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पवन सिंह
35 हजार का आक्सीजन सिलेंडर के लिए हलकान होने वाले, पांच किलोमीटर के लिए 25 हजार रुपए में एंबुलेंस और अपनों की लाशें जलाने के लिए खुद आटो पर लकड़ियां लाद कर लाने वाले, कार की छतों पर लाशें ढोने वाले, रेत में लाशों को दबाने वाले, चील व कुत्तों को इंसानी लाशें खिलवाने वाले तब द्रवित न हुए लेकिन अब अफगानिस्तान को लेकर तौलिया गीली कर रहे हैं। लाशें गिनती में न आएं तो शमशान घाट टीन से ढके जा रहे थे, लाशों के रामधामी दुपट्टे तक खींचे जा रहे थे कि रेत में लाश न नजर आए, टायर तक से इंसानों की लाशें फूंकीं गईं लेकिन बेगैरतों का दिल न पसीजा लेकिन अफगानिस्तान पर जारजार रोये जा रहे हैं। खुद के धर्म स्थलों पर लड़कियों की अस्मत लूट ली जाती है, आधी रात को एक लड़की कैरोसिन डाल कर जला दी जाती है और फिर जाति देखकर घटिया लोग विरोध करना है कि नहीं करना है…यह तय करते हों… उन्हें अफगानिस्तान विचलित करता है। पैरासिटामोल की एक टैबलेट 20 रूपए की खरीदने वाले, आक्सीजन कंस्ट्रेटर डेढ़ लाख, रेमेडेसिवर इंजेक्शन 50 हजार में खरीदने वाले अफगानिस्तान को लेकर प्रसव पीड़ा से गुजर रहे हैं। आक्सीजन सिलेंडर का रेगुलेटर पांच हजार में, पेट्रोल-डीजल सौ पार में खरीदने वाले अफगानिस्तान में चावल व चाय किस रेट पर मिल रहा है, उसे लेकर स्यापा कर रहे हैं। ऐसा नहीं है कि ये मूर्खों और जाहिलों की भीड़ एक ही तरफा हो….इधर तमाम ईमामवाले भी अफगानिस्तान पर लगे पड़े हैं। जैसे इधर लोगों को रामराज्य दिख रहा है ठीक वैसे ही उधर अफगानिस्तान में भी अल्लाह की सल्तनत के दीदार हो रहे हैं। दरअसल, यह धर्मांधों की एक पूरी की पूरी नस्ल है जो विशुद्ध आदमखोर हो चुकी है। समूचा पूर्वोत्तर भारत सुलग रहा है और हमेशा की तरह देश का चरणों में सजदा करता हुआ मीडिया खामोश होकर अफगानिस्तान दिखा रहा है। कारण साफ है-यूपी में चुनाव हैं और मौजूदा हालातों में पाकिस्तान से ज्यादा वोट अफगानिस्तान से मिल सकते हैं। गजब का मीडिया है और गजब हैं इस मुल्क के लोग कि नार्थ ईस्ट इंडिया के भयावह स्थिति पर ख़ामोश हैं। मेघालय में स्थित चिंताजनक है। पूर्वोत्तर भारत के राज्यों में अस्थिरता, हिंसा, टकराव से लेकर कानून व्यवस्था खत्म हो गई है, लेकिन सरकार सबकुछ छिपा रही है और कुछ भी दिखाया नहीं जा रहा है। एक के बाद एक राज्यों को टकराव व हिंसा बढ़ती जा रहा है। अफगानिस्तान के बिगड़े हालात 24 घंटे दिखाए जा रहे हैं, लेकिन पूर्वोत्तर भारत का सच हमसे छिपाया जा रहा है। केंद्र सरकर नॉर्थ ईस्ट की हालात के बारे में ध्यान नहीं दे रही। इस पूरे मामले पर प्रधानमंत्री और गृहमंत्री को जवाब देना चाहिए, लेकिन गजब का सन्नाटा है।
आसाम का दीमा जिला दो दिनों से कुछ पत्रकारों के बीच चर्चा में है। यहां सात ट्रकों में आग लगा दी गई जिसमें पांच ड्राइवर जलकर मर गये। कहीं कोई खबर किसी खबरांग्नाओं के मुंह से नहीं निकली।
असम-मिजोरम में दोनों जगह तथाकथित राष्ट्रवादियों की सरकारें हैं। रामराज्य पसरा हुआ है। सीमा पर हाल ही में हुई हिंसक झड़पों से पुलिस, व्यापारी, कार्यकर्ता- सभी वर्गों के लोग बेहद निराश हैं। दो पड़ोसी पूर्वोत्तर राज्यों के बीच झड़पों में असम पुलिस के छह कर्मियों की मौत के अलावा लगभग 100 नागरिकों और सुरक्षा कर्मी घायल हो गये। असम और मिजोरम दोनों में व्यवसाय करने वाले व्यापारी, दोनों राज्यों में काम करने वाले निर्माण श्रमिक और अन्य लोगों को हाल की घटनाओं से गहरा दुख हुआ है लेकिन केंद्र की सत्ता अलग ही मस्त है, उसे पता है मूर्खों की पूरी फौज उसके साथ है।
अफगानिस्तान के हुक्मरानों ने रूस-अमेरिका की लड़ाई में खुद को पार्टी बनाकर जो बोया था वो काट रहे हैं। एक अच्छा-भला देश नर्क बन गया है। अफगानिस्तान से सबक लेते हुए इस देश की आवाम को अब सतर्क हो जाने की जरूरत है क्योंकि बहुत समय नहीं बचा है। तबाही का कोई रंग नहीं होता वह अलग चाल चलती है।

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