्टाचार के आरोपों में लगातार विवादों में घिरे कुलगुरु प्रो.अविनाश तिवारी को पद से हटाते हुए जीवाजी विश्वविद्यालय में धारा 52 लागू कर दी गई है। समस्त कार्यपरिषद को भी भंग कर दिया गया है।
आगामी आदेश तक कुलगुरु पद की जिम्मेदारी अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय, रीवा के पूर्व कुलगुरु राजकुमार आचार्य को सौंप दी गई है, जो वर्तमान में महात्मा गांधी स्नातकोत्तर महाविद्यालय, करैली जिला नरसिंहपुर के प्राचार्य के पद पर काम कर रहे हैं। राज्यपाल और कुलाधिपति द्वारा मंगलवार को जारी इस आदेश से अब जीवाजी विश्वविद्यालय की संपूर्ण कमान और शक्तियां डा. आचार्य के हाथों में आ गई हैं।
छात्रवृत्ति घोटाले के खुलासा होने से मामला चर्चा में आया
दरअसल यह पूरा विवाद फर्जी दस्तावेज के आधार पर मुरैना की सबलगढ़ तहसील के झुंडपुरा गांव में 14 साल से शिवशक्ति कॉलेज को संबद्धता दिए जाने और कालेज में छात्रवृत्ति घोटाले के आरोप के साथ शुरू हुआ था। मामले में बीते एक वर्ष से लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।
मुरार में रहने वाले अरुण शर्मा ने आपत्ति दर्ज करवाते हुए कहा था कि जेयू से सांठगांठ कर उसके दस्तावेज शिवशक्ति कालेज के प्राचार्य के नाम पर उपयोग किए हैं। वहीं शिवशक्ति कालेज शुरुआत से ही सिर्फ दस्तावेज में ही चल रहा है।
आभार— सूत्र मीडिया संस्थान







