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टूटने वाला है इंडिया ब्लाक!
जब से हरियाणा और महाराष्ट्र में एनडीए की प्रचंड जीत हुई है तब से इंडिया ब्लाक के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है। इस सबका दोष राहुल गांधी के माथे मढ़ने की कोशिश की जा रही है। लेकिन भाजपा अपनी साजिशें झारखंड में सफल नहीं कर पायी। वहां इंडिया ब्लाक की भारी बहुमत से सरकार बन गयी। एक बार फिर हेमंत सोरेन सीएम बनाये गये हैं। झारखंड में भाजपा और मोदी शाह ने कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और असम के सीएम हिमंता बिस्व सरमा और योगी आदित्यनाथ को झारखंड जीतने के लिये भेजा बावजूद इसके भाजपा को मुंह की खानी पड़ी। वहां बंटेंगे तो कटेंगे का नारा नहीं चला। वहां हम बंटेंगे नहीं और कटेंगे नहीं का नारा सफल रहा। भाजपा का सारा अभियान केवल झूठ और फरेब पर टिका था। खूब अफवाह यह फैलाई गयी कि बंगलादेश से घुसपैठिये आ कर लड़कियों को उठा कर ले जायेंगे। यहां घुसपैठियों का राज कायम हो जायेगा। लेकिन आदिवासी बाहुल्य प्रदेश में भाजपा की साजिश और झूठ सफल नहीं हुई। यहां हेमंत सोरेन पर ही जनता ने विश्वास किया। भाजपा को यहां भारी निराशा हाथ लगी। लेकिन महाराष्ट्र और हरियाणा में भाजपा ने लोकल प्रशासन और ईवीएम चुनाव आयोग की मदद से जीत हासिल कर ही ली। महाविकास अघाड़ी के दल शिवसेना यूबीटी और एनसीपी शरद गुट का रवैया विधानसभा चुनाव का परिणाम उनके पक्ष में नहीं आये हैं तब से उनके रंग बदलने लगे हैं। कारण है कि लोकसभा में परिणाम महाविकास अघाड़ी के पक्ष आये थे। उन्हें उम्मीद थी कि विधानसभा चुनाव में परिणाम उनके पक्ष में आयेंगे। लेकिन परिणाम से उन्हें काफी जोर का झटका लगा है। ऐसे मे ये दोनों क्षेत्रीय हैं। दोनो दल अपने भविष्य को लेकर चिंता में हैं। चुनाव पांच साल बाद होने हैं इस बीच उनके वजूद का खतरा मंडरा रहा है। ऐसे में वो कांग्रेस के साथ रहे या मोदी शाह का दामन थामें। इसी बीच उ़द्धव ठाकरे ने सीएम देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात कर यह संदेश दिया है कि वो महाविकास अघाड़ी में कुछ दिनों के मेहमान हैं। इस बात की पसोपेश है कि धारा के खिलाफ जायें या धारा में बह जायेें। ये बात तो यह है कि भाजपा धीरे धीरे क्षत्रपों को खत्म कर देगी। किसका नंबर पहले आयेगा यह समय बतायेगा।
शरद पवार की राजनीति को कोई नहीं समझा है
शरद पवार को भी यह सोचना है कि वो महाविकास अघाड़ी में रहें है या मोदी शाह से हाथ मिलायें। विधानसभा चुनाव में उनके भतीजे अजित पवार ने उन्हें भारी मात दी हैं। लोकसभा चुनाव में उन्हें जनता का भारी समर्थन मिला था। लेकिन विधानसभा के चुनाव में जनता ने उनको समर्थन नहीं दिया। इस बार उनके भतीजे अजित पवार को आशा से अधिक सीटों जीत हासिल हुई है।

Modi Shah & BJP is feeling trouble in Maharashtra politics
Modi Shah & BJP is feeling trouble in Maharashtra politics

महाविकास अघाड़ी के दलों ने इस भारी हार का ठीकरा ईवीएम और चुनाव आयोग पर भी फोड़ा है। वैसे भी शरद पवार को मोदी शाह से भी परहेज नहीं है। वो राजनीतिक वजूद के लिये किसी से हाथ मिला सकते है। वो पहले भी एनडीए के घटक के रूप काम कर चुके हैं। शरद पवार बस मोदी शाह के इशारे का इंतजार कर रहे हैं।
ममता, उद्धव ठाकरे शरद पवार ने रंग दिखाने शुरू किये
बंगाल की सीएम ममता बनर्जी जो पहले इंडिया ब्लाक में काफी दिखी थीं आम चुनाव के दौरान कट सी गयीं थी। उन्होंने कां ग्रेस को अपने यहंा एक भी सीट देने से इनकार कर दिया था। ममता का कहना था कि बेस्ट बंगाल के बाहर वो इंडिया ब्लाक का सहयोग कर सकती हैं। जब महाराष्ट्र और हरियाणा में कांग्रेस का प्रदर्शन ठीक नहीं हुआ तो उन्होंने राहुल गांधी के नेतृत्व पर ही साल उठा दिये। उनके तेवर देख कर लगा कि वो चाह रही हैं कि इंडिया ब्लाक की कमान उन्हें सौंप दी जाये। इसके लिये शरद पवार ने उनकी इस बात का समर्थन भी कर दिया। इसके साथ महाराष्ट्र की महाविकास अघाड़ी में भी टूट के आसार दिखने लगे हैं।

Gautam adani bo down against CM Mamta di di
Gautam adani bo down against CM Mamta di di for new prroject in W Bengala

ममता और अडाणी के बीच क्या खिचड़ी पक रही
ममता बनर्जी जो कभी इमनादार और गरीब असहाय और दबे कुचले समाज की पैरोकार के रूप में जानी जाती थी। अपने सादे जीवन और इमानदारी के लिये विख्यात थी। अब उनमें भी बदलाव देखा जा रहा है। आज कल वो गौतम अडाणी के साथ मीटिंग करती नजर आ रही हैं। अभी तक वो इंडिया ब्लाक के साथ मिलकर गौतम अडाणी के खिलाफ आवाज उठाती रहती थी। लेकिन आज हालात बदल गये हैं अब वो गौतम अडाणी को अपने प्रदेश में उद्योग लगाने का न्यौता दे रही हैं। दूसरी ओर राहुल गांधी लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं। सीनियरिटी और उम्र में भले ही ममता बनर्जी बड़ी हैं लेकिन लोकप्रियता में राहुल गांधी देश में ही नही बल्कि विदेशों में भी बहुत है। इसके अलावा कांग्रेस के सौ सांसद हैं। शुरूआत में इंडिया ब्लाक की कमान थामने के लिये ममता बनर्जी को मौका दिया गया था। तब नितीश कुमार और ममता का नाम आगे किया था। लेकिन तब न ममता ने हां की थी और न ही नितीश कुमार ही तैयार हुए थे। बाद में राहुल गांधी को इंडिया ब्लाक में नेतृत्व सौंपा गया था। पिछले दो सालो ं में जब से राहुलल गांधी ने भारत जोड़ो यात्रा और न्याय यात्रा का आयोजन किया है तब से कांग्रेस और राहुल गांधी की छवि में खासा प्रभाव देखा गया है। लेकिन इधर जब से ममता और अडाणी के बीच तालमेल बैठा है तब से ममता इंडिया ब्लाक की कमान हाथ में लेने को बेकरार हैं।

 

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