Vikas dubey kanpur case: कानपुर में हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे के घर दबिश देने गई टीम में शामिल रहे बिठूर थाने के एसओ कौशलेंद्र प्रताप ने बताया है कि आखिर इतने पुलिसकर्मी कैसे गोलियों का शिकार हुए और कई की जान चली गई।

Edited By Nilesh Mishra | नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated:

विकास दुबे मुठभेड़: घायल पुलिसकर्मी ने सुनाई घटना की आपबीती
हाइलाइट्स

  • कानपुर में विकास दुबे के घर घायल हुए एसओ कौशलेंद्र प्रताप ने बताई उस रात की कहानी
  • कौशलेंद्र ने कहा कि हमलवार ऊपर थे इसलिए पुलिस वाले आसानी से बन रहे थे निशाना
  • पहले राउंड की फायरिंग में ही आधे से ज्यादा पुलिसवालों को लग गई थी गोली

कानपुर

उत्तर प्रदेश के कानपुर में हुए घटनाक्रम में आठ पुलिसकर्मी शहीद हुए। कई पुलिसकर्मी घायल भी हुए हैं। बिठूर थाने के एसओ कौशलेंद्र प्रताप अस्पताल में इलाज करा रहे हैं। उन्होंने बताया है कि हमलावर ऐसी पोजिशन में थे कि पुलिसवाले उनको देख नहीं पा रहे थे। यही कारण था कि इतने पुलिसकर्मियों की जान चली गई। कौशलेंद्र प्रताप ने अपने दो साथियों को जान बचाई, जो गोली लगने से घायल हो गए थे।

बिठूर थाने के एसओ कौशलेंद्र ने बताया, ‘जिस दिन घटना हुई थी, उस दिन मुझे एसओ चौबेपुर ने सूचना दी थी कि एक दबिश पर चलना है। हम लोग दबिश के लिए अपने थाने लगभग 12:30 बजे निकल गए थे। हम वहां लगभग 1 बजे पहुंच गए थे। हमने वहां से लगभग डेढ़-दो सौ मीटर दूर ही अपनी गाड़ियां पार्क कर दी थीं। हम वहीं से पैदल गए हैं।’

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‘अचानक फायरिंग हुई आधे से ज्यादा लोग घायल हो गए’

एसओ कौशलेंद्र प्रताप ने आगे बताया, ‘गाड़ी पार्क करके हम पैदल जा ही रहे थे कि रास्ते में पहले से ही जेसीबी लगाकर रखी गई थी। वहां से एक-एक करके हम लोग जैसे ही उसके घर के पास पहुंचे, अचानक हम पर चारों ओर से फायरिंग होने लगी। अचानक हुई फायरिंग से बचने के लिए हमलोग आड़ लेकर छिपने लगे। हमने खुद को सुरक्षित करने के बाद फायरिंग की लेकिन हमें टार्गेट कहीं नजर नहीं आ रहे थे।’

​भेष बदलने में माहिर है विकास

  • ​भेष बदलने में माहिर है विकास

    विकास दुबे को अब यूपी के सभी 75 जिलों की पुलिस तलाश रही है। एक रात में ही विकास दुबे यूपी का मोस्ट वॉन्टेड अपराधी बन गया है। अपराध की दुनिया में तीन दशक तक वर्चस्व कायम रखने वाले शातिर विकास को पकड़ने में पुलिस को कड़ी मशक्कत करनी पड़ सकती है। जानकारों का कहना है कि विकास मोबाइल का इस्तेमाल नहीं करता है। ऐसे में यदि वह बिना मोबाइल कहीं चला गया तो उसे पकड़ना आसान नहीं होगा। दूसरी आशंका उसके भेष बदलने की है। विकास को जानने वाले कहते हैं कि वह भेष बदल किसी दूसरे प्रदेश में खेतों में मजदूरी या चने बेचने जैसे काम भी कर सकता है।

