लद्दाख सीमा पर चीन के साथ पिछले कुछ दिनों से चले आ रहे गतिरोध के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत के साथ आज बैठक में स्थिति की समीक्षा की। पीएम मोदी की बैठक से पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी जनरल रावत और तीनों सेनाओं के प्रमुखों के साथ बैठक में लद्दाख में चीन सीमा पर सुरक्षा की स्थिति की समीक्षा की।

सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री ने डोभाल, जनरल रावत और तीनों सेनाओं के प्रमुखों के साथ पिछले कुछ दिनों से लद्दाख में चीन से लगती सीमा पर दोनों सेनाओं के बीच उत्पन्न तनाव और इस बारे में सेना के रुख की जानकारी ली। ये दोनों बैठकें सेना के शीर्ष कमांडरों के बुधवार (27 मई) से शुरू होने वाले तीन दिन के सम्मेलन से पहले हुई हैं। इससे यह तय माना जा रहा है कि सैन्य कमांडरों के सम्मेलन में भी यह मुद्दा प्रमुख रूप से छाया रहेगा।

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दो दिन पहले ही लेह का दौरा कर लौटे सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने रक्षा मंत्री को वास्तविक नियंत्रण रेखा पर ताजा स्थिति से अवगत कराया। सिंह ने सेना द्वारा उठाए जा रहे कदमों और इस स्थिति से निपटने के लिए की जा रही तैयारियों की भी जानकारी ली। उल्लेखनीय है कि दोनों सेनाओं के बीच पेगांग झील क्षेत्र में गत 5 और 6 मई को हुई मामूली झड़प के बाद से दोनों ओर के सैन्य अधिकारियों की करीब पांच बैठकें हो चुकी हैं लेकिन स्थिति सामान्य नहीं हो सकी है।

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इस बीच दोनों देशों के विदेश मंत्रालयों के अधिकारी भी संपर्क बनाये हुए हैं लेकिन अभी तक दोनों पक्षों के बीच किसी तरह की सहमति नहीं बन पाई है। चीन दौलत बेग ओल्डी क्षेत्र में संपर्क के लिए भारत द्वारा बनायी जा रही सड़क का कड़ा विरोध कर रहा है, जबकि भारत का कहना है कि वह यह सड़क अपनी सीमा के भीतर बना रहा है और चीन को इस पर ऐतराज नहीं होना चाहिए। 





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