समाजवादी पार्टी के प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने काशी विश्वनाथ कारीडोर के लोकार्पण से पहले दावा किया कि यह परियोजना उनकी सरकार में मंजूर हुई थी। उसके पास इसे साबित करने के लिए दस्तावेज हैं। इस परियोजना की शुरुआत अगर किसी ने की थी तो वह समाजवादी पार्टी की सरकार ही थी। इसकेे बाद योगी सरकार की ओर से बताया गया कि श्री काशी विश्वनाथ धाम के विकास को लेकर 2012 से 2017 के दौरान कैबिनेट में कोई चर्चा नहीं की गई। पूर्व की सपा सरकार के दौरान श्री काशी विश्वनाथ कॉरिडोर को लेकर प्रस्ताव पास होने का दावा पूर्णतः गलत है।

अखिलेश यादव ने रविवार को पत्रकार वार्ता की थी। उन्होंने कहा कि काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की शुरुआत अपने मुख्यमंत्रित्व काल में हुई थी। कैबिनेट की बैठक में यह प्रस्ताव मंजूर कराया गया था। सपा मुखिया ने कहा कि भाजपा महंगाई, बेरोजगारी जैसे  मुद्दों से जनता का ध्यान हटाने के लिए दूसरे मुद्दे उछाल रही है। 

 

योगी सरकार कैबिनेट की नौ बैठकें: 

श्री काशी विश्वनाथ मंदिर विस्तारीकरण एवं सौन्दर्यीकरण योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट था। इसे मूर्त रूप देने के लिए योगी सरकार कैबिनेट की 9 बैठकें अलग अलग समय पर कीं। इन्हीं बैठकों में परियोजना के विभिन्न चरणों को मंजूरी दिलाई गई। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के इस महत्वाकांक्षी परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कोई कसर नहीं छोड़ी। धर्मार्थ कार्य विभाग के माध्यम से इस योजना को जमीन उतारने की शुरुआत 19 जून 2018 को हुई कैबिनेट की बैठक से हुई। इसी बैठक में श्री काशी विशिष्ट क्षेत्र विकास प्राधिकरण वाराणसी अध्यादेश 2018 को मंजूरी दी गई, जिसके जरिए उसका नाम श्री काशी विश्वनाथ क्षेत्र विकास परिषद रखा गया। इसके बाद चार सितंबर 2018 को हुई कैबिनेट की बैठक में मंदिर विस्तारीकरण एवं सौन्दर्यीकरण योजना के तहत खरीदी जाने वाली भूमि व भवनों में सेवाइत संपत्तियों के विनिमय के लिए नीति का निर्धारण किया गया। इस पूरे प्रोजेक्ट को पूरा कराने में धर्मार्थ कार्य विभाग व गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव अवनीश अवस्थी की भी अहम भूमिका रही।

कैबिनेट ने मंदिर विस्तारीकरण एवं सौन्दर्यीकरण योजना के के द्वितीय चरण के लिए ड्राइंग व डिजाइन में वांछित परिवर्तन के लिए मंडलायुक्त वाराणसी की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित करने का फैसला किया। यह बैठक 29 जून 2020 को हुई थी। इसी तरह 25 जून 2021 को हुई कैबिनेट की बैठक में योजना के तहत भवन संख्या सीके-38/12, 13 व 14 को खरीदे जाने और जायदाद वक्फी प्लाट का विनिमय किए जाने का फैसला किया गया। 





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