  • ​हर पार्टी में पहचान, राजनीति में खास रुचि

    विकास दुबे खुद भी राजनीति में सक्रिय था। 2015 में वह नगर पंचायत चुनाव भी जीता। स्थानीय नेता उसको संरक्षण भी देते रहे। एसपी, बीएसपी में रहने के बाद वह बीजेपी के भी आसपास मंडराता रहा था। सूत्रों के मुताबिक, विकास दुबे के नेताओं से लिंक का पता लगाने के लिए सीएम योगी ने निर्देश दिए हैं कि उन सभी नेताओं और अधिकारियों की लिस्ट तैयार की जाए, जो विकास दुबे को संरक्षण दे रहे थे।

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  • ​पार्टी में हर कोई पहुंचता था

    विकास दुबे की शख्सियत इस कदर मशहूर हो रही थी कि हर कोई उसके साथ नजर आना चाहता था। जानकारी के मुताबिक, विकास के घर होने वाली पार्टी में स्थानीय नेता से लेकर बड़े-बड़े सिलेब्रिटी तक पहुंचते थे। स्थानीय अधिकारी, वकील और अन्य प्रतिष्ठित लोग भी विकास की महफिल में शिरकत करते थे। इन्हीं के दम पर विकास दुबे का रौब और बन गया था।

  • ​आखिर कैसे बचता रहा विकास दुबे?

    अब विकास दुबे के मामले से ही समझ लीजिए। थाने में मारे गए संतोष शुक्ला के भाई मनोज शुक्ला कहते हैं कि उनके भाई की हत्या में पुलिस की कमजोर चार्जशीट और पुलिस वालों के बयानों से मुकरने के कारण वह बच निकला था। अब वही विकास पुलिस वालों की मौत का कारण बना। 2005 में वह शुक्ला हत्याकांड से बरी हो गया। तत्कालीन सरकार हाई कोर्ट भी नहीं गई क्योंकि तब उसे बीएसपी का संरक्षण था। स्थानीय लोग बताते हैं कि वह एक प्रिंसिपल की हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा के कारण जेल में था। आम चुनाव से पहले एक सत्तारूढ़ दल के नेता ने उसे जेल से बाहर निकलवाने में मदद की। वही मदद अब आठ पुलिस वालों की हत्या का कारण बनी।

  • मां ने कहा- मार डालो

    विकास की मां ने कहा, ‘अभी लड़के (पुलिसकर्मी) आए थे, उन्होंने हमें बताया कि विकास ने यह सब कर डाला। विकास को अब मार डालो। दूसरे की आत्मा दुखी की है, अब उसे भी मार देना चाहिए। विकास पहले ऐसा नहीं था। हमने इसे पीपीएन कॉलेज में पढ़ाया था। इसकी नौकरी लग रही थी एयरफोर्स में, फिर नेवी में। इसे गांव वालों और राजनीति ने बर्बाद कर डाला। पहले ये पांच साल जनता पार्टी में रहा क्योंकि हरि किशन उस पार्टी में था। फिर हरिकिशन बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) में आ गए तो यह भी आ गया। फिर यह पांच साल से समाजवादी पार्टी (एसपी) में था।’

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कौशलेंद्र आगे कहते हैं, ‘हम लोग नीचे थे और वे ऊपर, इसलिए वे हमें देख पा रहे थे लेकिन हम उन्हें नहीं देख पा रहे थे। पहले ही राउंड की फायरिंग में हमारे ज्यादातर लोग घायल हो गए थे। बड़ी मुश्किल से मैंने अपने साथ के दो लोगों- अजय सिंह और अजय कश्यप को बचाया। इन लोगों को गोली लग गई थी, इसलिए मैंने पहले इन्हें बचाना ज्यादा जरूरी समझा। हमारी बाकी टीम शांत बैठ गई थी, शायद यही कारण है कि इतनी कैजुअल्टी हुई।’

दूसरा कारण यह था कि हम टार्गेट को देख नहीं पा रहे थे और वे हमें अच्छे से देख रहे थे। हमारी जरा सी मूवमेंट पर वे फायरिंग कर दे रहे थे और हमारे लोग घायल होते रहे।

एनकाउंटर के दौरान घायल हुए थे एसओ कौशलेंद्र प्रताप

एनकाउंटर के दौरान घायल हुए थे एसओ कौशलेंद्र प्रताप

Web Title bithoor so kaushlendra pratap tells why police men died in kanpur incident(Hindi News from Navbharat Times , TIL Network)

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