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आखिरकार केन्द्रीय गृहराज्य मंत्री अजय मिश्र के बेटे आशीष को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज ही दिया। 9 अक्टूबर को क्राइम ब्रांच की लखीमपुर शाखा में आशीष मिश्रा अपने वकील अवधेश सिंह व दो अन्य लीगल एडवाइजर के साथ सुबह 11 बजे पहुंचै। जहां एसआईटी के आलाधिकारी समेत डीआईजी उपेंद्र अग्रवाल ने 10 घंटे में 40 सवाल किये। आशीष ने बहुत से सवालों का जवाब नहीं दिया। आशीष्ज्ञ मिश्रा ने सवालो के जवाब देने के बजाय बरगलाने की कोशिश की।ं इससे नाराज अफसरों ने उन्हें मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया। वहां से ही उन्हें जेल भेज दिया गयां। एसआईटी के अफसरों ने बताया कि आशीष अपने साथ बेगुनाही साबित करने के लिये जो सबूत लाये थे, वो बेगुनाही साबित करने के लिये नाकाफी थे। एसआईटी के अफसर उनसे यह जानने की कोशिश कर रहे थे कि 3 बज कर 26 मिनट से 3 बज कर 35 मिनट तक वो कहां थे। किसानों पर थार जीप इसी दौरान चढ़ाई गयी थी। इस बात का जवाब आशीष सिर्फ इतना था कि वो घटना पर मौजूद नहीं थे। लेकिन इस वक्त वो कहां थे इसके बारे में सबूत नहीं दे पाये।
तीन अक्टूबर को किसानों का एक दल अजय मिश्रा और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के कार्यक्रम का विरोध करने मुख्य सड़क पर खड़े थे। जब केशव प्रसाद मौर्य का काफिला वहां से गुजरा तो किसानों ने उन्हें काले झण्डे दिखाने साथ मोदी योगी सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इसके बाद किसान सड़क के किनारे जा रहे थे। उसी दौरान किसानों को पीछे से आ रही थार जीप ने जोरदार टक्कर मारी। इससे घटना स्थल पर ही चार किसानों ने दम तोड़ दिया। इसके अलाावा कुछ किसान गंभीर रूप से घायल हो गये। मृतकों में 19 साल का लवप्रीत और 80 साल के नछत्र सिंह भी शामिल थे। इस घटना से नाराज किसानों ने कुछ वाहनों में आग लगा दी। भाजपा नेताओं ने यह कहा कि किसानों ने उनके चार कार्यकर्ताओं को पीट पीट कर मार डाला। लेकिन किसानों का कहना है कि उन्होंने किसी भी बीजेपी कार्यकर्ता को नहीं मारा। हिंसा के दौरान एक पत्रकार रमन कश्यप की मौत हो गयी। इस घटना के बाद स्थानीय पुलिस ने आशीष मिश्रा समेत अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। घटना के तीन दिन बाद जब सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः ध्यान देते हुए पूछा कि अब तक सरकार ने क्या कार्रवाई की और कितने लोगों को गिरफ्तार किया तब जा कर यूपी पुलिस जागी और दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। लेकिन मुख आरोपी को पुलिस ने न तो पूछताछ के लिये बुलाया और न ही उसको गिरफ्तार करने की कोशिश की। खानापूरी के लिये अजय मिश्रा के घर पर एक समन चस्पा कर वापस आ गये। मंत्री अजय मिश्रा का कहना है कि पुलिस घर के बाहर गेट पर नोटिस चस्पा कर वापस चले गये। पुलिस ने घर में किसी को भी बुला कर इसकी सूचना नहीं दी। आशीष घर पर ही थे। लेकिन उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं था। इसलिये वो पुलिस के सामने पेश नहीं हुआ। लेकिन 9 तारीख को वो क्राइम ब्रांच कार्यालय जरूर पेश हो जायेंगे। वो बिलकुल निर्दोष हैं उनके पास इस बात के पुख्ता सबूत है कि वो घटना स्थल पर मौजूद नहीं थे। वो दंगल कार्यक्रम स्थल पर मौजूद थे। इस बात के लिये उनके पास बहुत लोग इसका सबूत हैं।








